अनदेखी: गिरफ्तारी पर से स्टे हटने के बाद भी पुलिस की हीलाहवाली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jul 2018 11:39 PM

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11 माह बाद भी दहेज के लिए कोख निकलवाने वाले आरोपितों की नहीं हो सकी गिरफ्तारी सीवान : जिले के भगवानपुर थाने के सरहरी गांव निवासी कुमार पियूष की पत्नी नेहा देवी की कोख निकालने वाले एक भी आरोपित को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है. यूं कहा जाये तो प्राथमिकी दर्ज होने के 11 […]

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11 माह बाद भी दहेज के लिए कोख निकलवाने वाले आरोपितों की नहीं हो सकी गिरफ्तारी

सीवान : जिले के भगवानपुर थाने के सरहरी गांव निवासी कुमार पियूष की पत्नी नेहा देवी की कोख निकालने वाले एक भी आरोपित को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है. यूं कहा जाये तो प्राथमिकी दर्ज होने के 11 माह बाद भी पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर हाथ पे हाथ रख कर बैठी हुई है. वहीं आरोपित एक-एक अपनी जमानत करा खुलेआम घूम रहे है. यहीं नहीं आरोपित पति भी न्यायालयों का चक्कर बेल लेने के लिए काट रहे है. इसके बाद भी पुलिस उसे गिरफ्तार करने में असफल है. यही नहीं इस कांड का अप्राथामिकी अभियुक्त सह कोख निकालने वाला चिकित्सक भी आराम से अपनी ड्यूटी बजा रहा है. वहीं पीड़िता व उसके परिजन न्याय के लिए थाने से लेकर एसपी के कार्यालय का चक्कर काट रहे है. मालूम हो कि सरहरी गांव निवासी कुमार पियूष की पत्नी नेहा देवी ने थाने में आवेदन देकर अपने पति, ससुर, सास, देवर तथा ननद पर आरोप लगाया कि दहेज में पिता द्वारा टीबी, फ्रीज, वाशिंग मशीन, कुलर, पलंग तथा सोफा सेट नहीं दिये जाने पर प्रताड़ित कर डॉक्टर से ऑपरेशन द्वारा उसका गर्भाशय निकलवा दिया है. अब वह मां नहीं बन सकती है. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले में 23 अगस्त 2017 को ही एफआईआर दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस कार्रवाई के नाम पर न तो एक आरोपित की गिरफ्तारी हो सकी है और न किसी के विरोध कुर्की जब्ती की कार्रवाई. एक तरह से देख जाये तो पुलिस एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्ण रूप से शिथिल रही. पीड़िता नेहा देवी फरियाद के लिए दर-दर का ठोकर खा रही है .

क्या है पीड़िता नेहा का आरोप :

गोपालगंज जिले के मांझागढ़ निवासी दिनेश सिंह की पुत्री ने 23 अगस्त 2017 को भगवानपुर थाने में एफआईआर दर्ज कर कहा था कि उसकी शादी भगवानपुर थाने के सरहरी निवासी रामजी सिंह के पुत्र कुमार पियूष से 11 मार्च 2015 में हुई थी. शादी में उसके पिता ने करीब 12 लाख का उपहार दिया था. शादी के बाद उसका पति, ससुर, सास, देवर तथा ननद बारी-बारी से प्रताड़ित करते थे. एक बार उसे जहर देकर तथा एक बाद गैस से जलाकर मारने का प्रयास किया गया. नेहा ने अपने आरोप में कहा है कि 27 अप्रैल 2017 को उसका पति और ससुर ने नशा की दवा देकर डॉक्टर से ऑपरेशन करावाकर उसका गर्भाशय निकलवा दिया.

पुलिस अधीक्षक एवं एसडीपीओ ने पर्यवेक्षण में सही पाया आरोप : तत्कालीन पुलिस अधीक्षक सौरव कुमार साह ने 14 सितंबर 2017 को इस कांड के अपने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में आरोप को सही पाया. पुलिस अधीक्षक ने घटना के सभी 07 प्राथमिकी तथा एक अप्राथमिकी अभियुक्त सारण जिले के एकमा के डॉक्टर एस कुमार की गिरफ्तारी व कुर्की जब्ती की कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया. एसपी ने अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया कि मेडिकल जांच कराकर रिपोर्ट समर्पित करें. तत्कालीन अनुमंडलीय पुलिस उपाधीक्षक संजीत कुमार ने भी सात प्राथमिकी तथा एक अप्राथमिकी अभियुक्त की गिरफ्तारी करने तथा फरार होने की स्थित में कुर्की जब्ती की कार्रवाई करने का अनुसंधानकर्ता को 29 अगस्त 2017 निर्देश दिया था . उन्होंने वादिनी का मेडिकल रिपोर्ट आने तक धारा 313/316 भादवि पर अंतिम रूप से निर्णय लेना श्रेयस्कर बताया था .

तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने की थी नेहा की जांच : पुलिस के अनुरोध पर नेहा देवी के आरोपों की सत्यता की जांच के लिए सदर अस्पताल के तीन डॉक्टरों की मेडिकल बोर्ड ने नेहा देवी की जांच किया. जांच में सदर अस्पताल के सर्जन डॉ. सुधीर कुमार, महिला डॉक्टर रीता सिन्हा तथा डॉ देवेश कुमार शामिल हुए. जांच में डॉक्टरों ने नेहा के पेट के निचले मश्य भाग में एक तीन ईंच का ऑपरेशन करने का निशान पाया जो करीब छह माह पुराना लग रहा था. अल्ट्रासाउंड में गर्भाशय तो नजर आ रहा था. लेकिन गर्भाशय के दोनों साइड का ओवरी नहीं दिख रहा था. इसके बाद उमआरआसई जांच में यह स्पष्ट हो गया कि गर्भाशय तो है, लेकिन उसके दोनों साइड का ओवरी नहीं है. डॉक्टरों ने अपने जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि दोनों साइड की ओवरी को ऑपरेशन कर हटा दिया गया है.

क्या कहते हैं थानाध्यक्ष

थानाध्यक्ष ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली. इसके बाद आरोपितों की गिरफ्तारी की फिराक में पुलिस जुट गयी. इसी बीच सातों अभियुक्तों ने गिरफ्तारी पर स्टे लगवा दिया. इसी बीच महिला के पति को छोड़ शेष छह आरोपितों ने जिला जज के यहां से जमानत याचिका खारिज होने पर हाईकोर्ट से जमानत ले ली. वहीं पति की जमानत याचिका स्टे हटने के बाद जिला जज ने खारिज कर दी. पुलिस उसकी व अप्राथमिक अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. गिरफ्तारी न होने पर कुर्की की कार्रवाई की जायेगी.

राकेश मोहन, थानाध्यक्ष, भगवानपुर हाट

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