रोहतास में खाद संकट की दस्तक, धान की खेती पर मंडराया खतरा, कृषि विभाग की तैयारी पर उठे सवाल

Published by : Sakshi kumari Updated At : 18 May 2026 2:40 PM

विज्ञापन

प्रतीकात्मक तस्वीर

रोहतास जिले में खरीफ मौसम के दौरान धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 10 से 11 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 7 से 7.5 हजार मीट्रिक टन फास्फेटिक उर्वरक, 6 हजार मीट्रिक टन एनपीकेएस और लगभग 500 मीट्रिक टन एमओपी की जरूरत पड़ती है.

विज्ञापन

Rohtas News: (रोहतास से संतोष चंद्र कांत) सूबे के “धान का कटोरा” कहे जाने वाले रोहतास जिले में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही खाद संकट की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन रासायनिक खाद की संभावित कमी और प्राकृतिक खेती को लेकर कमजोर तैयारी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

खरीफ सीजन से पहले बढ़ी किसानों की बेचैनी

किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग केवल कागजी तैयारी में जुटा है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं. धान की खेती में प्रति एकड़ करीब 50 किलो डीएपी, 45 से 50 किलो यूरिया के साथ पोटाश और जिंक का भी उपयोग होता है. इतनी भारी मांग के बीच इस बार खाद उपलब्धता को लेकर किसानों में संशय बना हुआ है.

प्राकृतिक खेती की बात लेकिन जमीनी हकीकत नहीं

प्रधानमंत्री द्वारा लगातार जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील की जा रही है. इसके बावजूद रोहतास जिले में इसकी तैयारी बेहद कमजोर नजर आ रही है. कृषि विभाग द्वारा बीते वर्ष केवल 22 किसानों को जैविक खाद निर्माण के लिए प्रति यूनिट 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई थी. इतने सीमित प्रयासों के कारण अधिकांश किसान आज भी पूरी तरह यूरिया और डीएपी पर निर्भर बने हुए हैं.

कृषि विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल

संभावित खाद संकट को लेकर कृषि विभाग की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. बिक्रमगंज अनुमंडल कृषि पदाधिकारी से जब खाद उपलब्धता और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया. वहीं जिला कृषि पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर गंभीर नजर नहीं आए. किसानों का कहना है कि विभागीय स्तर पर केवल कागजी तैयारी की जा रही है, जबकि खेतों में संकट की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है.

समय रहते व्यवस्था नहीं हुई तो बढ़ सकती है परेशानी

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते खाद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई तो खरीफ सीजन में खेती प्रभावित हो सकती है. धान उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका से किसान पहले से ही चिंतित हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में अब खाद की उपलब्धता और प्राकृतिक खेती को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

Also Read: कैमूर का कृष्ण मुरारी परिवार हत्याकांड, शव के टुकड़े कर 15 KM तक फेंके अवशेष, रूह कंपा देगा खुलासा

विज्ञापन
Sakshi kumari

लेखक के बारे में

By Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन