व्यक्ति के लिए धर्म और कर्म दोनों जरूरी : सत्यम शास्त्री

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व्यक्ति के लिए धर्म और कर्म दोनों जरूरी : सत्यम शास्त्री

प्रखंड के श्रीखंडी भिट्ठा पूर्वी वार्ड संख्या 12 में हनुमान मंदिर के प्रांगण में ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार की शाम सौहार्दपूर्ण वातावरण में समापन हो गया.

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सुरसंड. प्रखंड के श्रीखंडी भिट्ठा पूर्वी वार्ड संख्या 12 में हनुमान मंदिर के प्रांगण में ग्रामवासियों के सहयोग से आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार की शाम सौहार्दपूर्ण वातावरण में समापन हो गया. भागवत कथा के अंतिम दिन कृष्ण की लीलाओं, कंस के अत्याचार से मुक्ति व सुदामा कृष्ण की मित्रता का विस्तार पूर्वक वर्णन किया. समापन के दिन श्रोताओं का उत्साह, भक्तों का आस्था व कथा सुनने की इच्छा इतनी प्रबल थी कि उन्होंने कथा वाचक सत्यम शास्त्री जी महाराज से कथा को आगे बढ़ाने की गुजारिश की, जिसे संयोजक प्रमोद दास जी महाराज के द्वारा स्वीकार कर लिया गया. भक्तों के आग्रह पर श्रीमद्भागवत कथा की अवधि तीन दिनों के लिए बढ़ा दी गयी. इस मौके पर ग्रामीणों ने भागवताचार्य सत्यम शास्त्री जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया. भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शास्त्री जी महाराज ने कहा कि धर्म और कर्म दोनों जरूरी है. धर्म और कर्म दोनों एक दूसरे के पूरक हैं. धर्म सिखाता है कि कर्म करो और कर्म सिखाता है कि धर्म की रक्षा करो.

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