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बागमती में पांच डूबे, दो चचेरे भाइयों की मौत, एक भाई लापता

Updated at : 25 Oct 2025 7:35 PM (IST)
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बागमती में पांच डूबे, दो चचेरे भाइयों की मौत, एक भाई लापता

बागमती नदी के अख्ता घाट पर शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. स्नान के क्रम में पांच युवक व किशोर डूब गये.

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सुप्पी(सीतामढ़ी). बागमती नदी के अख्ता घाट पर शनिवार को बड़ा हादसा हो गया. स्नान के क्रम में पांच युवक व किशोर डूब गये. इसमें दो चचेरे भाइयों की मौत हो गयी. एक अन्य किशोर लापता है. दो युवकों को मछुआरों के सहयोग से बचा लिया गया. मृतकों की पहचान अख्ता पूर्वी पंचायत के वाजपेयी टोला वार्ड नंबर 13 निवासी राजकिशोर उपाध्याय के पुत्र साहित्य उपाध्याय (17) एवं हरिकिशोर उपाध्याय के पुत्र मुन्ना कुमार उर्फ पीयूष उपाध्याय (16) के रूप में की गयी है. राजकिशोर उपाध्याय का दूसरा पुत्र धनंजय उपाध्याय (15) लापता बताया जा रहा है. सूचना पर सुप्पी थाने की पुलिस पहुंंची. इसके बाद पूर्व विधायक अमित कुमार टुन्ना, भाजपा नेता विश्वजीत पाठक, रश्मि झा, मुखिया गणेश पंडित, मुखिया प्रतिनिधि शशांक माधव झा, सरपंच प्रतिनिधि इमरान बबलू घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मिलकर खोजी अभियान का जायजा लिया. लापता किशोर की तलाश को लेकर एसडीआरएफ की टीम को लगाया गया है. वहां घटना हुई है, उसका थाना व अंचल क्षेत्र बैरगनिया पड़ता है. बैरगनिया थाने की पुलिस दोनों शवों को पोस्टमार्टम हेतु सदर अस्पताल भेज दिया है.

जानकारी के अनुसार, अख्ता पूर्वी वाजपेयी टोला के पांच युवक छठ घाट का निर्माण करने अख्ता घाट गये थे. घाट बनाने के बाद सभी स्नान करने लगे. इसी दरम्यान एक युवक गहरे पानी में डूबने लगा. उसे बचाने के चक्कर में अन्य युवक व किशोर डूबने लगे. इसमें मछुआरों के सहयोग से संतोष उपाध्याय (22) एवं सोनू उपाध्याय (15) को बचा लिया गया. साहित्य को इलाज के लिए ससौला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, वहां चिकित्सकों ने सदर अस्पताल रेफर कर दिया. सदर अस्पताल पहुंचने पर जांच के बाद चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया. बाद में साहित्य के चचेरे भाई मुन्ना का शव भी बरामद कर लिया गया. धनंजय की तलाश की जा रही है. हादसे को लेकर पूरा गांव गमगीन है. परिजन चीत्कार कर रहे हैं.

पुत्र की मौत से राजकिशोर बदहवास

पुत्र साहित्य उपाध्याय की मौत व दूसरे पुत्र धनंजय के लापता होने से राजकिशोर उपाध्याय पूरी तरह से बदहवास हो गये हैं. वह अख्ता घाट पर बदहवासी अवस्था में बैठे हैं. न कुछ बोल रहे हैं, न ही आंखों से आंसू निकल रहे हैं. वह टकटकी नजर से मौजूद लोगों को निहार रहे हैं. समझ नहीं आ रहा कि आखिर यह क्या हो गया?

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VINAY PANDEY

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By VINAY PANDEY

VINAY PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.

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