शिव के पंचानन स्वरूप में समाया है ब्रह्मांड : शशिकांताचार्य

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शिव के पंचानन स्वरूप में समाया है ब्रह्मांड : शशिकांताचार्य फोटो-34 कथा सुनती महिलाएं सीतामढ़ी : श्री हलेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में चल रहे शिव पुराण कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को मिथिलापुरी(कोलकाता) मानस कुंज आश्रम के संत श्री शशिकांताचार्य जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग को रखा. कथावाचक संत श्री ने कहा कि […]

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शिव के पंचानन स्वरूप में समाया है ब्रह्मांड : शशिकांताचार्य फोटो-34 कथा सुनती महिलाएं सीतामढ़ी : श्री हलेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में चल रहे शिव पुराण कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को मिथिलापुरी(कोलकाता) मानस कुंज आश्रम के संत श्री शशिकांताचार्य जी महाराज ने शिव-पार्वती विवाह प्रसंग को रखा. कथावाचक संत श्री ने कहा कि शिव जी जब विवाह के लिए चले तो संपूर्ण ब्रह्मांड के देवता, ऋषि, भूत प्रेत संग में हो चले. शिव जी का पंचानन स्वरूप सबका मन मोह रहा था. पंचानन स्वरूप के बारे में स्वामी जी ने बताया कि शिव जी का पंचानन स्वरूप चार सिर चारों दिशाएं तथा एक सिर शिवोडहं का द्योतक है. इसके अलावा उन्होंने दूसरा तर्क दिया कि शिव जी का पंचानन स्वरूप पंच प्रकृति का द्योतक है. जिसमें आकाश तत्व से शब्द का, जल तत्व से रस का अग्नि तत्व से तेज का, वायु तत्व से स्पर्श का तथा पृथ्वी तत्व से गंध का प्रतिनिधित्व करता है. इसी पंचानन स्वरूप में पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है. शिव पुराण कथा को लेकर दिनों दिन भीड़ बढ़ती जा रही है. 21 दिसंबर से आरंभ कथा 27 दिसंबर तक चलेगी.

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