आइएमए ने जिला प्रशासन से की अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग

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सीतामढ़ी : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की स्थानीय शाखा के तत्वावधान में बुधवार को जिले के सभी चिकित्सक, दवा व्यवसायी संघ, दवा प्रतिनिधि संघ, डेंटिस्ट, फिजियोथेरेपी चिकित्सक, लैब एसोसिएशन के साथ नागरिक मंच व समाज के प्रबुद्ध लोगों ने हाल ही में हुए चिकित्सकों एवं दवा व्यवसायियों पर दुर्व्यवहार एवं उत्पीड़न के खिलाफ शहर में […]

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सीतामढ़ी : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) की स्थानीय शाखा के तत्वावधान में बुधवार को जिले के सभी चिकित्सक, दवा व्यवसायी संघ, दवा प्रतिनिधि संघ, डेंटिस्ट, फिजियोथेरेपी चिकित्सक, लैब एसोसिएशन के साथ नागरिक मंच व समाज के प्रबुद्ध लोगों ने हाल ही में हुए चिकित्सकों एवं दवा व्यवसायियों पर दुर्व्यवहार एवं उत्पीड़न के खिलाफ शहर में विरोध प्रदर्शन किया.

सभी चिकित्सक दिन के 11 बजे कारगिल चौक पर एकत्र हुए, जहां अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ अस्पताल रोड होते हुए रेडक्रॉस भवन तक गये. आइएमए डुमरा के अध्यक्ष सह वयोवृद्ध चिकित्सक डॉ आरए शर्मा, आइएमए के अध्यक्ष डॉ एम ठाकुर, सचिव डॉ अनिल कुमार तिवारी ने संयुक्त रुप से कहा कि जीवन मरण चिकित्सक के हाथ में नहीं वह अपना सब कुछ मरीज को बचाने के लिए लगा देता है लेकिन फिर भी अगर मरीज नहीं बच पाता है

तो मरीज के परिजनों को धैर्य रखना चाहिए, न कि चिकित्सकों से दुर्व्यवहार एवं उन पर हमला करना चाहिए. आइएमए ने जिला प्रशासन से अविलंब डॉ प्रमोद पर हमला करने व दुर्व्यवहार करनेवाले अपराधियों को अविलंब गिरफ्तार करने की मांग की है.

दवा प्रतिनिधियों ने की
कड़ी भर्त्सना
दवा प्रतिनिधि यूनियन के मनोज कुमार एवं राम निवास मिश्रा ने डॉक्टरों पर हुई घटना की कड़ी भर्त्सना की है. डेंटल एसोसिएशन के वरीय चिकित्सक डॉ अजय कुमार, डॉ राकेश आनंद एवं डॉ अविनाश कुमार ने घटना की कड़ी निंदा की है. लैब एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधांशु शेखर एवं सचिव विनय कुमार ने प्रशासन की शीघ्रातिशीघ्र पहल करने की मांग की है.
वही , शहर के चिकित्सक डाॅ प्रमोद कुमार की क्लिनिक में गत दिन एक मरीज की मौत के बाद परिजन द्वारा क्लिनिक में की गयी तोड़फोड़ के विरोध में चिकित्सकों ने शहर में विरोध मार्च निकाला. पटना में चल रहे ट्रेनिंग होने के चलते आइएमए की डुमरा शाखा के सचिव डाॅ आरके यादव शामिल नहीं हो सके.
उन्होंने दूरभाष पर बताया कि वे विरोध मार्च व चिकित्सकों की मांग का समर्थन करते हैं. किसी चिकित्सक के यहां तोड़फोड़ की घटनाएं सभ्य समाज के लिए उचित नहीं हैं. कोई चिकित्सक नहीं चाहता कि उनके मरीज के साथ कोई अप्रिय घटना घट जाये. हर चिकित्सक अपनी योग्यता के अनुसार मरीज का बेहतर से बेहतर इलाज करने की कोशिश करता है.
इलाज में विफल रहने पर मरीज को अपने से अच्छे व बेहतर चिकित्सक के यहां रेफर कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर सेवा के लिए चिकित्सक को मौका देना चाहिए. दहशत पैदा कर चिकित्सक से अच्छी सेवा नहीं ली जा सकती. मरीज के परिजन भी स्वतंत्र हैं कि वे किस चिकित्सक से इलाज कराये. उन्हें चिकित्सक पर भरोसा व विश्वास करना होगा.
डाॅ यादव ने कहा कि अगर चिकित्सक दहशत में रहेंगे तो गंभीर मरीज का इलाज नहीं कर पायेंगे. किसी चिकित्सक से मानवीय भूल होती है तो संबंधित लोगों को संघ व सक्षम अधिकारी से बात करनी चाहिए. लोगों को यह समझ लेना चाहिए कि चिकित्सक, चिकित्सक होते हैं भगवान नहीं.
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