सर्जन की व्यवस्था बनी चुनौती

Published at :28 Sep 2016 4:38 AM (IST)
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सर्जन की व्यवस्था बनी चुनौती

परेशानी. सर्जन विहीन हो गया स्वास्थ्य विभाग, मरीजों को हो रही परेशानी सर्जन डॉक्टर के नहीं होने से मरीजों के संग उनके परिजनों की जान सांसत में आ गयी है़ अब उन्हें सर्जरी कराने के लिए अन्य जगहों का रुख करना होगा़ इसमें वक्त के साथ ही उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा़ परेशानी […]

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परेशानी. सर्जन विहीन हो गया स्वास्थ्य विभाग, मरीजों को हो रही परेशानी

सर्जन डॉक्टर के नहीं होने से मरीजों के संग उनके परिजनों की जान सांसत में आ गयी है़ अब उन्हें सर्जरी कराने के लिए अन्य जगहों का रुख करना होगा़ इसमें वक्त के साथ ही उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ेगा़
परेशानी – एक
सीतामढ़ी : सदर अस्पताल व 17 पीएचसी के चिकित्सकों में एक मात्र चिकित्सक डा पीपी लोहिया सर्जन के रूप में बचे हुये थे. अब वे भी वीआरएस ले लिये. अब जिला स्वास्थ्य विभाग सर्जन चिकित्सक विहीन हो गया.
डाॅ लोहिया के आवेदन पर स्वास्थ्य विभाग के सरकार के अवर सचिव रवींद्र यादव ने स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति की स्वीकृति दे दी है. अब वह दिन दूर नहीं जब सदर अस्पताल के उपाधीक्षक के पद से मुक्त होने के साथ हीं डा लोहिया सरकारी चिकित्सा सेवा से भी मुक्त हो जायेंगे. वीआरएस की स्वीकृति 22 सितंबर को दी गयी और उसी दिन वे छुट्टी पर चले गये.
जिले में मात्र 66 डाॅक्टर
एक तो सरकारी सेवा में चिकित्सक आना नहीं चाहते हैं और वीआरएस लेने वालों की संख्या बढ़ने से जिले में चिकित्सकों की संख्या काफी कम हो गयी है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चिकित्सक के 266 पद स्वीकृत है, जिसमें वर्तमान में 66 चिकित्सक हैं. इनमें से 15 चिकित्सक आगे की पढ़ाई करने को लेकर छुट्टी पर है. वहीं, 12 चिकित्सक बगैर किसी सूचना के पीएचसी से नदारद है. सदर अस्पताल में 11 चिकित्सक हैं, जिसमें चार महिला व सात पुरूष शामिल हैं.
12 डॉक्टरों ने लिया था वीआरएस
डाॅ लोहिया कोई पहले चिकित्सक नहीं हैं जो वीआरएस लिये हैं. इनसे पूर्व वर्ष 2014 में पांच एवं वर्ष 2015 व 16 में पांच चिकित्सक वीआरएस ले लिये थे. इसके पीछे के कारणों की सटिक जानकारी तो नहीं मिल सकी है, पर जानकारों का कहना है कि सभी के साथ अलग-अलग कारण है. अधिकांश कारण कुछ मिलता-जुलता है. सरकारी चिकित्सक के रूप में होने वाली परेशानियों से आजिज आकर भी चिकित्सक नौकरी छोड़ रहे हैं. एक कारण और बताया जा रहा है कि संसाधनों के अभाव में समुचित चिकित्सा उपलब्ध नहीं करा पाने के चलते मरीजों के परिजनों की खरी-खोटी चिकित्सकों को हीं सुननी पड़ती है.
कई वीआरएस रहे चर्चित
वर्ष 2005 में यहां के तत्कालीन सिविल सर्जन अखिलेश चरण सिन्हा वीआरएस लिये थे. वीआरएस लेने वाले सूबे के वे पहला सिविल सर्जन थे. उस दौरान उनके वीआरएस का मामला काफी चर्चित हुआ था. वर्ष 2015 एवं 16 में नेत्र चिकित्सक डा शिवशंकर प्रसाद, हड्डी के डा आलोक कुमार सिंह, एमबीबीएस डा शंभू पांडेय व डा शंभू प्रसाद के साथ हीं अब डा पीपी लोहिया वीआरएस लिये हैं. वर्ष 2014 में डा मार्कंडेय राय, डा आरके मंडल, डा अमरनाथ झा, डा कबीर कुमार चौधरी व डा अभय शंकर दास वीआरएस लिये थे.
एकमात्र सर्जन ने भी ले लिये वीआरएस
जिले में अब डॉक्टर के हो गये 200 पद रिक्त
सीएस बोले : सीएस डा बिंदेश्वर शर्मा ने बताया कि डा पीपी लोहिया वीआरएस ले लिये हैं. वे सर्जन थे. पता चला है कि मेजरगंज पीएचसी में डा संजय शाही सर्जन हैं. उन्हें सदर अस्पताल में लाया जायेगा.
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