कैश बिना, सब कुछ सूना

Published at :17 Nov 2016 6:13 AM (IST)
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नोटबंदी. कैशलेस हुए अधिकांश बैंक, नहीं हो पा रहा एक्सचेंज, बढ़ी परेशानी सीतामढ़ी : हजार-पांच सौ के पुराने करेंसी पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद बैंक व डाकघरों द्वारा की गई करेंसी एक्सचेंज की व्यवस्था अब दम तोड़ने लगी है. बुधवार को अधिकांश बैंक कैशलेस हो गए. लिहाजा करेंसी एक्सचेंज का काम पूरी तरह ठप […]

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नोटबंदी. कैशलेस हुए अधिकांश बैंक, नहीं हो पा रहा एक्सचेंज, बढ़ी परेशानी

सीतामढ़ी : हजार-पांच सौ के पुराने करेंसी पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद बैंक व डाकघरों द्वारा की गई करेंसी एक्सचेंज की व्यवस्था अब दम तोड़ने लगी है. बुधवार को अधिकांश बैंक कैशलेस हो गए. लिहाजा करेंसी एक्सचेंज का काम पूरी तरह ठप रहा. एक्सचेंज के बदले बैंकों ने ग्राहकों से बैंक खाता में ही पुराने नोट जमा कराए. इसके चलते पूरे दिन लोगों में आपाधापी रहीं. शहर व मुख्यालय डुमरा में इक्के – दुक्के एटीएम ही खुले रहे. जहां रुपये की निकासी को लंबी कतारें लगी रहीं.
वहीं बाजारों में वीरानगी रहीं, जबकि व्यवसाय पूरी तरह चौपट नजर आया. उधर, बैंकों में जमा के नाम पर केवल हजार – पांच सौ के करेंसी आने व अन्य करेंसी के बैंक में जमा नहीं होने को लेकर जिले के तमाम बैंक हैरान है. बैंकों को यह पता नहीं चल रहा है कि बैंक से जारी कैश कहां गए? जबकी नोट एक्सचेंज करने के लिए दलालों की टीम सक्रिय है, जो बीस से चालीस फीसद कमीशन पर काला धन को सफेद धन बनाने में लगा है. दलालों द्वारा नोट एक्सचेंज के लिए विभिन्न बैंकों में बड़ी संख्या में मजदूर लगाए गए है.
कैशलेस हुए अधिकांश बैंक. सीतामढ़ी शहर समेत मुख्यालय डुमरा के अधिकांश बैंक कैशलेस हो गए है. बुधवार को शहर स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा को छोड. दे तो मुख्यालय डुमरा व शहर के तमाम बैंकों में करेंसी एक्सचेंज का काम ठप रहा. केवल इलाहाबाद बैंक ने ही लोगों के करेंसी बदले. कैश के अभाव में अन्य बैंकों ने करेंसी एक्सचेंज के लिए पहुंचे लोगों की रकम बैंक खाते में ही जमा कराई. उधर, डुमरा – सीतामढ़ी में गिनती के एटीएम खुले रहे. जहां लोगों की लंबी कतारें लगी रहीं.
कतार लंबी होने की वजह से ज्यादातर लोग बगैर रुपये के निकासी के ही लौटने को विवश दिखे. मुख्यालय डुमरा स्थित एसबीआई मुख्य शाखा समेत पूरे जिले की एसबीआई शाखा में कैश की कमी रहीं. लिहाजा एक्सचेंज व रुपयों की निकासी नहीं हो सकी. शहर के बैंक आफ बड़ौदा शाखा द्वारा बाकायदा नोटिस टांग कर कैश के अभाव में एक्सचेंज व निकासी नहीं होने की सूचना दी गई. केनरा बैंक, बैंक आफ इंडिया, पीएनबी व सेंट्रल बैंक समेत अधिकांश बैंकों में करेंसी का एक्सचेंज नहीं करने से आम जनता में मायूसी दिखी.
प्रधान डाकघर में बैंकिंग कार्य ठप. मुख्यालय डुमरा स्थित प्रधान डाकघर का खजाना खाली हो गया है. कैश के अभाव में मंगलवार की दोपहर से ही यहां करेंसी एक्सचेंज का काम व रुपयों की निकासी बंद है. बुधवार को भी यहां बैंकिंग कार्य ठप रहा. मंगलवार को प्रधान डाकघर डुमरा में जितने भी कैश उपलब्ध रहे, ग्राहकों व आम जनता के करेंसी का एक्सचेंज किया गया. साथ ही ग्राहकों को निकासी का लाभ दिया गया. लेकिन दोपहर बाद कैश समाप्त हो गया. एसबीआई द्वारा डाकघर को कैश उपलब्ध नहीं कराए जाने के चलते मंगलवार को दोपहर बाद यहां निकासी व एक्सचेंज बंद हो गया. बुधवार को भी एसबीआई ने कैश उपलब्ध नहीं कराया. इसके चलते बुधवार को पूरे दिन करेंसी एक्सचेंज व निकासी का काम ठप रहा. जबकी पूरे दिन लोगों की भीड़ डाकघर परिसर में जमी रहीं.
एक्सचेंज के बदले हुए डिपोजिट. कैश के अभाव में बुधवार को अधिकांश बैंकों ने करेंसी एक्सचेंज नहीं किया. बैंकों द्वारा अपने शाखा के ग्राहकों के पुराने करेंसी उनके खाते में जमा कराए गए. इसके चलते दूसरे बैंक के खाताधारकों व जिनके किसी भी बैंक में खाता नहीं है, को भारी परेशानी उठानी पड़ी. लिहाजा लोग विभिन्न बैंक शाखाओं में भटकते नजर आए.
दलालों का रैकेट सक्रिय. बैंकों द्वारा नोटबंदी के बाद पुराने करेंसी को बदलने के लिए की गई व्यवस्था के बाद पूंजीपतियों में हड.कंप है. इनकम टैक्स से बचने व काला धन को सफेद बनाने के लिए पूंजीपति तबके के लोग बैंक को मैनेज करने से लेकर हर एक तरह का हथकंडा अपना रहे है. इसमें उनकी मदद को दलालों का रैकेट सक्रिय हो गया है, जो बीस से चालीस फीसदी कमीशन पर लोगों का नोट बदलने में लगे है. दलालों द्वारा इस काम के लिए बड़ी संख्या में महिला व पुरूष मजदूरों को लगाया गया है. नेपाली नागरिक भी इन्हीं दलालों की मदद से अपनी हजार -पांच सौ के भारतीय करेंसी बदलवा रहे है.
सेवा को आगे आया स्कूल. जिले में रुपये बदलने के लिए रोजाना बैंकों में लंबी लाइन लग रहीं है. लोग दिन भर भूखे-प्यासे लाइन में लग कर करेंसी बदलवा रहे है. लोगों की परेशानी को देखते हुए शहर लक्ष्मीनगर बसवरिया स्थित भागेश्वरी वैद्यनाथ सरस्वती विद्या मंदिर के स्कूली छात्र- छात्राओं व शिक्षकों ने कतारबद्ध लोगों के बीच चाय –
पानी बांट, नजीर पेश किया. स्कूल के प्रबंध कार्यकारिणी समिति के अनिल कुमार, मुकेश बैठा, नेवा लाल सिंह, प्रतिभा देव, प्राचार्य नागेंद्र कुमार तिवारी, रतन यादव व राजेश महतो के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने एसबीआई बाजार शाखा पहुंच कर कतार में लगे लोगों को स्कूल की ओर से चाय – पानी पिलाया.
नोट एक्सचेंज कराने के लिए बिचौलिये भी सक्रिय, एक-दो एटीएम ही खुले रहे
इलाहाबाद बैंक में करेंसी एक्सचेंज के लिए उमड़ी भीड़.
बोले बैंक अधिकारी. एसबीआई मुख्य शाखा के एसके राव ने बताया कि मंगलवार को कैश समाप्त हो गया था, आरबीआई द्वारा बुधवार को कैश भेजा गया है. कैश को बैंक के विभिन्न शाखा समेत डाकघरों को भेजने की प्रक्रिया जारी है. इलाहाबाद बैंक सीतामढ़ी के मुख्य प्रबंधक रवींद्र कुमार ने बताया कि हम एक्सचेंज कर रहे है,
लेकिन अन्य बैंकों द्वारा करेंसी एक्सचेंज नहीं करने के चलते बुधवार को लोड बढ़ गया. इसके चलते काफी परेशानी उठानी पड़ी. आइसीआइसीआइ के प्रबंधक गौतम कुमार ने बताया कि उपलब्ध कैश के अनुसार एक्सचेंज किया जा रहा है. एसबीआइ बाजार ब्रांच के शाखा प्रबंधक अजीत कुमार झा ने बताया कि कैश के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ा है. अब तक तीन करोड़ की रकम एक्सचेंज की गई है.
कहां जा रहा कैश, सकते में बैंक. जिले में सात दिनों से करेंसी एक्सचेंज का काम जारी है
. इसके तहत गांव से लेकर शहर तक विभिन्न बैंक शाखाओं द्वारा हजार – पांच सौ के पुराने करेंसी बदल कर लोगों को दस, बीस, पचास व सौ के पुराने नोट के अलावा दो हजार के नए नोट दे रहीं है. पिछले सात दिनों में बैंकों द्वारा 15 अरब से अधिक रुपये एक्सचेंज किए जा चूके है. लेकिन जमा के नाम पर बैंकों में केवल हजार – पांच सौ के करेंसी ही आ रहे है. बैंक सकते में है, उन्हें खुद यह पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर कैश कहां जा रहा है? माना जा रहा है कि लोग करेंसी बदल जमाबंदी में लगे है.
सामने आ रहे चौंकानेवाले तथ्य. नोटबंदी के बाद उत्पन्न जारी करेंसी एक्सचेंज व रकम जमा कराने के दौरान बैंकों में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए है. लोग बड़ी संख्या में अपनी रकम खातों में जमा करा रहे है. इनकम टैक्स से बचने के लिए लोग तरह – तरह के हथकंडे अपना रहे है. पैन नंबर देने के बजाए लोग 49 हजार 500 रुपये के करेंसी बैंक में जमा कर रहे है तो भारी मात्रा में बैंकों में वैसे खाते में रकम जमा कराए जा रहे है, जिनमें सालों से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है.
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