एसबीआई ने ठोंका तीन बैंकों पर हर्जाना
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jan 2018 4:50 AM
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सख्ती. मुख्य शाखा में लगे आठ यूबी लैंप मामला क्लोन चेक से फर्जी निकासी का शेखपुरा : नगर पर्षद के सरकारी खाते से 10.68 लाख रुपये की फर्जी निकासी के मामले में एसबीआई की मुख्य शाखा चांदनी चौक ने तीनों बैंकों से हर्जाने का दावा ठोका है. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस […]
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सख्ती. मुख्य शाखा में लगे आठ यूबी लैंप
मामला क्लोन चेक से फर्जी निकासी का
शेखपुरा : नगर पर्षद के सरकारी खाते से 10.68 लाख रुपये की फर्जी निकासी के मामले में एसबीआई की मुख्य शाखा चांदनी चौक ने तीनों बैंकों से हर्जाने का दावा ठोका है. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में एसबीआई ने मुंबई स्थित यूनियन बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के साथ फेडरल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से ही हर्जाने का दावा ठोका गया है. बैंक अधिकारी के मुताबिक फर्जी निकासी के मामले में इन्हीं की लापरवाही सामने आयी है. इसके साथ ही दोबारा ऐसी घटना न हो इसके लिए एसबीआई की शाखा यूबी लैंप लगाकर भुगतान करने के पूर्व चेकों की जांच करने की नियमित कार्रवाई शुरू कर दी है.
बैंक यूवी लैंप में जांच के बाद व भुगतान से पहले चेक के पिछले हिस्से पर यूवी चेक की मुहर भी लगाने का निर्देश दिया है. क्लोन चेक तैयार कर फर्जी निकासी के इस बड़े मामले में जहां पुलिस और विभाग जांच में जुटी है, वहीं एसबीआई ने इतनी बड़ी रकम की फर्जी निकासी के मामले में मुंबई की तीनों शाखाओं को जिम्मेदार ठहराया है. इसके साथ ही बैंक को हर्जाने के रूप में राशि जमा कराने को भी कहा है.
हालांकि इस मामले में राशि लौटाने को लेकर उक्त बैंकों की क्या भूमिका रहेगी. यह तो आनेवाला वक्त ही बतायेगा.
बैंक खातों के सुरक्षित आंकड़े जुटा रहे अपराधी
क्लोन चेक तैयार कर नगर पर्षद के खाते से इतनी बड़ी राशि की फर्जी निकासी के मामले में आज तक यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर कौन-सी वह प्रक्रिया है, जिससे शातिर अपराधियों ने नगर पर्षद के खाते से जुड़े गोपनीय जानकारियों को जुटा लिया. इस प्रक्रिया को न तो नगर पर्षद समझ पा रही है और न ही बैंक प्रबंधन को यह बात पल्ले पड़ रही है. इस दिशा में बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि कई बार साइबर क्राइम के जरिये राशि की फर्जी निकासी के खेल में खाताधारी को टेलीफोन करने वाले अपराधी कई डिटेल्स की जानकारी दे देते हैं.
ऐसी स्थिति में यह अब तक नहीं साफ हो पाया है कि आखिर खाताओं में गुप्त रहने वाली जानकारियां कैसे बाहर निकल रही हैं. नगर पर्षद से फर्जी निकासी के इस मामले में अपराधियों ने जिन तीन क्लोन चेकों का इस्तेमाल किया है, उसे मुंबई स्थित यूनाइटेड बैंक, यूनियन बैंक के साथ फेडरल बैंक की शाखा में क्लियरेंस के लिए डाला गया था. लेकिन, उक्त शाखाओं ने भुगतान के पहले चेक की पड़ताल करना उचित नहीं समझा. आखिरकार उक्त तीनों बैंकों द्वारा जमा की गयी चेक की राशि उसी बैंक की पटना शाखा में ट्रांसफर कर दी.
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