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टेंडर प्रक्रिया में था भारी गोलमाल, डीएम ने किया रद्द

Updated at : 14 Sep 2019 2:22 AM (IST)
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टेंडर प्रक्रिया में था भारी गोलमाल, डीएम ने किया रद्द

सीतामढ़ी : विगत दिनों सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग के तहत विभिन्न कार्यों के लिए आमंत्रित टेंडर प्रक्रिया की जांच में भारी अनियमितता बरती गयी है. डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के निर्देश पर मामले की जांच कर रहे अपर समाहर्ता मुकेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने की बात कही है. […]

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सीतामढ़ी : विगत दिनों सदर अस्पताल में आउटसोर्सिंग के तहत विभिन्न कार्यों के लिए आमंत्रित टेंडर प्रक्रिया की जांच में भारी अनियमितता बरती गयी है.

डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा के निर्देश पर मामले की जांच कर रहे अपर समाहर्ता मुकेश कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने की बात कही है. आपत्तिकर्ताओं के आवेदन पत्र के आलोक में करायी गयी जांच में आरोप सही प्रमाणित होने के बाद डीएम ने सदर अस्पताल की पूरी टेंडर प्रक्रिया को रद्द करते हुए नये सिरे से टेंडर आमंत्रित किये जाने का आदेश दिया है. वहीं इस मामले में सिविल सर्जन डॉ रवींद्र कुमार से कार्यालय द्वारा बरती गयी अनियमितता को लेकर दोषी कर्मियों को चिह्नित करते हुए उनसे कार्रवाई के विरुद्ध मंतव्य समेत स्पष्टीकरण एक सप्ताह के भीतर देने को कहा गया है. टेंडर प्रक्रिया की जद में आये कर्मियों पर गाज गिरना भी तय माना जा रहा है.
डीएम ने कार्रवाई के संबंध में सिविल सर्जन को भेजे पत्र में कहा है कि आउटसोर्सिंग के तहत सदर अस्पताल में विभिन्न कार्यों के लिए निकाली गयी टेंडर में प्राप्त आपत्ति की जांच अपर समाहर्ता द्वारा करायी गयी है. उन्होंने अपना जांच प्रतिवेदन समर्पित कर दिया है. जिसके अवलोकन से स्पष्ट होता है कि निविदा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है.
जांच के बिंदु में श्री कुमार ने उल्लेख किया है कि स्पाइडर प्रोटेक्शन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आपत्ति समर्पित किया गया है. उनके द्वारा साफ-सफाई के लिए जमा की गयी निविदा सीलबंद लिफाफा में कार्यालय को उपलब्ध कराया गया, परंतु कार्यालय द्वारा निविदाकर्ताओं के लिए सूचना का जो पत्र बना था, उसमें उनका नाम छोड़ दिया गया. जबकि निविदा प्राप्त करने के पश्चात जो पंजी संधारित है, उसमें उनका नाम संधारित है. इस बिंदु पर आपत्तिकर्ता का कथन सत्य प्रमाणित होता है.
प्रतिवेदन के दूसरे बिंदु पर कहा गया है कि पांच मई 2019 को आपके माध्यम से जो आपत्ति प्राप्त हुआ था, उसके संबंध में तथ्यात्मक प्रतिवेदन दिया है, उसमें किसी प्रकार की अनियमितता को निराधार एवं सत्य से परे बतलाया गया है. प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि निविदा एक हीं व्यक्ति द्वारा दिया गया है. इसलिए उस निविदा को चयन समिति द्वारा रद्द करने का निर्णय लिया गया है, जबकि उनके कार्यालय आदेश के द्वारा निकाले गये आदेश में आहार/पथ्य (भोज्य) की तिथि सात सितंबर 2019 निर्धारित की गयी है.
जांच प्रतिवेदन में आदेश को परस्पर विरोधाभासी बताते हुए कहा गया है कि यह संदेहास्पद तथा निविदा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के विरुद्ध है. मालूम हो कि जन कल्याण समिति के विशाल गौरव, संतोष कुमार समेत अन्य निविदाकर्ताओं ने डीएम को आवेदन देकर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत की थी.
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