रीगा में मिला 11 सौ साल पुराना पालकालीन मंदिर का अवशेष

Published at :01 Apr 2017 8:33 AM (IST)
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रीगा में मिला 11 सौ साल पुराना पालकालीन मंदिर का अवशेष

प्रखंड कार्यालय से सटे उत्तर रीगा द्वितीय पंचायत के योगवाना गांव में 11 सौ साल पुराने पालकालीन मंदिर के अवशेष मिले हैं. ग्रामीण विनोद पासवान द्वारा शौचालय निर्माण के लिए गड्ढे की खुदाई के दौरान काले पत्थर से निर्मित मेहराब, मूर्ति, स्तंभ व महल के खंभों के अवशेष मिले. बीडीओ अशोक कुमार ने पहुंच कर […]

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प्रखंड कार्यालय से सटे उत्तर रीगा द्वितीय पंचायत के योगवाना गांव में 11 सौ साल पुराने पालकालीन मंदिर के अवशेष मिले हैं. ग्रामीण विनोद पासवान द्वारा शौचालय निर्माण के लिए गड्ढे की खुदाई के दौरान काले पत्थर से निर्मित मेहराब, मूर्ति, स्तंभ व महल के खंभों के अवशेष मिले. बीडीओ अशोक कुमार ने पहुंच कर जायजा लिया तथा खुदाई पर रोक लगा दिया.

उन्होंने बताया की यह इलाका रामायण काल से जुड़ा है. कुछ ही दूरी पर शृंगी ऋषि के आश्रम थे. ऐसे में प्राचीन पत्थरों से निर्मित भवन का अवशेष मिलना महत्वपूर्ण है. इधर, पुरातत्व के जानकार सह पर्यावरणविद प्रो राम शरण अग्रवाल ने बताया कि काले पत्थर के अलग-अलग खंभे मिले हैं, जिस पर देवी-देवताओं की आकृति है, जो यह साबित करता है कि यहां पालकालीन महल या मंदिर था, जो जमीन में दब गया था. ऐसे में इस पूरे क्षेत्र की खुदाई की आवश्यकता है. उन्होंने बताया कि यह पुरातत्व से जुड़े विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए शोध का भी विषय है.

उन्होंने बताया की कुछ माह पूर्व मेहसिया में सड़क निर्माण के दौरान खुदाई में भी कुछ मूर्तियां मिली थी. जो इस तथ्य को मजबूत करती है कि इलाके में कोई बड़ा भवन या मंदिर दबी है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो काले पत्थर के अवशेष मिले है, उसी तरह के पत्थर से गिरमिसानी स्थित हलेश्वर स्थान मंदिर बना है. बताया कि योगबाना में मिला अवशेष एक बड़ा ऐतिहासिक प्रमाण है.

इतना ही नहीं जिले में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अति प्राचीन महल या मंदिर का अवशेष मिला है. बताते चले की विनोद पासवान योगवाना टोला में शौचालय निर्माण के लिये शुक्रवार को गड्ढ़े की खुदाई कर रहा था. इस दौरान काले पत्थर का अवशेष मिला. बाद में लोगों ने उक्त पत्थर के टुकड़ों को निकाला तो उसमें पौराणिक काल की मूर्तियों की आकृति दिखी. विनोद पासवान ने बताया की महज 2 फीट गड्ढा खोदने के बाद ही उक्त मूर्तियां व स्तंभ मिले. इस दौरान कुल सात काले पत्थर के अवशेष मिले. बताते चले की पूर्व में यह जमीन रीगा दरबार की थी. बाद में गांव के कुछ मजदूरों ने उक्त जमीन पर कब्जा कर लिया था. इसी जमीन पर विनोद पासवान घर बना कर रहता है.

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