सालों से सदर अस्पताल में पड़े हैं 500 से अधिक बेसरा

Published at :03 Apr 2017 6:22 AM (IST)
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सालों से सदर अस्पताल में पड़े हैं 500 से अधिक बेसरा

क्या है बेसरा जांच आम तौर पर शव के पोस्टमार्टम में मौत की वजहों का खुलासा नहीं होने पर बेसरा जांच का सहारा लिया जाता है. दो स्थितियों में बेसरा जांच कराया जाता है. पहला जहर खाने की स्थिति व दूसरा मौत की वजहों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक खुद […]

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क्या है बेसरा जांच

आम तौर पर शव के पोस्टमार्टम में मौत की वजहों का खुलासा नहीं होने पर बेसरा जांच का सहारा लिया जाता है. दो स्थितियों में बेसरा जांच कराया जाता है. पहला जहर खाने की स्थिति व दूसरा मौत की वजहों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक खुद इसकी अनुशंसा करते है. मृतक के हृदय, फेफरा, आमाश्य, पेट, स्पलीन व कीडनी के अवशेष को निकालते है. जिसे अस्पताल प्रशासन द्वारा एक डिब्बा में रखा जाता है. वहीं पुलिस इसे लेकर जांच के लिये फॉरेंसिक लैब मुजफ्फरपुर भेजती है. जहां जांच में मौत की वजहों का खुलासा होता है. यहीं बेसरा जांच कहलाता है.
बेसरा की जांच नहीं
सीतामढ़ी सदर अस्पताल में 500 से अधिक बेसरा पड़े हैं. जिनकी अब तक जांच नहीं हो सकी है. अभी हाल में कोर्ट के आदेश पर नगर थाने की पुलिस ने साल 2002 के मामले की बेसरा को जांच के लिये एफएसएल को भेजा है. वह भी तब जब कोर्ट ने नकेल कसी. जो जाहिर करता है कि बेसरा रिपोर्ट के प्रति पुलिस बेपरवाह है. आंकड़ों पर गौर करे तो पिछले तीन साल से सदर अस्पताल में 70 बेसरा पड़ा हुआ है. इनमें साल 2015 के 21, 2016 के 16 व इस साल के तीन महीनों के भीतर के चार बेसरा अस्पताल में पड़े है.
जबकी किसी को भी इनकी चिंता नहीं है.
सदर अस्पताल में बेसरा को सुरक्षित रखा जाता है. इसकी जांच की जिम्मेदारी पुलिस की होती है. पुलिस को जब जरूरत पड़ती है वह अस्पताल से बेसरा लेकर एफएसएल जाती है. वैसे सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में भेसरा पड़े है.
डॉ बिंदेश्वर शर्मा, सीएस
बेसरा जांच की प्रक्रिया में पेचीदगी है. मामलों की सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश पर पुलिस अस्पताल से बेसरा लेकर जांच के लिये ले जाती है. बताते है कि बेसरा देने में अस्पताल कर्मी बेपरवाही दिखाते हैं
सीतामढ़ी : बेसरा अस्पताल में, कोर्ट व थानों में धूल फांक रहे मामले. लिहाजा नहीं सामने आ रहा मौत की वजहों की सच्चाई और नहीं मिल रहा लोगों को इंसाफ. पुलिस व अस्पताल प्रशासन के लापरवाही के चलते सदर अस्पताल में सालों से 500 से अधिक बेसरा पड़े है. अस्पताल प्रशासन की माने तो पुलिस को जब जरूरत पड़ी है वह जांच के लिये बेसरा ले जाती है और पुलिस की माने तो अस्पताल प्रशासन द्वारा सहीं तरीके से ससमय भेसरा नहीं दिये जाने के चलते तमाम जांच लंबित है. लेकिन सच्चाई यहीं है कि पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम के लिये शव अस्पताल में भेजा जाता है.
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