अतिक्रमण कर बाइपास रोड में अवैध तरीके से बनीं दुकानें

Updated at : 04 May 2019 1:28 AM (IST)
विज्ञापन
अतिक्रमण कर बाइपास रोड में अवैध तरीके से बनीं दुकानें

पहले से ही पूरा शहर अतिक्रमण का है शिकार सीतामढ़ी : नगर परिषद की अधिकतर खाली पड़ी जमीनें अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है, यह किसी से नहीं छुपा हुआ है. यहां तक कि शहर की सड़कें भी फुटपाथियों एवं स्थानीय दुकानदारों के कब्जे में है. ऊपर से वाहन पार्किंग भी सड़कों पर ही होती […]

विज्ञापन

पहले से ही पूरा शहर अतिक्रमण का है शिकार

सीतामढ़ी : नगर परिषद की अधिकतर खाली पड़ी जमीनें अतिक्रमण का शिकार हो चुकी है, यह किसी से नहीं छुपा हुआ है. यहां तक कि शहर की सड़कें भी फुटपाथियों एवं स्थानीय दुकानदारों के कब्जे में है. ऊपर से वाहन पार्किंग भी सड़कों पर ही होती है. इस तरह पूरा शहर पूर्व से ही अतिक्रमण का शिकार है.
शहर के बीच से निकलने वाली पवित्र लक्ष्मणा नदी की जमीनों को हड़पने का सिलसिला भी सालों से लगातार जारी है. नदी किनारे की जमीनों को अतिक्रमित कर तेजी से भवनों का निर्माण कराया जा रहा है. कई-कई मंजिला इमारतों का निर्माण किया जा चुका है और निर्माण का सिलसिला जारी भी है, लेकिन बड़ी और गंभीर बात यह है कि इतना कुछ हो जाने के बावजूद नगर प्रशासन मूकदर्शक बनी हुई है. जबकि, प्रतिदिन अधिकारियों का शहर में आना-जाना लगा रहता है. अतिक्रमण व अवैध निर्माण की ओर अधिकारियों की नजर भी जाती है, लेकिन एक गंभीर बीमारी जैसी समस्या बन चुकी अतिक्रमण के इलाज के बारे में सोचने वाला कोई नजर नहीं आता.
एक मुखिया द्वारा किराये पर दिया जा रहा फुटपाथ: अब बाइपास रोड में चकमहिला बस पड़ाव से लेकर सीता घाट पुल तक सड़क किनारे की जमीन को अतिक्रमण कर दुकानदारी चलाने का सिलसिला चल पड़ा है. पिछले कुछ माह में देखते ही देखते बांस-बल्ले के सहारे दर्जनों फुटपाथी दुकानें खुल गयी है. अभी और भी कई दुकानों का निर्माण जारी है. प्रभात खबर की टीम ने शुक्रवार को सड़क किनारे अवैध फुटपाथी दुकानदारों से बात की तो पता चला कि उक्त सभी दुकानें स्थानीय एक मुखिया द्वारा किराया पर दी जा रही है.
कारोबारी खुद के पैसे से बनवा रहे दुकान: प्रति दुकान से प्रतिमाह एक हजार रुपये किराया वसूला जा रहा है. खास बात यह कि मुखिया द्वारा दुकानें बनाकर भी नहीं दी जा रही है, बल्कि मुखिया द्वारा केवल जगह की स्वीकृति दी जाती है, जिसके बाद इच्छुक दुकानदार खुद के पैसों से बांस-बल्लों से दुकानों का निर्माण करा रहे हैं. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बांस-बल्लों से निर्मित दुकानें भविष्य में खतरा भी बन सकता है. गड्ढ़ों के उपर बांस से निर्मित कमजोर दुकानें कभी भी धराशायी होकर गिर सकती है. यदि किसी प्रकार की कोई अनहोनी हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा, यह भी एक सवाल है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन