सदर अस्पताल में नहीं लगा सीसीटीवी कैमरा

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सदर अस्पताल में नहीं लगा सीसीटीवी कैमरा बिचौलिये का आतंक, परिजन हो रहे आर्थिक शोषण का शिकारफोटो नंबर-3 सदर अस्पताल सीतामढ़ी. सदर अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगने के चलते मरीज के परिजनों को बिचौलियों का सामना करना पड़ता है. इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया […]

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सदर अस्पताल में नहीं लगा सीसीटीवी कैमरा बिचौलिये का आतंक, परिजन हो रहे आर्थिक शोषण का शिकारफोटो नंबर-3 सदर अस्पताल सीतामढ़ी. सदर अस्पताल में सीसीटीवी कैमरा नहीं लगने के चलते मरीज के परिजनों को बिचौलियों का सामना करना पड़ता है. इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है. हालांकि इस दिशा में विगत कुछ दिन पूर्व रोगी कल्याण समिति की बैठक में योजना को अमलीजामा पहनाने का निर्णय लिया गया था. लेकिन योजना बैठक तक ही सीमित रह गया. वही सीसी टीवीकैमरा कब तक लग पायेगा, यह बताने को अस्पताल प्रबंधन तैयार नहीं है. निर्णय पर अमल नहीं गौरतलब है कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में अस्पताल परिसर में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्णय लिया गया था ताकि बिचौलियों की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके. तत्कालीन अस्पताल उपाधीक्षक डॉ बबन कुंवर इस मामले पर काफी गंभीर थे. उनके तबादले के बाद कैमरा लगाने का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया. अस्पताल प्रबंधन भी जानता है कि यहां बिचौलियों का बोल-बाला है. अधिकारी खुल कर इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं, मगर सच्चाई है कि प्रतिदिन न जाने कितने मरीज बिचौलियों के चंगुल में फंस जाते हैं. इसकी खबर मिलने के बाद ही बिचौलियों को रंगे हाथों पकड़ने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्णय लिया गया था. प्रसव वार्ड के आसपास बिचौलिये प्रसव वार्ड के आसपास बिचौलिये मंडराते रहते हैं. दिन में कम रात में बिचौलिये अधिक सक्रिय दिखते हैं. इनमें भी महिलाएं अधिक होती हैं. दो-तीन माह से महिला बिचौलियों की सक्रियता कुछ अधिक बढ़ गयी हैं. महिला बिचौलिया प्रसव वार्ड के आसपास मरीज का परिजन बन कर बैठी रहती हैं. जैसे ही कोई प्रसव पीड़िता आती हैं तो महिला बिचौलिया उसके परिजन को तरह-तरह की बातें कह बरगला देती है और परिजन मरीज को लेकर निजी चिकित्सक के यहां चले जाते हैं. वही महिला बिचौलिया पीड़िता के परिजन को कहती हैं कि अस्पताल में अभी चिकित्सक नहीं हैं. किसी नर्सिंग होम में जाकर मरीज को दिखा लें. यह भी कहा जाता है कि बाहर में भी कम पैसे में इलाज हो जायेगा. मरीज के परिजन को आर्थिक शोषण का पता तब चलता है जब चार-पांच हजार के बजाय 20-25 हजार का बिल उसे थमाया जाता है. सूत्रों के अनुसार कुल बिल में से महिला बिचौलिया को 25 से 30 फीसदी तक कमीशन मिलता है. रात भर खोले रहते हैं क्लिनिक बिचौलिया का जिससे सेटिंग-गेटिंग रहता है, वह रात भर अपना क्लिनिक खोल कर मरीज का इंतजार करता रहता है. सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के स्तर से इस सच्चाई का पता नहीं लगाने और कोई ठोस कार्रवाई नहीं किये जाने के कारण एक ओर जहां मरीज आर्थिक शोषण के शिकार होते हैं तो दूसरी ओर बिचौलियों व अन्य की चांदी कटती है. बताया गया है कि महिला बिचौलियों के चलते कुछ फर्जी चिकित्सकों की भी दाल-रोटी ठीक-ठाक चल जा रही है. कहते हैं अस्पताल प्रबंधक अस्पताल प्रबंधक शंभु शरण सिंह ने बताया कि आरकेएस की बैठक में लिये गये निर्णय के आलोक में अस्पताल परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाने की शीघ्र कार्रवाई की जायेगी. ताकि बिचौलियों का पकड़ा जा सके.

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