थाइलैंड के प्रसिद्ध संस्कृत व पुरातत्व विद्वान को किया सम्मानित

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jul 2019 12:20 AM

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प्राच्य-भारती, सांस्कृतिक एवं पुरातत्व संस्था की आरे से समारोह का किया गया आयोजन सीतामढ़ी : शहर स्थित एक होटल के सभागार में सोमवार की शाम थाइलैंड के विश्व प्रसिद्ध संस्कृत, पाली और पुरातत्त्व के विद्वान प्रोफेसर डॉ चिरापत प्रपंडविद्या व चीन से आए उनके शिष्य व भारतीय दर्शन एवं बुद्ध चिंतन के शोधार्थी शिंग कांग […]

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प्राच्य-भारती, सांस्कृतिक एवं पुरातत्व संस्था की आरे से समारोह का किया गया आयोजन

सीतामढ़ी : शहर स्थित एक होटल के सभागार में सोमवार की शाम थाइलैंड के विश्व प्रसिद्ध संस्कृत, पाली और पुरातत्त्व के विद्वान प्रोफेसर डॉ चिरापत प्रपंडविद्या व चीन से आए उनके शिष्य व भारतीय दर्शन एवं बुद्ध चिंतन के शोधार्थी शिंग कांग के सम्मान में सम्मान समारोह सह रात्रि भोज का आयोजन प्राच्य-भारती, सांस्कृतिक एवं पुरातत्त्व संस्थान की ओर से किया गया. अध्यक्षता लोक अभियोजक अरुण कुमार सिंह ने की. वहीं, संचालन सुश्री दीपशिखा ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ विपन झा एवं डॉ बाबूलाल मिश्र के स्वस्ति वाचन से हुआ.

थाइलैंड में स्थापित संस्कार पुरुष की मान्यता अभूतपूर्व : नागेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय विरासत के विदेशी विद्वानों का स्वागत-सत्कार करना हम सबों के लिए गर्व की बात है. प्रोफेसर चिरापत एवं श्री शिंग को तिलक लगाकर व माला, चादर तथा पाग पहनाने के साथ ही रामायण एवं महाभारत की पुस्तक भेंट की गयी. दीपशिखा ने प्रोफेसर चिरापत की उपलब्धियों व उनको मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान एवं भारत के राष्ट्रपति से मिले सम्मान की चर्चा करते की. साथ ही उनकी थाइलैंड में स्थापित संस्कार पुरुष की मान्यता को अभूतपूर्व बताया.

दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति के विकास का दिया श्रेय : इतिहासविद् राम शरण अग्रवाल ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति के व्यापक एवं शालीन विकास का श्रेय प्रोफेसर चिरापत जैसे सांस्कृतिक आदर्श व्यक्तित्व को दिया. कहा कि श्री शिंग की उपस्थिति पुनः आह्वान सांग जैसा महान तीर्थयात्री का स्मरण दिलाते हैं. डॉ चिरापत ने दक्षिण पूरब एशिया में बौद्ध के प्राचीन पुरातत्त्व प्रमाणों के सचित्र बौद्धिक प्रस्तुतिकरण से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया. अध्यक्षीय संबोधन में सनातन हिंदू धर्म के शाश्वत मूल्यों को भारत के विदेशी राष्ट्रों से संबंध का मूलाधार बताया. रामशकंर शास्त्री ने समापन संबोधन में प्रोफेसर डॉक्टर चिरापत एवं श्री शिंग के प्रति आभार करते हुए सभी उपस्थित अतिथियों को धन्यवाद दिया.

कार्यक्रम में प्रसिद्ध शिल्पकार फणीभूषण विश्वास, डॉ टीएन सिंह, शंकर खेतान, रेणु चटर्जी, साहित्यकार आशा प्रभात, प्रो आनंद किशोर, प्रो उमेश चंद्र झा, दीपक चौधरी, उमाशंकर प्रसाद, रवि एवं विजेता उंटवालिया, केबीसी विजेता मधुबाला, डॉ प्रतीमा साह, डॉ अनिस, डा शाजीद अली खान, अभय प्रसाद, विजय शर्राफ व नेहा सिंह समेत दर्जनों गणमान्य लोग शामिल हुए.

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