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कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए घरों में दस्तक देगी टीम

Updated at : 31 Jan 2018 1:24 AM (IST)
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कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए घरों में दस्तक देगी टीम

जिले में 140 कुष्ठ रोगियों में 108 की स्थिति गंभीर, चल रहा है इलाज शेखपुरा : जिले में कुष्ठ रोगियों की पहचान एवं जन जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. मंगलवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सदर अस्पताल में अधिकारी और कर्मियों ने स्पर्श जागरूकता अभियान के तहत जिले को […]

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जिले में 140 कुष्ठ रोगियों में 108 की स्थिति गंभीर, चल रहा है इलाज

शेखपुरा : जिले में कुष्ठ रोगियों की पहचान एवं जन जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. मंगलवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर सदर अस्पताल में अधिकारी और कर्मियों ने स्पर्श जागरूकता अभियान के तहत जिले को कुष्ठ मुक्त करने की शपथ ली. सिविल सर्जन डॉ मृगेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में संचारी रोग पदाधिकारी डॉ नीलिमा रुखैयार, पर्यवेक्षक प्रमोद कुमार, डीपीएम श्याम कुमार निर्मल, अस्पताल प्रबंधक धीरज कुमार समेत अन्य मौजूद थे. जिले में कुष्ठ रोगियों संख्या 140 है. वहीं 124 वैसे रोगी हैं, जिनकी प्रारंभिक स्थिति में पहचान नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हो गयी है.
15 से 28 फरवरी तक चलेगा अभियान:
जिले में कुष्ठ रोगी खोज अभियान के तहत 15 से 28 फरवरी तक विशेष अभियान चलाया जायेगा. इसमें एएनएम व आशा के साथ एक पुरुष स्वयंसेवी भाग लेंगे. दो सदस्यीय खोजी दल में शामिल लोग घर-घर जा कर कुष्ठ रोगियों की पहचान करेंगे.
इस अभियान की सफलता के लिए विभाग ने माइक्रो प्लान बनाया है. एक हजार की आबादी पर एक खोजी दल को तैनात किया गया है.
खोजी दल को मिलेगा मानदेय
जिले में अगले माह आयोजित होने वाले कुष्ठ रोगी खोज अभियान में काम करने वाले कर्मियों को मानदेय दिया जायेगा. एक दल के दो सदस्य को 50-50 रुपये दिये जायेंगे. वहीं, इलाजरत रोगी को चिकित्सा केंद्र तक लाने के लिए 25 रुपये, दवा का पूरा कोर्स लेनेवाले मरीज को अस्पताल लाने पर 50 रुपये, विकलांग मरीज को अस्पताल लाने पर 100 रुपये तथा मरीज की पहचान करने पर 250 रुपये दिये जायेंगे़
कुष्ठ की अनदेखी से विकलांगता का खतरा
कुष्ठ रोग की अनदेखी से विकलांगता का खतरा रहता है़ चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि शरीर में बदरंग दाग और उसमें खुजली, जलन, दर्द नहीं होना और सूनापन होने की स्थिति पर जांच कराएं. ऐसे रोगियों को पीबी की श्रेणी में रख कर छह महीने का एमडीटी कोर्स दिया जाता है. इस स्टेज की अनदेखी से मरीज विकलांगता की स्थिति में आ जाता है़ इन्हें एमबी की श्रेणी कहा जाता है़ ऐसे मरीजों को एक साल तक दवा दी जाती है़
इस चिकित्सा कीट की खासियत यह है कि पहले दिन के उसकी दवा खाने से ही मरीज के शरीर में कुष्ठ रोग को बढ़ानेवाले माइक्रो वेक्टेरियम लेप्ती का खात्मा हो जाता है़
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