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दुष्कर्म मामले में पुलिस सभी कर्मचारियों से करेगी पूछताछ

Updated at : 20 Nov 2019 4:25 AM (IST)
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दुष्कर्म मामले में पुलिस सभी कर्मचारियों से करेगी पूछताछ

सीवान : विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की सात साल की मानसिक रूप से दिव्यांग बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में पुलिस संस्थान के सभी कर्मचारियों से पूछताछ करेगी. सोमवार को एसडीपीओ जितेंद्र पांडेय ने दुष्कर्म मामले में संस्थान के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की. हालांकि, पूछताछ में क्या निकल कर आया, इस पर पुलिस कुछ […]

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सीवान : विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की सात साल की मानसिक रूप से दिव्यांग बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले में पुलिस संस्थान के सभी कर्मचारियों से पूछताछ करेगी. सोमवार को एसडीपीओ जितेंद्र पांडेय ने दुष्कर्म मामले में संस्थान के कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की. हालांकि, पूछताछ में क्या निकल कर आया, इस पर पुलिस कुछ भी बोलने से बच रही है. कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है.

इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में भी दुष्कर्म होने की बात तो की गयी है, लेकिन घटना के समय का उल्लेख नहीं है. पुलिस घटना तीन साल पहले की बता रही है, जबकि बच्ची ने कोर्ट में दिये अपने बयान में घटना का समय करीब दो साल पहले बताया है. वहीं, बच्ची को सात नवंबर को परेशानी हुई तो मेडिकल टीम उसकी जांच के लिए गयी.
जांच के बाद मेडिकल टीम ने डीएम रंजीता को रिपोर्ट दी कि बच्ची के साथ गलत हुआ है. इस पर आठ नवंबर को एसडीओ के नेतृत्व में एक टीम ने इसकी जांच की. बच्ची को परेशानी बढ़ी तो नौ नवंबर को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. डीएम के निर्देश पर 10 नवंबर को बच्ची के दुष्कर्म की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, जिसमें डॉ कौशर आलीम गनी, डॉ मिताली और डॉ रीता सिन्हा शामिल हैं.
इसके साथ डॉ एमके आलम के नेतृत्व में तीन डॉक्टरों की टीम बच्ची की उम्र की जांच करने के लिए बनायी गयी. टीम की जांच रिपोर्ट आनी बाकी है. सवाल यह उठता है कि जब बच्ची को घटना के बाद संस्थान में रखा गया तो उस समय हुई मेडिकल जांच में यह बात सामने क्यों नहीं आयी? दूसरा यह कि संस्थान के सभी बच्चों की नियमित रूटीन जांच होती है.
जब बच्ची 2017 से संस्थान में रह रही थी तो इस दौरान मेडिकल जांच में बच्ची के साथ कुछ गलत होने की बात सामने क्यों नहीं आयी? वहीं बताया जा रहा है कि विशिष्ट दत्तक संस्थान में शून्य से तीन साल तक के बच्चों को ही रखने का प्रावधान है.
फिर सात साल की बच्ची को इस संस्थान में रखने की क्या वजह थी? इतने दिनों तक संस्थान में रहने के बाद बच्ची के माता-पिता व उसके निवास स्थान की खोज-खबर क्यों नहीं की गयी? पुलिस को बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार है.
मेडिकल रिपोर्ट के बाद घटना के समय का कुछ सही अंदाज लगाया जा सकता है. इधर, पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा का कहना है कि सभी कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि वास्तविकता की तह तक पहुंचा जा सके. उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्द ही कार्रवाई की जायेगी. घटना चाहे जब की हो और कोई भी दोषी हो, उसे बख्शा नहीं जायेगा.
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