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Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Sep 2016 5:14 AM (IST)
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बकरीद आज, तैयारियां पूरी त्योहार. भाईचारे से मनेगा कुर्बानी का पर्व मुजफ्फरपुर : इद-उल-अजहा बकरीद मंगलवार को धूमधाम से मनायी जायेगी. इसको लेकर सोमवार को लोगों ने जम कर खरीदारी की. शहर के कंपनीबाग, सतपुरा, मेहदी हसन चौक, पक्की सराय चौक पर खस्सी की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर जगह मोल-जोल […]
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बकरीद आज, तैयारियां पूरी
त्योहार. भाईचारे से मनेगा कुर्बानी का पर्व
मुजफ्फरपुर : इद-उल-अजहा बकरीद मंगलवार को धूमधाम से मनायी जायेगी. इसको लेकर सोमवार को लोगों ने जम कर खरीदारी की. शहर के कंपनीबाग, सतपुरा, मेहदी हसन चौक, पक्की सराय चौक पर खस्सी की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. हर जगह मोल-जोल चलता रहा. सुबह से लेकर देर रात तक खरीदारी का दौर चला. इन जगहों पर दस हजार से लेकर एक लाख तक की खस्सी उपलब्ध थी. खरीदारी का अंतिम दिन होने के कारण कुर्बानी करने वाले लोगों की भीड़ जुटी रही. खरीदारी के कारण कंपनीबाग सुबह से लेकर शाम तक जाम रहा. जामा मसजिद के पास लगे खस्सी के मेले व खरीदारों के उमड़ने के कारण दोनों तरफ से रोड जाम हो गया. हालांकि ऐसे ही माहौल में लोगों ने खरीदारी की.
सच्चाई की राह में सब कुछ कुर्बान करना बकरीद: मौलाना शमशुल कहते हैं कि मुसलिम समुदाय में बकरीद का महत्व अलग है. इसे बड़ी ईद भी कहा जाता है. हज की समाप्ति पर इसे मनाया जाता है. इस्लाम के पांच फर्ज माने गए हैं, हज उनमें से आखिरी फर्ज माना जाता है. मुसलमानों के लिए जिंदगी में एक बार हज करना जरूरी है. हज होने की खुशी में ईद-उल-जुहा का त्योहार मनाया जाता है. यह बलिदान का त्योहार भी है. इस्लाम में बलिदान का बहुत अधिक महत्व है. कहा गया है कि अपनी सबसे प्यारी चीज रब की राह में खर्च करो. रब की राह में खर्च करने का अर्थ नेकी व भलाई के कामों में.
कुर्बानी का अर्थ है कि रक्षा के लिए सदा तत्पर रहना. हजरत मोहम्मद साहब का आदेश है कि कोई व्यक्ति जिस भी परिवार, समाज, शहर या मुल्क में रहने वाला है, उस व्यक्ति का फर्ज है कि वह उस देश, समाज, परिवार की हिफाजत के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार रहे. ईद-उल-फितर की तरह ईद-उल-जुहा में भी गरीबों और मजलूमों का खास ख्याल रखा जाता है. इसी मकसद से ईद-दल-जुहा के सामान यानी कि कुर्बानी के सामान के तीन हिस्से किये जाते हैं.
एक हिस्सा खुद के लिए रखा जाता है, बाकी दो हिस्से समाज में जरूरतमंदों में बांटने के लिए होते हैं, जिसे तुरंत बांट दिया जाता है नियम कहता है कि पहले अपना कर्ज उतारें, फिर हज पर जाएं तब बकरीद मनाएं. इसका मतलब यह है कि इस्लाम व्यक्ति को अपने परिवार, अपने समाज के दायित्वों को पूरी तरह निभाने पर जोर देता है.
मुसलिम समाज में बकरे को पाला जाता है व अपनी हैसियत के अनुसार उसकी देखरेख की जाती है. जब वो बड़ा हो जाता है, उसे बकरीद के दिन अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया जाता हैं जिसे फर्ज-ए-कुर्बान कहा जाता है. बकरीद यह भी सिखाती है कि सच्चाई की राह में अपना सब कुछ कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. खुदा के लिए अपनी प्यारी से प्यारी चीज को कुर्बान करने में भी हिचक नहीं होनी चाहिए. इससे अल्लाहताला खुश होते हैं. त्याग बलिदान का नाम बकरीद है.
देर रात तक हुई खरीदारी
मसजिदों में तय समय पर होगी नमाज
मसजिदों में तय समय पर नमाज होगी. इसका ऐलान पहले ही कर दिया गया है. हांलाकि लोगों ने विभिन्न मसजिदों के मौलाना से इसकी जानकारी ली. बकरीद को लेकर घरों में भी सोमवार को जम कर तैयारी हुई. घर की सफाई के साथ त्योहार के लिए जरूरी सामान जुटाने में लोग लगे रहे. परदेश में रहने वाले लोग भी त्योहार मनाने अपने घर पहुंचे. हज करने गये लोगों ने भी अपने परिवार को फोन कर बकरीद की बधाई दी.
सेवइयों की दुकान पर लगी कतार
कंपनीबाग स्थित सेवइयों की दुकान पर लोगों की कतार लगी रही. सूखी सेवइयों की विभिन्न वेराइटी की खरीदारी के लिए सुबह से रात तक लोगों का जमावड़ा लगा रहा. इसके अलावा टाेपियां, कपड़े व अतर की भी खूब खरीदारी हुई. इसको लेकर शहर के कई इलाके देर रात तक रोशन रहे. कंपनीबाग में भी खरीदारी को देखते हुए देर रात तक दुकानें खुली रही. लोगों ने एक दूसरे को बकरीद की बधाई भी दी.
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