उदयीमान सूर्य को अर्घ के साथ छठ संपन्न
उदयीमान सूर्य को अर्घ के साथ छठ संपन्न फोटो नंबर- 25 सुबह में एक घाट का नजारा, 26 डुमरा में सूर्य को अर्घ देती व्रती, 27, 28, 29,30 अर्घ देती व्रती, 31 एक घाट पर लाइट की सजावट, 32 एक घाट पर जायजा लेते विधायक सुनील कुमार व अन्य, 2 व 3 कैलाशपुरी लखनदेई घाट […]
उदयीमान सूर्य को अर्घ के साथ छठ संपन्न फोटो नंबर- 25 सुबह में एक घाट का नजारा, 26 डुमरा में सूर्य को अर्घ देती व्रती, 27, 28, 29,30 अर्घ देती व्रती, 31 एक घाट पर लाइट की सजावट, 32 एक घाट पर जायजा लेते विधायक सुनील कुमार व अन्य, 2 व 3 कैलाशपुरी लखनदेई घाट पर अर्घ देती व्रती, 36 नदी में खुदाई कर बनाया गया घाट, 37 दंड प्रणाम कर घाट पर जाता एक व्रती प्रतिनिधि, सीतामढ़ी. डुमरा समेत जिले के सभी प्रखंडों में चार दिवसीय लाेक आस्था का महापर्व छठ पर्व बुधवार को उदयीमान सूर्य को अर्घ देने के साथ ही संपन्न हो गया. पर्व के दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई. वैसे जिला प्रशासन की ओर से पूरे जिले में विभिन्न स्थानों पर पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गयी थी. अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ मंगलवार को सुबह से ही लोग घाटों को अंतिम रूप देने में जुट गये. दोपहर तक घाटों को तैयार कर लिया गया. कई घाटों पर पंडाल बनाया गया था. खास कर नदियों के तट पर. अपराह्न तीन बजे के बाद लोग डाला लेकर घाट पर जाने लगे. घाटों पर भगवान सूर्य से जुड़ी गीतों को गाने के बाद व्रतियों ने उन्हें अर्घ दिया. इसके बाद लोग डाला लेकर अपने-अपने घर चले आये. सुबह में घाट मनमोहक सुबह में घाटों पर बिजली- बत्ती यानी लाइटिंग की व्यवस्था होने से काफी मनमोहक लग रहा था. लखनदेई नदी के शहर व डुमरा के कैलाशपुरी स्थित घाट पर सुबह का दृश्य देखते बन रहा था. एक ओर जहां नये-नये परिधानों में छठ व्रती छठ से जुड़ी गीतें गा रही थी तो दूसरी ओर छोटे-छोटे बच्चे पटाखे फोड़ रहे थे. पटाखों की गूंज से घाट का कोना-कोना तब तक गूंजता रहा, जब तक कि उदयीमान सूर्य को अर्घ न दे दिया गया. सूर्य प्रतिमा की भी पूजा शहर व कैलाशपुरी घाट पर अर्घ देने के बाद व्रतियों ने भगवान सूर्य की प्रतिमा पर प्रसाद चढ़ा उनकी पूजा की और उनसे आयु, विद्या, यश व बल की कामना की. अर्घ के बाद व्रतियों ने घाट पर ही अपने परिजनों को प्रसाद दिया. यहां के बाद व्रती ब्रह्म स्थान, महारानी स्थान व अन्य देवी-देवताओं को प्रसाद चढ़ा कर उनकी पूजा की. नदी पर व्रतियों की संख्या घटी शहर के बीचो-बीच लखनदेई नदी है. इसे लक्ष्मणा नदी भी कहा जाता है. हाल के वर्षों तक शहर के अधिकांश महिला व पुरुष इसी नदी के घाट पर छठ करते थे. अब उक्त नदी के अस्तित्व पर ही खतरे का बादल मंडराने लगा है. उसका अतिक्रमण किया जा रहा है. नदी का पेटी कूड़ा-कर्कट से भरा हुआ है. पानी स्थिर रहने के कारण साफ नहीं है. गंदगी व गंदा पानी होने के चलते हर वर्ष नदी के घाट पर छठ करने वालों की संख्या घटती जा रही है. अधिकांश लोग अपने आवासीय परिसर में कृत्रिम घाट बना कर पूजा किये. पर्व को लेकर एक श्रद्धालु ने नदी में ही खुदाई कर व पंपसेट से पानी पटवन कर घाट बनाया था. लौटने की तैयारी शुरू छठ पर्व में बहुत से लोग बाहर से घर पर आते हैं. पर्व संपन्न होने के साथ ही लोग लौटने की तैयारी शुरू कर दिये हैं. वैसे बुधवार को भी बहुत से लोग अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गये. कहा जाता है कि छठ के परना के दिन किसी भी दिशा में जाने पर कोई दोष नहीं लगता है.
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