सेविका बहाली में गड़बड़ी का मामला डीएम के पास पहुंचा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Sep 2016 3:29 AM (IST)
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चयन पंजी पर अध्यक्ष सह वार्ड सदस्य का हस्ताक्षर नहीं सेविका के दरवाजे पर चलता है आंगनबाड़ी केंद्र मेजरगंज : प्रखंड के लालदासी गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 71 पर सेविका की बहाली में कथित मनमानी का मामला अब डीएम के कोर्ट में पहुंच गया है. चयन से वंचित मंजू कुमारी डीएम के शरण में […]
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चयन पंजी पर अध्यक्ष सह वार्ड सदस्य का हस्ताक्षर नहीं
सेविका के दरवाजे पर चलता है आंगनबाड़ी केंद्र
मेजरगंज : प्रखंड के लालदासी गांव के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 71 पर सेविका की बहाली में कथित मनमानी का मामला अब डीएम के कोर्ट में पहुंच गया है. चयन से वंचित मंजू कुमारी डीएम के शरण में गयी है.
कोर्ट में दायर मुकदमे के अनुसार तत्कालीन सीडीपीओ सह बीडीओ अखिलेश कुमार द्वारा मेधा अंक बढ़ा कर प्रियंका कुमारी का चयन कर लिया गया था. चयन को 21 दिसंबर 14 को केंद्र पर आमसभा बुलायी गयी थी. मौके पर अध्यक्ष के रूप में वार्ड सदस्य भोला राम भी मौजूद थे. श्री राम का कहना है कि सीडीपीओ द्वारा प्रियंका कुमारी के नाम के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने को कहा गया, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके चलते दोनों में विवाद हो गया और चयन की कार्रवाई स्थगित कर दी गयी थी. आरोप है कि बाद में हेराफेरी कर प्रियंका का चयन कर लिया गया.
बता दें कि आंगनबाड़ी केंद्र प्रियंका का आवासीय परिसर है. केंद्र पर पूर्व से मंजू कुमारी सहायिका थी. चयन की कार्रवाई शुरू होने पर प्रियंका के परिजनों ने मंजू का केंद्र पर आना-जाना बंद कर दिया. वहीं, सीडीपीओ द्वारा केंद्र से अनुपस्थित रहने पर मंजू को सहायिका पद से मुक्त करने की चेतावनी दी जाने लगी. इस बीच उसे धमकी दी गयी कि प्रियंका को सेविका नहीं मानने पर उसे पद मुक्त कर दिया जायेगा.
सेविका की दलील : सेविका प्रियंका कुमारी ने बताया कि उसका मेधा अंक 69 फीसदी है, जबकि मंजू का 68 फीसदी. बहाली न्यायसंगत है. इधर, मंजू ने प्रियंका के स्नातक के प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दे चुकी है. उसकी शिकायत पर विश्वविद्यालय से अब तक सत्यापन रिपोर्ट नहीं आया है. मंजू ने आइसीडीएस के डीपीओ के कोर्ट में भी मामला दायर कर चुकी है. वहां मामला निरस्त कर दिये जाने पर डीएम के यहां अपील में गयी है. वार्ड सदस्य का कहना है कि आमसभा का वीडियो फुटेज सीडीपीओ द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि यह आवश्यक था. इधर, इस बाबत वर्तमान सीडीपीओ सुषमा कुमारी ने यह कह कर मामले से पल्ला झाड़ लिया कि उक्त केस उनके कार्यकाल के पूर्व का है.
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