धूमधाम से मनायी गयी डॉ सैमुअल हैनिमैन की जयंती

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धूमधाम से मनायी गयी डॉ सैमुअल हैनिमैन की जयंती

Sasaram news. डुमरांव रोड स्थित एक सभागार में शुक्रवार को होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन की जयंती धूमधाम से मनायी गयी. इस अवसर पर क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सकों की उपस्थिति रही.

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होम्योपैथिक चिकित्सा की उपयोगिता पर किया गया विचार फोटो -7- डॉ सैमुअल हैनिमन को याद करते होमियोपैथिक चिकित्सक. प्रतिनिधि, बिक्रमगंज डुमरांव रोड स्थित एक सभागार में शुक्रवार को होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन की जयंती धूमधाम से मनायी गयी. इस अवसर पर क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सकों की उपस्थिति रही, जिन्होंने डॉ हैनिमैन के जीवन, उनके योगदान और चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता पर विस्तार से विचार रखे. कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ जयप्रकाश सिंह ने डॉ हैनिमैन के सिद्धांतों को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि उनकी चिकित्सा प्रणाली सम जैसे सम से इलाज पर आधारित है, जो आज भी प्रभावशाली मानी जाती है. उन्होंने कहा कि होम्योपैथिक दवाएं शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं. डॉ शरदचंद संतोष ने कहा कि होमियोपैथिक में एक रोग का एक ही दवा होता है, जबकि अन्य पैथ में एक ही रोग के लिए कई दवाएं दे दी जाती हैं. हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए. डॉ मुकेश कुमार ने बताया कि डॉ हैनिमैन पहले एलोपैथिक चिकित्सक थे, लेकिन एक मरीज के इलाज में विफलता के बाद उन्होंने वैकल्पिक चिकित्सा की खोज शुरू की और होम्योपैथी का विकास किया. इसी शोध के माध्यम से उन्होंने एक ऐसी पद्धति दी जो आज करोड़ों लोगों को राहत पहुंचा रही है. डॉ आलोक कुमार ने कहा कि गठिया, बवासीर, ट्यूमर जैसी कई पुरानी और जटिल बीमारियाँ, जिनका एलोपैथ में स्थायी इलाज संभव नहीं, उनका उपचार होम्योपैथिक दवाओं से किया जा सकता है. यह पद्धति सुरक्षित, सस्ती और प्रभावशाली है. डॉ संतोष कुमार ने अपने वक्तव्य में कहा कि होम्योपैथी हर वर्ग के लिए सुलभ और उपयोगी बन चुकी है. कार्यक्रम के आयोजन में डॉ विकास कुमार, डॉ संतोष कुमार, डॉ युगल किशोर निराला, डॉ संत प्रसाद, डॉ बीके श्रीवास्तव सहित अन्य चिकित्सकों की भूमिका सराहनीय रही. यह जयंती समारोह केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि होम्योपैथी की उपयोगिता और समाज में इसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने का माध्यम बना. इस अवसर पर उपस्थित सभी चिकित्सकों ने डॉ हैनिमैन के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

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