नहाय खाय के साथ छठ महापर्व शुरू, खरना आज

शनिवार से प्रकृति को समर्पित लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो गया. पहले दिन तमाम छठ व्रतियों ने सुबह नदियों एवं तालाबों में स्नान कर तन और मन से स्वच्छता धारण किया.
सीतामढ़ी. शनिवार से प्रकृति को समर्पित लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो गया. पहले दिन तमाम छठ व्रतियों ने सुबह नदियों एवं तालाबों में स्नान कर तन और मन से स्वच्छता धारण किया. अरबा चावल की भात, चना की दाल व कद्दू की सब्जी भोजन कर व्रत की शुरुआत की. खरना के लिए बाजार में मिट्टी के चूल्हे 150 से 300 रुपये तक बिके. वहीं, कद्दू 80 से 130 रुपये तक प्रति कद्दू बिके. छठ पूजा को लेकर शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजार गुलजार दिखे. मंहगाई के बावजूद लोग रेडीमेड कपड़े, बरतन, सोना-चांदी, मिट्टी, तांबा, पीतल व बांस से निर्मित वस्तुओं की जमकर खरीददारी करते दिखे. वहीं, किराना दुकान से लेकर फल, सब्जियों व सजावटों की दुकानों पर भी दिन भर ग्राहकों की भीड़ नजर आयी. इधर, नगर निगम व जिले के विभिन्न नगर निकायों की ओर से छठ घाटों को आकर्षक तरीके से सजाने-संवारने का काम तेज गति से किया जा रहा है. जहां जरूरत है, वहां कृतिम तालाबों का निर्माण किया जा रहा है. तमाम छठ घाटों पर व्रतियों व आम श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिये रोशनी, साउंड, बैरिकेडिंग, चेंजिंग रूम इत्यादि सुविधाओं को बहाल करने के लिये निगम कर्मी लगे हुए हैं.
नगर निगम क्षेत्र के 11 छठ घाट खतरनाक घोषित सीतामढ़ी. नगर निगम के उप नगर आयुक्त कुलदीप सिन्हा के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में कुल 148 छठ घाटों पर तैयारियां की जा रही है. वहीं, सिटी मैनेजर अमरजीत कुमार के अनुसार, लखनदेई नदी में बीते कुछ दिन पहले ही आयी बाढ़ के कारण कई छठ घाटों पर छठ पूजा संदिग्ध मालूम पड़ रहा था. एक टीम गठित कर घाटों की जांच की गयी, जिसमें पता चला कि शहर के 11 छठ घाट ऐसे हैं, जहां छठ पूजा करना खतरना साबित हो सकता है, इसलिये नगर निगम की ओर से उक्त 11 छठ घाटों को खतरनाक घोषित किया गया है, जहां छठ पूजा करने की मनाही रहेगी. खतरनाक घोषित किये गये इन 11 छठ घाटों में वार्ड संख्या-14 स्थित रेलवे पुल के समीप, सरस्वती विद्या मंदिर के पूरब चहारदिवारी के किनारे, भवदेवपुर के चंदननगर, दरबार घाट, मोहनपुर पुल घाट, मेंहदीनगर कहार टोला घाट, उत्तराहिनी घाट, भवदेवपुर, रामघाट, बाइपास पुल, धोबी घाट मधुबन व चकमहिला घाट शामिल है.नहाय खाय से लेकर अर्घ तक नयी फसलों का बनता है प्रसाद
पुपरी. लोक आस्था का महापर्व छठ खेती से जुड़ा हुआ पर्व माना जाता है. कृषि वैज्ञानिक मनोहर पंजियार व सच्चिदानंद प्रसाद के अनुसार, छठ में नयी फसलों का प्रयोग अधिक होता है, इसलिये इसे नव्वान का पर्व भी कहा जाता है. नहाय खाय से लेकर अर्ध्य देने तक नयी फसलों का प्रसाद बनता है. खरना में प्रसाद के रूप में जो खीर और रोटी बनती है, उसमें ईंख से बने गुड़ और गम्हरी के चावल का प्रयोग किया जाता है. इसके पीछे यह धारणा है कि जो फसल सीधे खेत से निकल कर आती है, वह पूजा के लिए शुद्ध मानी जाती है. तीसरे दिन यानी अर्ध्य के दिन भी जो फल, पकवान ठेकुआ, कसार का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें भी नयी फसलों का प्रयोग किया जाता है. इन नयी फसलों में गेहूं, ईंख, गुड़, अदरख, नारियल, सिंघारा, हल्दी, सुथनी, केला इत्यादि शामिल हैं.छठ के नियम और प्रसाद की नयी फसलों से कफ और पित्त दोष का होता है शमन
पुपरी. आयुर्वेद के अनुसार, छठ पूजा में व्रतियों के लिये जो नियम बनाये गये हैं या इसमें प्रसाद के रूप में जिन फसलों का उपयोग किया जाता है, उससे मानव शरीर में कफ व पित्त दोषों का शमन होता है. ऋतु परिवर्तन के इस काल में उपवास का भी व्यापक महत्व है. धीरे-धीरे प्रक्रिया शुरू कर उपवास करने से शारिरिक दोषों का शमन होता है. शरद ऋतु के प्रारंभ के कारण इस समय मानव में त्रिदोष ( कफ, पित्त व वायु) उत्पन्न होता है, लेकिन उपवास व जल में खड़े होकर अर्घ्य देने से इन दोषों का शमन भी हो जाता है.
— डायबिटीज, हार्ट व किडनी के रोगियों के लिये उपवास बेहद खतरनाकफिजिशियन डॉ मृत्युंजय कुमार, डॉ श्रीपति झा व डॉ ओमप्रकाश ने बताया कि मेडिकल साइंस में उपवास को अच्छा नहीं माना जाता है. हालांकि उपवास से पेट के विकार में राहत जरूर मिलती है, लेकिन यदि कोई डायबिटीज, हार्ट या किडनी के रोगी हैं, तो उसे व्रत से पहले सौ बार सोचना चाहिये. किडनी या हार्ट के मरीज उपवास नहीं करें. यदि कोई डायबिटिक है, तो उपवास से पहले उसे डॉक्टर से मिलकर अपने दवा की खुराक तय करा लेनी चाहिये. उपवास के दिन बिना डॉक्टर की सलाह के तो दवा छोड़े और न कोई दवा वगैर सलाह खायें. मरीज व्रती को इस समय अपने साथ ग्लूकोमीटर जरूर रखना चाहिये, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत इलाज हो सके. इंसुलिन लेने वाले मरीज खरना के दिन सुबह में इसे छोड़ सकते हैं, लेकिन शाम में लेना जरूरी होगा. ब्लड प्रेशर की दवा के साथ भी यही बात लागू होती है. कुल मिलाकर मरीजों को 36 घंटे के उपवास से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लेनी चाहिये.
सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल है छठ पूजा पुपरी. छठ पूजा केवल यहां की संस्कृति ही नहींं, बल्कि संस्कार बन गया है. विभिन्न सम्मानों से सम्मानित सेवानिवृत्त प्रो डॉ अमरेंद्र प्रकाश चौबे ने बताया कि बिहारियत का गर्व बन चुके इस पर्व की पहुंच अब दुनिया भर में है. किसानों, मजदूरों, खेतिहरों से लेकर जन-जन के लिए पारिवारिक मिलन व उत्साह का यह अहम अवसर बन गया है. होली-दिवाली में भले ही पूरा परिवार इकट्ठा न हो, पर छठ में दूर-दराज से भी परिजन यात्रा के तमाम कष्टों को झेलकर आ जाते हैं. कहा कि इस व्रत में न किसी पुजारी की आवश्यकता, न किसी मंत्र की जरूरत होती है. पूजा करना जितना ही आसान है, अनुष्ठान की पवित्रता कायम रखना उतना ही कठिन है. पर्व का उल्लास ऐसा कि हर घर, हर सड़क, हर दिशा छठी मैया, भगवान भास्कर की आराधना में मग्न रहते हैं. छठ पूजा सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल पेश करता है. जाति व वर्ग की खाई भी इसमें मिट जाती है. सभी परवैती एक समान श्रद्धेय होते हैं. छठ घाटों पर सबके लिए व्यवस्था भी समान रहती है. आपसी सौहार्द का यह सर्वोत्तम उदाहरण है. सूप, सुपली, टोकरी, दउरा आदि महादलित भाई-बहनों द्वारा तैयार किए जाते हैं. कृषि उत्पादों से तैयार भोग सामग्री इस पर्व को और विशिष्ट बनाता है. मूल रूप से इस पर्व में बच्चों के आरोग्य की कामना की जाती है.— सप्तमी तिथि को सूर्य की वार्षिक पूजा का है विधान
पंडित शक्तिनाथ झा, पं अंबिका दत्त झा व पं रामकृष्ण झा के मुताबिक, इस पर्व की शास्त्रीय मान्यता इतर है. यह तीन पर्वों का मिश्रण है. कार्तिक शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को सूर्य की वार्षिक पूजा का विधान है. इसी तिथि को अंधकासुर के वध के लिए देवताओं के सेनापति के रूप में कार्तिकेय का राजतिलक किया गया था. षष्ठी तिथि को स्कंद अर्थात कार्तिकेय का जन्म हुआ था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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