उद्यमी योजना से लाभ लेकर सबेरा ट्रेडर्स ने 25 लोगों को दिये रोजगार

Published by :ANURAG SHARAN
Published at :14 May 2025 4:43 PM (IST)
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उद्यमी योजना से लाभ लेकर सबेरा ट्रेडर्स ने 25 लोगों को दिये रोजगार

Sasaram news. सासाराम शहर के युवा कुछ अलग सोच के साथ कुछ अलग करने लगे हैं. नौकरी के बजाय स्वरोजगार खड़ा कर दूसरों को रोजगार देने लगे हैं.

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गुड न्यूज. पढ़-लिख कर नौकरी के बजाय तैयार किया अपना स्वरोजगारगुजरात से मटेरियल मंगा कर बनो जाते हैं पत्तल, ग्लास, कटोरी व प्लेटफोटो-2- आलमगंज स्थित सबेरा ट्रेडर्स में काम करतीं महिलाएं.

ए- मटेरियल बनाने व कागज को लेमिनेट करने के लिए लगी मशीन.

बी- उद्यमी कुंदन कुमार.

सी- उद्यमी सबेरा जायसवाल.

जितेंद्र कुमार पासवान, सासाराम सदर

पहले शहर के युवा पढ़ाई करने के बाद नौकरी व अन्य रोजगार की तलाश में बाहर निकल जाते थे. वहीं, सरकारी या प्राइवेट नौकरी की तैयारी में सालों बर्बाद करते थे. सफलता नहीं मिलने पर पुन: निराश होकर घर लौट जाते थे. फिर मजदूरी या कृषि कार्य में लग जाते थे. लेकिन, अब शहर के युवा कुछ अलग सोच के साथ कुछ अलग करने लगे हैं. नौकरी के बजाय स्वरोजगार खड़ा कर दूसरों को रोजगार देने लगे हैं. इसके उदाहरण हैं शहर के आलमगंज मुहल्ला स्थित सबेरा ट्रेडर्स के संचालक कुंदन जायसवाल व सबेरा जायसवाल. ये दोनों लघु उद्योग के माध्यम से शहर के 25 परिवारों को रोजगार दे रहे हैं. उद्यमी कुंदन बताते हैं कि उनके पिता प्यारेलाल जायसवाल बहुत पहले से ही पहाड़ी से हरा पत्ता लाकर घर में मजदूरों से हरा पत्तल तैयार कराते थे, जिसे शहर के अलावा आस-पास के ग्रामीण बाजारों में सप्लाइ किया जाता था. अपने पिता के तर्ज पर दोनों बेटों ने पढ़ाई के बाद नौकरी की तैयारी करने के बजाय अपना उद्योग लगाने का निर्णय लिया. पिता के उद्योग में थोड़ा बदलाव किया. हरे पत्ते के अलावा पेपर प्लेट, दोना (कटोरी) निर्माण के लिए मशीन लगायी. कुंदन ने बताया कि हमारा काम अभी शुरू ही हुआ था कि वर्ष 2022 में कारखाने में भीषण आग लगी. सब कुछ जलकर बर्बाद हो गया. लेकिन, हमने हिम्मत नहीं हारी. इसी बीच प्रधानमंत्री उद्यमी योजना की जानकारी मिली. आवेदन किया. हमारा आवेदन स्वीकृत हो गया. लोन मिला और फिर से उद्योग शुरू किया गया. तीन वर्ष में पुन: हमारे काम ने रफ्तार पकड़ ली है.

10 परिवारों को दी गयी है मशीन

उद्यमी योजना से उद्योग फिर से शुरू किया गया. कारखाने में नयी मशीनें लगायी गयीं. बाजार की जानकारी पहले से थी, सो काम के रफ्तार पकड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा. वर्तमान में कारखाने में 15 लोग काम कर रहे हैं. इसके अलावा 10 परिवारों को हाथ से चलने वाली मशीनें दी गयी हैं. उन्हें प्रतिदिन सुबह में पत्तल तैयार करने का मटेरियल भेज दिया जाता है, जहां महिलाएं घर में ही पूरे दिन हाथ से पत्तल तैयार करती हैं. शाम में तैयार माल कारखाने में आ जाता है. उन्हें उचित पारिश्रमिक दे दिया जाता है.

गुजरात से आता है रॉ मटेरियल

पत्तल, ग्लास, कटोरी व प्लेट आदि तैयार करने के लिए कुछ पेपर और अन्य सामग्री गुजरात से मंगायी जाती है. पहले एक मशीन से पेपर पर प्लास्टिक का नॉमिनेशन किया जाता है. फिर साइज के हिसाब से पेपर कटिंग कर दूसरी मशीन से पत्तल तैयार किया जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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