भारतीयता पर गर्वानुभूति करना और कराना ही अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव का उद्देश्य

Published by : VINAY PANDEY Updated At : 05 Nov 2025 6:44 PM

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जगज्जननी मां सीता की पावन प्राकट्य स्थली, सीतामढ़ी शहर के रिंग बांध स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की अगुवायी में बुधवार को अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव का शुभारंभ हुआ.

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सीतामढ़ी. जगज्जननी मां सीता की पावन प्राकट्य स्थली, सीतामढ़ी शहर के रिंग बांध स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान की अगुवायी में बुधवार को अखिल भारतीय संस्कृति महोत्सव का शुभारंभ हुआ. महोत्सव का उद्घाटन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ. छात्राओं द्वारा अतिथियों के स्वागतार्थ स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया. मां जानकी के प्राकट्य एवं सीता विवाह से संबंधित मनभावन गीत एवं नृत्य का प्रदर्शन आगत अतिथियों का मन मोह लिया. विद्यालय के प्रधानाचार्य अनोज कुमार अकेला एवं लोक शिक्षा समिति प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने अतिथियों का परिचय कराया. मंचस्थ अधिकारियों, गणमान्य एवं अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्र, पाग एवं श्रीफल से किया. अखिल भारतीय संस्कृति बोध परियोजना के संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने प्रस्तावना उद्बोधन में कहा कि संपूर्ण भारत में संचालित विद्या भारती विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्रायें अपने देश की संस्कृति, परंपरा व जीवन मूल्यों पर गर्व करें, इस उद्देश्य से संस्कृति महोत्सव भारत के विविध राज्यों में प्रतिवर्ष आयोजित होते हैं. इस महोत्सव में भारतीय संस्कृति से जुड़ी अनेक विधाओं की राष्ट्र स्तरीय प्रतिस्पर्धाओं के माध्यम से छात्र-छात्रायें अपनी मेधा एवं प्रतिभा को प्रदर्शित करते हैं. विद्या भारती के 11 क्षेत्र से 500 प्रतिभागी छात्र-छात्रायें इस महोत्सव में सम्मिलित हुए हैं, जो भारत के लगभग सभी राज्यों से आए हुए हैं. उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि श्री किशोरी शरण मधुकर ””””मुठिया बाबा”””” ने विद्या भारती विद्यालय एवं सरस्वती विद्या मंदिर, सीतामढ़ी की भूरि- भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां आकर साक्षात् भारतीय संस्कृति का दर्शन हुआ. विद्या भारती अपने विद्यालय के छात्र-छात्राओं में भारतीय संस्कार, परंपराओं एवं जीवन मूल्यों को समाहित कर रहे हैं. गोविंद चंद्र महंत, संगठन मंत्री, विद्या भारती सह समारोह के मुख्य वक्ता ने कहा कि विद्या भारती शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करती है. भारतीयता एवं राष्ट्रीयता से युक्त शिक्षा देने का कार्य विद्या भारती कर रही है. समारोह की अध्यक्षता व विद्या भारती की उपाध्यक्ष साधना भंडारी ने छात्र-छात्राओं को विजयी भव का आशीर्वचन देते हुए कहा कि तालियां केवल दूसरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने लिए भी बजनी चाहिए. अनवरत प्रयास ,मेहनत के बल पर आप राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चयनित हुए हैं. बगही धाम के संत डॉ शुकदेव दास जी महाराज भी मंचासीन रहे. विद्यालय के सचिव रामनरेश ठाकुर के द्वारा संपन्न हुआ. इस अवसर पर विद्या भारती के मंत्री राम अवतार नरसरिया, संस्कृति शिक्षा संस्थान के निदेशक सुधीर कुमार, मंजरी शुक्ला, कुलबीर शर्मा, सचिव, संस्कृति शिक्षा संस्थान, ललित बिहारी गोस्वामी, संरक्षक, संस्कृति शिक्षा संस्थान, ब्रह्मा जी राव, मंत्री, विद्या भारती, डॉ सुबोध कुमार, प्रदेश मंत्री, ख्यालीराम, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, दिवाकर घोष, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, अमित कुमार, नवनीत कुमार, सुशील कुमार, अजय तिवारी, पूर्व प्रदेश मंत्री, अभय गर्ग, प्रांत कार्यवाह, मृत्युंजय भारत, विभाग प्रचारक, नागेंद्र पूर्वे, डॉ पूजा, डॉ नूतन, प्रकाश, मुकेश, संस्कृति बोध के प्रांतीय एवं क्षेत्रीय संयोजक, लोक शिक्षा समिति के पूर्णकालिक कार्यकर्ता प्रबंधकारिणी समिति के कोषाध्यक्ष, अमरेंद्र कुमार सिंह एवं संरक्षक डॉ केएन गुप्ता समेत बड़ी संख्या में पूर्व छात्र-छात्रायें व गणमान्य लोग शामिल हुए.

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