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उत्पीड़न से संबंधित शिकायत के लिए नोडल पदाधिकारी नामित

Updated at : 07 Sep 2019 1:11 AM (IST)
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उत्पीड़न से संबंधित शिकायत के लिए नोडल पदाधिकारी नामित

डीएम ने जिलास्तर पर स्थानीय शिकायत समिति का किया है गठन शिवहर : समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश के आलोक में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष ) अधिनियम 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के कार्यालय व कार्यस्थल जहां 10 से कम कर्मचारी […]

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डीएम ने जिलास्तर पर स्थानीय शिकायत समिति का किया है गठन

शिवहर : समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश के आलोक में कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध एवं प्रतितोष ) अधिनियम 2013 के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के कार्यालय व कार्यस्थल जहां 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हो.

वहां होने वाले लैंगिक उत्पीड़न के मामले एवं नियोक्ता के विरुद्ध लैंगिक उत्पीड़न के मामलों से संबंधित शिकायतें प्राप्त करने के लिए नोडल पदाधिकारी को नामित कर दिया गया है. शिकायतें प्राप्त करने के लिए प्रखंड स्तर पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी एवं शहरी क्षेत्र के लिए वार्ड परिषद को नोडल पदाधिकारी नामित किया गया है. नोडल पदाधिकारी अपने क्षेत्र के लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें प्राप्त करेंगे एवं सात दिनों के अंदर स्थानीय शिकायत समिति को अग्रसारित करेंगे. इधर जिला पदाधिकारी अरशद अजीज द्वारा जिला स्तर पर स्थानीय शिकायत समिति का गठन किया गया है. जिसके अध्यक्ष मृदुला देवी, सदस्य अर्चना कुमारी, रानी गुप्ता, मोहन कुमार एवं रानी कुमारी हैं.

लैंगिक उत्पीड़न में अवांछनीय कार्य व व्यवहार हैं शामिल : अधिनियम की धारा 2ढ़ के अनुसार लैंगिक उत्पीड़न में शारीरिक संपर्क व इसके लिए आगे बढ़ना अवांछनीय कार्य माना गया है. यौन स्वीकृति की मांग करना या अनुरोध करना, यौन रंजीत टिप्पणी करना, अश्लील चित्र या साहित्य दिखाना, यौन प्रकृति का कोई अन्य अवांछनीय, शारीरिक, शाब्दिक, गैर शाब्दिक आचरण, लैंगिक उत्पीड़न माना जाएगा. इसमें कार्रवाई का प्रावधान है.

नौकरी में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अधिमानता देने का वादा, नौकरी में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी, उसके वर्तमान या भविष्य के नियोजन की स्थिति के संबंध में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से धमकी, उसके कार्य में हस्तक्षेप अथवा भय का हानिकर या विपरीत कार्य वातावरण बनाना, उपहास पूर्ण व्यवहार जो उसके स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्रभावित करें.

लैंगिक उत्पीड़न माना जाएगा. लैंगिक उत्पीड़न की घटना के तीन माह के अंदर कोई भी महिला लिखित शिकायत समिति में कर सकती है. जहां ऐसी महिला लिखित आवेदन नहीं दे सके वहां समिति उस महिला को शिकायत दर्ज कराने के लिए संबंधित सभी सहयोग करेगी. जहां शारीरिक एवं मानिसक असमर्थता, मृत्यु अथवा अन्य कारणों से महिला स्वयं शिकायत नहीं कर सके. वहां उसका उत्तराधिकारी अथवा प्राधिकृत व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकेगा.

सात कार्यालयों में आंतरिक शिकायत समिति का किया जा चुका है गठन

डीपीओ आइसीडीएस सुचेता कुमारी के हवाले से डीपीएम महिला विकास निगम गौस अली हैदर ने बताया कि जिस कार्यालय में 10 महिलाएं काम करती है. वहां आंतरिक शिकायत समिति का गठन किया जा रहा है. इसके लिए 18 विभागों से आंतरिक शिकायत समिति गठन के लिए प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है. जिसके विरुद्ध सात कार्यालय में आंतरिक शिकायत समिति का गठन कर दिया गया है. जबकि शेष 11 विभागों में आंतरिक शिकायत समिति के गठन का कार्य जारी है.

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