बिहार बोर्ड ने उलझाया कॉलेज का मामला

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Dec 2015 7:01 PM

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बिहार बोर्ड ने उलझाया कॉलेज का मामला महिला कॉलेज,जनकपुर रोड का मामला सीतामढ़ी. जिले के पुपरी प्रखंड के महिला कॉलेज जनकपुर रोड का मामला वर्षों से चला आ रहा है. अब तक कई स्तर से कॉलेज की जांच हो चुकी है, पर किसी भी अधिकारी द्वारा अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. लोगों […]

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बिहार बोर्ड ने उलझाया कॉलेज का मामला महिला कॉलेज,जनकपुर रोड का मामला सीतामढ़ी. जिले के पुपरी प्रखंड के महिला कॉलेज जनकपुर रोड का मामला वर्षों से चला आ रहा है. अब तक कई स्तर से कॉलेज की जांच हो चुकी है, पर किसी भी अधिकारी द्वारा अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. लोगों की माने तो बिहारी विद्यालय परीक्षा समिति ही नहीं चाहती है कि उक्त कॉलेज का मामला सुलझे. बोर्ड कॉलेज को विवाद से दूर रखना चाहती तो उस जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई की होती, जिस जांच कमेटी का गठन खुद बोर्ड ने किया था. यह जान कर हैरानी होगी की पूर्व में गठित कमेटी की रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में फेंक कर बोर्ड ने डीइओ के नेतृत्व में एक नयी कमेटी गठित कर दी है. इसी कारण अब उक्त कॉलेज के दूसरे गुट के शिक्षक व कर्मियों का नेतृत्व कर रहे लिपिक पंकज मिश्र ने बोर्ड पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है. साथ ही कहा है कि वे न्याय के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे. संबद्धता रद्द करने की अनुशंसा बता दें कि बोर्ड ने 18 फरवरी 13 को धरातल पर जाकर कॉलेज की हर गतिविधियों की जांच करने के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की थी. टीम में एक कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. बी नारायण व रिटायर्ड अधिकारी विजय कुमार मिश्र भी शामिल थे. यह टीम एक-एक बिंदु की जांच की थी. वह भी पुपरी पहुंच कर. टीम ने माना था कि किसी भी लिहाज से नहीं लगता कि यहां कॉलेज का संचालन होता है. यह भी जानकारी मिली कि यहां अवैध तरीके से शिक्षक व कर्मियों की नियुक्ति की गयी है. पढ़ाई भी नहीं होती है. सिर्फ नाम का कॉलेज है. जांच रिपोर्ट में टीम ने लिखा था कि इस महिला कॉलेज की संबद्धता रद्द करने के साथ ही कोड वापस ले लिया जाए. वर्ष 2010 के बाद अनुदान बंद विवाद के चलते ही वर्ष 2010 में अनुदान मिला और उसके बाद अब तक अनुदान के नाम पर कॉलेज को एक पैसा भी नहीं मिला है. उक्त जांच रिपोर्ट पर बोर्ड ने सत्र 2013-15 में इंटर में नामांकन पर रोक लगा दी. बाद में बोर्ड ने ही उक्त रोक को हटा भी लिया. खास बात यह कि जब नामांकन पर रोक लगाई गई तो उसके बारे में दो-तीन विज्ञापन निकाला गया, पर जब रोक हटाई गई तो कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया. यानी यह काम गुपचुप तरीके से हुआ. इसी कारण दूसरे गुट के श्री मिश्रा बोर्ड पर उंगली उठा रहे हैं. डीइओ की रिपोर्ट पर नजर अब दोनों गुट के शिक्षकों व कर्मियों की नजर डीइओ की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है. पहली टीम की रिपोर्ट से अलग डीइओ का रिपोर्ट होने पर कॉलेज का मामला और फंस जाएगा. दूसरे गुट को आशंका है कि पहले गुट की मिलीभगत से उसके गुट में डीइओ रिपोर्ट कर सकते हैं. ऐसा होने पर दूसरा गुट दोनों टीमों की जांच रिपोर्ट के साथ कोर्ट की शरण में जाने की बात कह रहा है. बहरहाल, देखना है कि कब तक कॉलेज का मामला सुलझ पाता है.

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