मुकदमा करने के बाद वादी व उनके परिजन कर लेते हैं सुलह

Published at :06 Mar 2018 3:44 AM (IST)
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मुकदमा करने के बाद वादी व उनके परिजन कर लेते हैं सुलह

पुलिस की गलती से भी आरोपितों को नहीं मिल पाती है सजा बयान से मुकर कर सुलह करने वालों को नहीं मिलेगा आर्थिक लाभ आरोपितों की रिहाई का आंकड़ा अधिक होने से निदेशक गंभीर सीतामढ़ी : अनुसूचित जाति व जनजाति से संबंधित मामले में काफी कम आरोपितों को सजा मिल पा रही है, यह सच्चाई […]

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पुलिस की गलती से भी आरोपितों को नहीं मिल पाती है सजा

बयान से मुकर कर सुलह करने वालों को नहीं मिलेगा आर्थिक लाभ
आरोपितों की रिहाई का आंकड़ा अधिक होने से निदेशक गंभीर
सीतामढ़ी : अनुसूचित जाति व जनजाति से संबंधित मामले में काफी कम आरोपितों को सजा मिल पा रही है, यह सच्चाई है. सजा के आंकड़ों पर गौर करें तो इस मामले में जिला जीरो पर आउट है.
सरकार का कहना है कि अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अधिक से अधिक आरोपितों को सजा दिलाये, पर हाल यह है कि आरोपित बच जा रहे है. यह जानकर हैरानी होगी कि हत्या के मामले के आरोपित भी कानून के शिकंजे में नहीं फंस पा रहे हैं. इसके पीछे मुख्य कारण वादी या उनके परिजन का आरोपितों से सुलह कर लेना है.
गत दिन निदेशक, अभियोजन ने पटना में अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की समीक्षा की थी. वैसे 10 जिलाें की सूची बनायी गयी थी, जहां सजा की संख्या शून्य है. उस सूची में यह जिला भी शामिल था. वैसे जिला, जहां रिहाई की संख्या सबसे अधिक है, की सूची में सीतामढ़ी जिला 13 वें स्थान पर था. यहां 38 आरोपितों की रिहाई हुई है. छह वैसे जिला की सूची बनायी गयी थी, जहां सजा की संख्या सबसे अधिक है, की सूची में इस जिला का नाम शामिल नहीं था. समीक्षा के दौरान अनुसूचित जाति मामले के विशेष लोक अभियोजक उपेंद्र बैठा भी मौजूद थे.
रिहाई पर नियंत्रण की कोशिश हो
समीक्षा के दौरान निदेशक ने गुणवत्तापूर्ण अभियोजन करने एवं पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए गवाहों की उपस्थिति कराने, सजा की संख्या में वृद्धि लाने, रिहाई पर नियंत्रण करने व रिहाई के विरुद्ध अपील करने की बात कही. विशेष लोक अभियोजकों को कांडों के त्वरित निष्पादन में डीएम व एसपी से संपर्क करने को कहा गया.
निदेशक ने 30 दिनों के अंदर आरोप पत्र समर्पित कराकर आरोपितों को सजा दिलाने का निर्देश दिया. अब मामले में सुलह करने वालों को सरकारी आर्थिक लाभ नहीं मिल पायेगा. विशेष लोक अभियोजकों को कहा गया है कि अगर सूचक सुलह कर लेता है तो उससे इस आशय का शपथ पत्र लिया जायेगा कि वह किसी प्रकार की राशि के लिए दावेदार नहीं होगा.
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