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महेंद्र हत्याकांड में दंपती को िमली उम्रकैद की सजा

Updated at : 28 Feb 2019 12:35 AM (IST)
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महेंद्र हत्याकांड में दंपती को िमली उम्रकैद की सजा

सुरसंड थाना के विररख निवासी हैं सजायाफ्ता कैलाश व संजू पांच-पांच हजार का अर्थदंड भी डुमरा कोर्ट : जिला एवं सत्र न्यायाधीश बजरंगी शरण ने बुधवार को प्रेम-प्रसंग में महेंद्र मुखिया की हत्या मामले में एक दंपति को उम्रकैद(आजीवन कारावास) की सजा सुनायी है. भादवि की धारा 302/201 में दोनों को दोषी ठहराया गया था. […]

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सुरसंड थाना के विररख निवासी हैं सजायाफ्ता कैलाश व संजू

पांच-पांच हजार का अर्थदंड भी
डुमरा कोर्ट : जिला एवं सत्र न्यायाधीश बजरंगी शरण ने बुधवार को प्रेम-प्रसंग में महेंद्र मुखिया की हत्या मामले में एक दंपति को उम्रकैद(आजीवन कारावास) की सजा सुनायी है. भादवि की धारा 302/201 में दोनों को दोषी ठहराया गया था. साथ हीं दोनों पर पांच-पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया है.
अर्थदंड की राशि नहीं देने पर एक-एक माह अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा. दोषी करार दिया है. सजा पाने वालों में सुरसंड थाना क्षेत्र के विररख गांव निवासी कैलाश ठाकुर एवं पत्नी संजू देवी शामिल हैं. कोर्ट ने इस मामले में दोनों को 20 फरवरी को दोषी करार दिया था. मामले में सरकार पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक प्रफुल्ल झा ने पक्ष रखा. वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता रामेश्वर प्रसाद उर्फ भोला बाबू ने बहस की.
क्या है पूरा मामला : 26 अप्रैल 2011 को परिहार थाना क्षेत्र के जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल कॉलेज के प्रांगण में सुरसंड थाना क्षेत्र के बघारी गांव निवासी राम भरोस मुखिया के नाबालिग पुत्र महेंद्र मुखिया का शव बरामद हुआ था. राम भरोस मुखिया ने अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराकर बताया था कि उसकी पत्नी पंचायत चुनाव में मुखिया का चुनाव लड़ी थी, जिस पर विरोधियों ने उसके पुत्र की हत्या कर दी.
वहीं मामले में प्रत्यक्षदर्शी व कांड में साक्षी गोविंद मुखिया, जो सूचक का भतीजा व मृतक का चचेरा भाई ने पुलिस व कोर्ट को अपने बयान में बताया की घटना की रात्रि वह और मृतक साथ में सोया थे. रात्रि 11 बजे उसके मोबाइल पर एक कॉल आया और वह उसे विररख के पवन मंडल व खुशबू के घर चलने को कहा, जिस पर वह भी उसके साथ गया.
दोनों पवन के घर पहुंचे. वहां से खुशबू से मिलने उसके घर पहुंच गया. करीब एक घंटा बाद घर से घिघियाने की आवाज पर गोविंद डर कर वहां से भाग गया और पवन मंडल के घर पहुंचा और सारी बातें पवन मंडल को बताया. पवन मंडल उसे अपने घर मे छुपा लिया. तभी खुशबू की मां संजू देवी और पिता कैलाश ठाकुर व अन्य लोग पवन के घर आये, कुछ बातें की. इसके बाद पवन स्कॉर्पियो ले उसके घर गया और महेंद्र का शव लाद कर ले गया.
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