विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म करने की नीति पर शिक्षक-कर्मी भड़के, रोहतास में 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश का ऐलान
अपनी मांगों के साथ कर्मी | Prabhat Khabar Network
बिक्रमगंज के कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने सरकार की प्रस्तावित नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया। 10 अगस्त को सामूहिक अवकाश की चेतावनी दी गई है।
Rohtas News : विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के स्वायत्त स्वरूप को समाप्त करने की सरकार की प्रस्तावित नीति के खिलाफ शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का विरोध लगातार जारी है. संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 5 से 8 अगस्त तक शिक्षक एवं कर्मी काला बिल्ला लगाकर अपने कार्यों का निष्पादन करते हुए विरोध दर्ज करा रहे हैं. शनिवार को ए.एस. कॉलेज, बिक्रमगंज में भी शिक्षक-कर्मियों ने प्रदर्शन कर सरकार की प्रस्तावित नीति के खिलाफ नाराजगी जतायी.
'स्वायत्तता से किसी कीमत पर समझौता नहीं'
शिक्षक नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय अपने गठन के समय से ही स्वायत्त रूप से कार्य करते रहे हैं. ये संस्थान महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति के अधीन संचालित होते हैं. ऐसे में राज्य सरकार द्वारा स्थापित परंपरा और स्वायत्त व्यवस्था को समाप्त करने की कोशिश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी.
प्रस्तावित नीति से प्रभावित होगी स्वतंत्र कार्यप्रणाली
शिक्षकों ने कहा कि सरकार की प्रस्तावित नीति लागू होने से शिक्षण संस्थानों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली प्रभावित होगी. उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए जरूरी है. इसलिए सरकार को प्रस्तावित नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए.
10 अगस्त को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे कर्मी
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर और सचिव डॉ. अनिल कुमार तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह और सचिव अक्षय कुमार प्यारे ने बताया कि संयुक्त संघर्ष मोर्चा के निर्देश पर 10 अगस्त को शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे.
आरा में धरना और कुलपति को सौंपेंगे ज्ञापन
शिक्षक नेताओं ने बताया कि सामूहिक अवकाश के दौरान सभी शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी विश्वविद्यालय मुख्यालय आरा पहुंचेंगे. वहां धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी और कुलपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा.
मांग नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
शिक्षक-कर्मियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि प्रस्तावित नीति वापस नहीं ली गयी और उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा.
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