तीज व्रत को लेकर बाजारों में बढ़ी चहल-पहल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Aug 2019 1:48 AM

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दो सितंबर को मनेगा तीज व्रत,पत्नियां मांगेंगी गौरीशंकर से पति की लंबी उम्र की दुआ शिवहर :पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं तीज व्रत कर भगवान शिव और महागौरी की पूजा-अर्चना करती हैं. तीज व्रत अागामी दो सितंबर को मनाया जायेगा. इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिविलंग […]

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दो सितंबर को मनेगा तीज व्रत,पत्नियां मांगेंगी गौरीशंकर से पति की लंबी उम्र की दुआ

शिवहर :पति की लंबी उम्र की कामना के लिए महिलाएं तीज व्रत कर भगवान शिव और महागौरी की पूजा-अर्चना करती हैं. तीज व्रत अागामी दो सितंबर को मनाया जायेगा. इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिविलंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं. पूजन में सुहाग की सभी सामग्री को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ाया जाता है.

जिसको लेकर बाजारों में चहल-पहल देखी जा रही है. तीज पर्व में महिलाओं के लिए हरी चूड़ियां, हरे वस्त्र पहनने,सोलह शृंगार करने और मेहंदी रचाने का विशेष महत्व है. इसलिए बुधवार को पूरे जिले में हर तरफ महिलाओं की टोली दुकानों पर पहुंच कर शृंगार आदि के सामानों की खरीदारी में जुट देखी गई. महंगाई के बावजूद भी मिठाई, फल आदि की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है.

पूजा करने का मुहूर्त दो को सुबह 6:27 बजे से 8:37 बजे तक एवं शाम 6:39 बजे से 8:56 बजे तक: शिवहर. राजलक्ष्मी सेवा संस्थान के आचार्य पंडित वेदप्रकाश शास्त्री की माने तो सोमवार दो सितंबर को ही तीज व्रत मनाया जाएगा.इससे पूर्व एक सितंबर को सुबह 11:02 बजे से दो सितंबर सुबह 9:02 बजे तक तृतीया तिथि रहेगी.हालांकि पूजा करने का मुहूर्त सुबह 6:27 बजे से 8:37 बजे तक एवं शाम 6:39 बजे से 8:56 बजे तक अच्छा हैं. वही तीन सितंबर को सूर्योदय के बाद महिलाएं कभी भी व्रत समाप्त कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि व्रत करने वाली स्त्रियां सूर्योंदय से पूर्व ही उठ जाती हैं.

स्नान कर पूरे सोलह शृंगार करती है. पूजन के लिए केले के पत्ते से मंडप बनाते हुए गौरीशंकर की प्रतिमा स्थापित कर माता पार्वती को सुहाग की सामान चढ़ाती हैं और रात को भजन, कीर्तन करते हुए जागरण कर आरती करती हैं. साथ में व्रतियां भगवान शिव व पार्वती के विवाह की कथा सुनती हैं. पंडित श्री शास्त्री ने कहा कि पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी.

इससे प्रसन्न होकर शिव ने तीज के दिन ही मां पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. अखंड सौभाग्य का प्रतीक यह तीज व्रत का त्योहार भारतीय परंपरा में पति व पत्नी के प्रेम को और प्रगाढ़ बनाने एवं आपस में श्रद्धा और विश्वास कायम रखने का त्योहार है. इसके आलावा यह पर्व पति व पत्नी को एक दूसरे के लिए त्याग करने का संदेश भी देता है.

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