... अब धान की बाली में नहीं आया दाना

Updated:
विज्ञापन

सीतामढ़ी/बोखड़ा : जिले के किसान किसी वर्ष बाढ़ तो कभी सुखाड़ से फसलों के मारे जाने से परेशान रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों से खेती की ऐसी स्थिति है कि किसानों को लागत पूंजी भी नहीं लौट रही है. अन्य वर्षों की बात तो दूर हाल के गेहूं फसल की बात करें तो इससे किसानों […]

विज्ञापन

सीतामढ़ी/बोखड़ा : जिले के किसान किसी वर्ष बाढ़ तो कभी सुखाड़ से फसलों के मारे जाने से परेशान रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों से खेती की ऐसी स्थिति है कि किसानों को लागत पूंजी भी नहीं लौट रही है. अन्य वर्षों की बात तो दूर हाल के गेहूं फसल की बात करें तो इससे किसानों को हुई क्षति से शायद ही कोई अनजान होगा. काफी खर्च कर गेहूं की खेती करने वाले किसानों की कमर तब टूट गयी, जब गेहूं में दाना नहीं लगा.

हाथ मल कर रह गये किसान गेहूं की बाली में दाना नहीं लगा यह मामला किसी एक प्रखंड का नहीं था. जिले के सभी प्रखंडों से जिला प्रशासन व कृषि विभाग को शिकायत मिली थी. सबसे अधिक क्षति बोखड़ा व नानपुर प्रखंड में होने की बात कही गयी थी. डीएओ पीके झा बोखड़ा में गेहूं की बाली का जांच भी किये थे.

पाया कि, बाली में दाना नहीं लगा है. जिला से सरकार को रिपोर्ट भेजी गयी थी. आलोक में किसानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. काश! कोई कार्रवाई होती जानकारों का कहना है कि पानी के अभाव में एवं पछिया हवा से गेहूं की बाली में दाना नहीं लगा था. काश! पानी की समस्या के निदान के लिए प्रशासन के स्तर से कोई ठोस कदम उठाया गया होता तो आज पानी के अभाव में धान की बाली में दाना नहीं लगने की नौबत नहीं आती.

अधिकांश नलकूप ठप सिंचाई का सबसे बेहतर साधन सरकारी नलकूप माना जाता है. जिले के किसानों के लिए यह दुर्भाग्य की बात है कि अधिकांश नलकूप ठप पड़ा हुआ है. बोखड़ा प्रखंड के खड़का गांव में 35 वर्ष पूर्व नलकूप लगा था. नलकूप से एक इंच खेत का पटवन नहीं हो सका है. यह सच्चाई है. बोखड़ा में इस तरह के आठ अन्य नलकूप हैं, जिससे किसानों को आज तक पटवन का कोई लाभ नहीं मिला है. पूर्व में जिला स्तर पर हर सप्ताह किसानों के हित के लिए बैठकें होती थी.

उसमें निर्णय लिये जाते थे, पर उक्त निर्णयों से किसानों को फायदा नहीं हुआ है. खेती छोड़ने की नौबत खड़का गांव के नरेश झा, कारी राउत, मिथिलेश झा व बोखड़ा के जयकांत यादव कहते हैं कि बारिश नहीं होने एवं पंपसेट से पर्याप्त पटवन नहीं किये जाने के चलते धान की बाली में दाना नहीं पकड़ सका है. बताया कि अगर किसी खेत में धान की बाली में दाना पकड़ा है तो वह काला हो गया है. ऐसी स्थित रही तो किसान खेती छोड़ने पर विचार करने लगेंगे. कहते हैं कृषि अधिकारी किसान सलाहकार मृत्युंजय झा ने बताया कि पानी की कमी से धान की बाली में दाना नहीं लगा है. जिला को रिपोर्ट किया जायेगा. कृषि समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि चुनाव के चलते धान की बाली में दाना नहीं लगने की जांच नहीं की जा सकी है. चुनाव बाद इस पर ध्यान दिया जायेगा.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन