उमेश की जिद व सीआइडी जांच ने जगायी इंसाफ की आस मुनमुन हत्याकांड
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Sep 2016 4:47 AM (IST)
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सीतामढ़ी : मुनमुन हत्याकांड में नामजद अभियुक्तों को इंसाफ दिलाने की सामाजिक कार्यकर्ता उमेश की जिद, मानवाधिकार आयोग की सक्रियता व सीआइडी की ईमानदार जांच ने कथित अभियुक्तों के अंदर इंसाफ मिलने की आस जगा दी. उमेश को मुनमुन हत्याकांड से जुड़े कागजातों का अध्ययन करने के बाद विश्वास हो चुका था कि नरेश ठाकुर […]
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सीतामढ़ी : मुनमुन हत्याकांड में नामजद अभियुक्तों को इंसाफ दिलाने की सामाजिक कार्यकर्ता उमेश की जिद, मानवाधिकार आयोग की सक्रियता व सीआइडी की ईमानदार जांच ने कथित अभियुक्तों के अंदर इंसाफ मिलने की आस जगा दी.
उमेश को मुनमुन हत्याकांड से जुड़े कागजातों का अध्ययन करने के बाद विश्वास हो चुका था कि नरेश ठाकुर समेत कांड के अन्य नामजद अभियुक्त उस पाप की सजा काट रहा है, जो उसने किया ही नहीं है. उधर डीजीपी अभयानंद द्वारा स्थानीय एसपी को बार-बार केस की री-व्यू करने का आदेश दिया जाता रहा, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ रही थी.
यानी डीजीपी के आदेश का भी कोई असर नहीं दिख रहा था. डीजीपी ने आखिर उमेश से दुखी होकर कह दिया कि वे डीजीपी जरूर हैं, लेकिन उनकी नहीं चलती है. वे फाइल भिजवाने के लिए ही रह गये हैं. उनका भी फाइल भिजवा देंगे. डीजीपी के इस जवाब से उमेश एक बार फिर निराश हुए.
डीआइजी ने मांगी रिपोर्ट, तो कर दी गयी कार्रवाई: 20 नवंबर 2013 को उमेश ने एक बार फिर बिहार मानवाधिकार आयोग का दरबाजा खटखटाया और नरेश ठाकुर के परिवार के सदस्यों से आवेदन दिलवा कर इंसाफ की मांग की. आवेदन के आलोक में आयोग ने एक बार फिर तत्कालीन डीआइजी अमृत राज से एक माह के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी. उमेश दो दिसंबर 13 को मुख्यमंत्री के जनता दरबार पहुंचे.
उन्हें मौके पर मौजूद डीआइजी अमृत राज के पास भेजा गया. डीआइजी ने उमेश के सामने ही तत्कालीन एसपी पंकज सिन्हा को फोन कर फटकार लगाते हुए कांड को फिर से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा. करीब एक सप्ताह बाद डीआइजी की एसपी के साथ सीतामढ़ी में बैठक हुई. उमेश ने प्रभात खबर को बताया कि मीटिंग के बाद एसपी द्वारा कोर्ट से आदेश लेकर अभियुक्त नरेश ठाकुर पर कार्रवाई करते हुए उसके घर की कुर्की इस तरह करवायी कि शायद ही किसी के साथ ऐसा हुआ हो.
रिपोर्ट पर हुआ संदेह तो सीआइडी को दी गयी जांच : इधर एसपी द्वारा अभियुक्तों पर कार्रवाई करते हुए केस की सारी प्रक्रिया को पूरी कर 12 जून 14 को जांच प्रतिवेदन मानवाधिकार आयोग के पास भेज दिया गया. एसपी पंकज सिन्हा की जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद बिहार मानवाधिकार आयोग को जांच रिपोर्ट के कई पहलुओं पर संदेह हुआ.
आयोग ने आखिर अपना निर्णय बदलते हुए एक जुलाई 2014 को जांच की जिम्मेवारी सीआइडी को दे दी. सीआईडी ने जांच शुरू कर दी और तत्कालीन एसपी व सदर डीएसपी की जांच पर सवाल उठाते हुए अपना जांच प्रतिवेदन तीन फरवरी 2015 को सौंप दिया.
सीआइडी जांच प्रतिवेदन के आधार पर आयोग ने 14 बिंदुओं पर उठे सवाल को दर्ज करते हुए वर्तमान एसपी हरि प्रसाथ एस से केस को री-व्यू कराने की सिफारिश की़ एसपी हरि प्रसाथ एस ने भी मामले को गंभीरता से लिया और प्रतिवेदन 7 के माध्यम से सीआईडी जांच प्रतिवेदन में उठाये गये सवालों को अंकित करते हुए 30 अप्रैल 2015 को कांड की फिर से जांच करने का आदेश जारी कर दिया. कांड का पर्यवेक्षण नगर थानाध्यक्ष विशाल आनंद कर रहे हैं. 15 माह बीत चुके हैं. कुछ बिंदुओं पर रिपोर्ट सौंपी भी जा चुकी है. जांच जारी है.
अमरनाथ ने बेची नौ लाख की अचल संपत्ति: उमेश का कहना है कि अमरनाथ यदि दोषी नहीं हैं, तो उन्होंने विधवा को घर से क्यों निकाल दिया, जिसके कारण वह अपने दो बच्चों के साथ पिता के घर नेपाल में जिल्लत की जिंदगी जीने को मजबूर है. उमेश का कहना है कि उसने अपने स्तर से पता किया, तो पता चला है कि इस अवधि में अमरनाथ ने करीब नौ लाख की अचल संपत्ति बेच डाली है. उमेश का आरोप है कि अमरनाथ ने संपत्ति हड़पने के लिए भाई की हत्या करवाई और जमीन खरीददार नरेश ठाकुर को सजा दिलाने के लिए नौ लाख की संपत्ति बेच दी है.
डीजीपी बोले नहीं चलती हमारी
हिस्सा मांगने पर सूचक विधवा को दी जा रही है धमकी : इधर मृतक मुनमुन की पत्नी प्रियंका सिंह ने हाल ही में एसपी व लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को आवेदन देकर कांड के सूचक व मुनमुन के भाई अमरनाथ से जानमाल का खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगायी है. पीड़िता ने एसपी को दिये आवेदन में कहा है
कि वह आर्थिक तंगी से गुजर रही है. भैंसुर अमरनाथ से हिस्सा मांगने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है. हिस्से के नाम पर मात्र छह कट्ठा जमीन ही देने के लिए तैयार है, जबकि अभी भी अमरनाथ के पास करीब 50 एकड़ जमीन व लाखों की अन्य संपत्ति मौजूद है.
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