जांच में विफल रहने पर राजस्व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई

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जांच में विफल रहने पर राजस्व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई राजस्व कर्मचारी विनोद झा का मामला वेतन ले लिये होंगे तो होगी वसूलीसीतामढ़ी. बोखड़ा अंचल के राजस्व कर्मचारी रहे विनोद कुमार झा को कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतना महंगा पड़ा है. डीएम राजीव रौशन ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. सरकारी राशि गबन करने […]

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जांच में विफल रहने पर राजस्व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई राजस्व कर्मचारी विनोद झा का मामला वेतन ले लिये होंगे तो होगी वसूलीसीतामढ़ी. बोखड़ा अंचल के राजस्व कर्मचारी रहे विनोद कुमार झा को कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतना महंगा पड़ा है. डीएम राजीव रौशन ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. सरकारी राशि गबन करने के मामले में झा को निलंबित किया गया था. दो माह से अधिक दिनों तक बगैर सूचना के मुख्यालय से नदारद रहे थे. उन्होंने अनुपस्थित अवधि के वेतन भुगतान पर रोक लगा दिया है. कहा है कि यदि वेतन ले लिये होंगे तो वसूली की जायेगी. संबंधित सीओ को इस आशय का पत्र भेजा गया है और इसकी जानकारी करने को कहा गया है कि झा उक्त अवधि का वेतन लिये तो नहीं हैं. क्या है पूरा मामला बोखड़ा सीओ ने 24 जुलाई 08 को डीएम को एक रिपोर्ट भेज कर बताया था कि हल्का नंबर तीन के प्रभार के दौरान राजस्व कर्मचारी झा द्वारा वर्ष 2007-08 में राजस्व संग्रह से संबंधित कागजात, लगान रसीद व पंजी की जांच नहीं कराये थे. साथ ही नजारत में राजस्व जमा नहीं कराये थे. झा पर लगान का पैसा अपने निजी काम में खर्च कर लेने का आरोप लगाया गया था. सीओ ने झा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी. राजस्व कर्मचारी के खिलाफ नानपुर थाना में 967/08 प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. यह बात 21 अगस्त 08 की है. तब जमा कराये पैसे प्राथमिकी होने के बाद 31 मार्च 09 को झा द्वारा लगान का एक लाख 78 हजार 196 रुपये सरकारी खजाने में जमा कराया गया था. इससे पूर्व बोखड़ा सीओ द्वारा लगान का पैसा वसूली करने के एक साल बाद जमा करने व मुख्यालय से बगैर सूचना के गायब रहने को ले झा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रपत्र ‘क’ में आरोप गठित कर जिला में भेज दिया गया. स्पष्टीकरण हुआ खारिज विभागीय कार्रवाई के लिए तत्कालीन एडीएम एसएन झा एवं उनके तबादले के बाद तत्कालीन जिला पंचायत राज पदाधिकारी सुनील कुमार को संचालन पदाधिकारी बनाया गया था. जांच अधिकारी ने कर्मी झा के स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं माना था. दूसरी बार पूछे गये स्पष्टीकरण को कोई जवाब नहीं दिया था. पहले वाले स्पष्टीकरण में झा ने कहा था कि उनको पांच माह का वेतन नहीं मिला था. बीमार पत्नी को इलाज कराने के लिए दिल्ली ले कर चले गये थे. इसी कारण लगान का पैसा जमा नहीं कर पाये थे. खास बात यह कि झा किसी चिकित्सक को पुरजा जांच अधिकारी को नहीं दिखा पाये, जिससे कि यह स्पष्ट हो कि उनकी पत्नी बीमार थी. साबित करने में रहे विफल रिपोर्ट में जांच अधिकारी द्वारा यह स्पष्ट लिखा गया था कि झा अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार साबित करने में विफल रहे हैं. विभागीय कार्रवाई में की गयी अनुशंसा के आलोक में डीएम ने झा के 14 अगस्त 08 से 18 अक्तूबर 08 तक के वेतन व भत्ता दोनों पर रोक लगा दिया है.

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