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सालाना बजट घाटे को पाटने की योजना बना रहा जिप

Updated at : 25 Dec 2019 12:50 AM (IST)
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सालाना बजट घाटे को पाटने की योजना बना रहा जिप

सीवान : आय और व्यय के बीच 65 लाख रुपये के घाटे में चल रहेजिला परिषद को आने वाले वित्तीय वर्ष में अपनी आय योजना को नया रूप देना पड़ सकता है. अब तक सरकारी अनुदान के भरोसे घाटे को पाटने की चल रही प्रक्रिया समाप्त होने वाली है. पिछले वार्षिक बजट में राज्य सरकार […]

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सीवान : आय और व्यय के बीच 65 लाख रुपये के घाटे में चल रहेजिला परिषद को आने वाले वित्तीय वर्ष में अपनी आय योजना को नया रूप देना पड़ सकता है. अब तक सरकारी अनुदान के भरोसे घाटे को पाटने की चल रही प्रक्रिया समाप्त होने वाली है. पिछले वार्षिक बजट में राज्य सरकार ने नगर निगमों, नगर निकायों, जिला परिषदों को अपने बजट घाटा के लिए सरकार का मुंह नहीं देखने की हिदायत दी गयी थी. इन्हें स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जा चुका है कि वे अपने व्यय के अनुसार आय का इंतजाम स्वयं करें.

योजनागत व्यय को छोड़कर अन्य खर्चों पर अंकुश लगाने के साथ ही जिला परिषद विभिन्न बाजारों में जल जमाव और कूड़ा स्थल बने अपनी जमीनों की पैमाइश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है. मार्च 2020 में इस संबंध में कोई नयी योजना सामने आने की संभावना है जिससे 65 लाख के बजट घाटे को पाटा जा सके.
नगर परिषद कार्यालय में कैफेटेरिया सह मैरिज हॉल का निर्माण : सालाना 65 लाख रुपये की सालाना घाटे की पूर्ति के लिए और आय बढ़ाने के उद्देश्य से परिषद मुख्यालय परिसर में कैफेटेरिया सह मैरिज हॉल का निर्माण प्रगति पर है. आधुनिक कैफेटेरिया सह मैरिज हॉल को आम नागरिकों बुक करा सकेंगे.
हाट बाजारों की बंदोबस्ती से होती है आय : जिला परिषद की जमीन पर लगने वाले जिले भर में विभिन्न बाजारों की सालाना बंदोबस्ती से भी 15 लाख तक आय हो जाती है. यह घटती-बढ़ती रहती है. ऐसे बहुत से बाजार हैं जहां जिला परिषद की जमीन है उसकी नापी कराई जा रही है ताकि आने वाले दिनों में वहां स्थाई दुकानें बनाकर आय को स्थाई किया जा सके.
2020-21 के बजट में रखे जायेंगे नये प्रस्ताव : फरवरी-मार्च में 2020-21 के बजट का स्वरूप तैयार होगा जिसमें नये निर्माण कार्य के प्रस्ताव रखे जायेंगे. चालू वित्तीय वर्ष में कितना घाटा हुआ इसका पता तब ही चल पायेगा.
1 करोड़ 85 लाख हुए व्यय और आय हुई 1 करोड़ 20 लाख
पिछले वित्तीय वर्ष 2018-19 में जिला परिषद को एक करोड़ 85 लाख कुल व्यय करने पड़े थे जबकि उसकी आय एक करोड़ 20 लाख तक पहुंच सकी थी. इस घाटे की भरपाई के लिए जिला परिषद को सरकार से अनुदान की मांग करने की बाध्यता बनी हुई है. जिला परिषद के पास शहर के अलावा महाराजगंज, सिसवन, मैरवा और भगवानपुर में जमीन उपलब्ध है जहां भगवानपुर को छोड़कर सिसवन और मैरवा में मार्केट का निर्माण कार्य चल रहा है इसमें 90 फीसदी कार्य पूर्ण हो चुके हैं.
महाराजगंज व भगवानपुर हाट में बनेंगी दुकानें
मैरवा और सिसवन में दुकानें बनकर लगभग तैयार है अभी इसका अलॉटमेंट नहीं हुआ है. महाराजगंज और भगवानपुर हाट में भगवानपुर कॉलेज के पास जिला परिषद की दस कट्ठा से ज्यादा जमीन है. यहां भी मार्केट बनाने की योजना है. अगले वित्तीय वर्ष में इसे योजना में शामिल किया जा सकता है. पूर्व की योजनाएं पूर्ण होने के बाद ही नयी योजना के लिए कार्य प्रारंभ होगा.
वैकल्पिक साधनों को विकसित कर पाटा जायेगा बजट घाटा
65 लाख के सालाना बजट घाटे को पूरा करने के लिए भविष्य में सरकारी अनुदान मिलने की संभावना कम होती जा रही है. जिला परिषद विभिन्न बाजारों में उपलब्ध जमीन पर दुकानें-मैरिज हॉल बनाकर कमाई का नया स्त्रोत विकसित करेगा, यह कार्य शहर में बन रहे कैफेटेरिया सह मैरिज हॉल से प्रारंभ होगा.
सुनील कुमार, उपविकास आयुक्त, सीवान
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