फिर रंगदारों के निशाने पर शहर के व्यवसायी

सीतामढ़ी : कभी सूबे के सबसे शांत जिलों में सुमार सीतामढ़ी की आवो-हवा वक्त के साथ खतरनाक तरीके से बदली है. नक्सलियों के पांव जमाने के साथ ही रंगदारी को लेकर छूटभैये अपराधियों द्वारा खुद का गिरोह खड़ा कर लिये जाने के बाद रंगदारी को लेकर जो खूनी खेल शुरू हुआ है, वह अब तक […]
सीतामढ़ी : कभी सूबे के सबसे शांत जिलों में सुमार सीतामढ़ी की आवो-हवा वक्त के साथ खतरनाक तरीके से बदली है. नक्सलियों के पांव जमाने के साथ ही रंगदारी को लेकर छूटभैये अपराधियों द्वारा खुद का गिरोह खड़ा कर लिये जाने के बाद रंगदारी को लेकर जो खूनी खेल शुरू हुआ है, वह अब तक थमा नहीं है.
हां, इतना जरूर है कि कुछ महीनों की पुलिसिया सख्ती के बाद विधि-व्यवस्था की तस्वीर भी बदली है, लेकिन गिरोह के खतरनाक रूप पर लगाम कसना मुश्किल हुआ है. एक वक्त यह है भी था कि जब शहर के लोग रात्रि बाजार तक के हिस्सेदार होते थे. आज देर शाम तक घर से बाहर रहना परिवार वालों को बेचैन कर दिया है. लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद से अब तक आधा दर्जन से अधिक आपराधिक घटनाओं में व्यवसायी समेत तीन की गोली मारकर हत्या की गयी है.
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