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रोहिणी बरसे मृग तवे, कुछ-कुछ आदरा जाए, इतना होत बरसा, स्वान भात न खाय

Updated at : 09 Jun 2024 10:27 PM (IST)
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रोहिणी बरसे मृग तवे, कुछ-कुछ आदरा जाए, इतना होत बरसा, स्वान भात न खाय

रोहिणी नक्षत्र सात जून को समाप्त हो गया. 25 मई से सात जून के बीच रोहिणी नक्षत्र में हल्की बारिश और आंधी से मौसम थोड़ा सामान्य रहा.

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पुनीत कुमार पांडेय. रोहिणी नक्षत्र सात जून को समाप्त हो गया. 25 मई से सात जून के बीच रोहिणी नक्षत्र में हल्की बारिश और आंधी से मौसम थोड़ा सामान्य रहा. लेकिन, अब दो दिनों से मृगडाह तप रहा है. अगर मृगडाह 10 दिनों तक तप गया, तो अच्छी बारिश होगी, यह लगभग तय है. इस तरह के मौसम के अनुमान में हमारे किसान किसी कृषि वैज्ञानिक से कम नहीं हैं. हालांकि, मौसम का पूर्वानुमान एक जटिल प्रक्रिया है. कारण कि मौसम के तत्व व किसी स्थान में उनकी स्थिति अत्यधिक परिवर्तनशील होती है. मौसम की भविष्यवाणी के लिए कोई सामान्य सिद्धांत विकसित नहीं किया जा सका है. न ही मौसम की भविष्यवाणी बिल्कुल सटीक हो पाती है. इस बीच, हाल के वर्षों में मौसम वैज्ञानिक कुछ सटीक भविष्यवाणी करने लगे हैं. लेकिन, वैज्ञानिक मशीनों से बहुत पहले कृषि पंडित घाघ (ये कौन थे, इसका सही विवरण कही नहीं मिलता) ने कहावतों के रूप में मौसम की भविष्यवाणी की है, जो अब भी सटीक बैठती है. उनकी कहावतों में पशु-पक्षियों के व्यवहार, बादलों के स्वरूप, हवा के रुख व जलस्रोतों के घटाव-बढ़ाव से मौसम की सटीक भविष्यवाणी की गयी है. वैसे देखा जाये, तो भौगोलिक जानकार मौसम का मात्र आकलन प्रस्तुत करते हैं. लेकिन, गांवों में अब भी घाघ की कहावतों के अनुरूप किसान मौसम की भविष्यवाणी करते हैं और वह बहुत हद तक सटीक बैठती है. कृषि पंडित व महाकवि घाघ ने खेती को उत्तम माना है. तभी तो कहा है कि उत्तम खेती, मध्यम बान, निषिद्ध चाकरी, भीख निदान. किसी मानव के लिए खेती सबसे अच्छा कार्य है. कारोबार करना मध्यम कार्य है और नौकरी सबसे निकृष्ट कार्य है. घाघ ने भीख को जीवन का अंतिम उपाय माना है. कृषि के लिए मौसम की भविष्यवाणी में घाघ कहते हैं कि रोहिणी बरसे मृग तवे, कुछ-कुछ आदरा जाये. कहे घाघ सुन भंडारी, स्वान भात न खाये. यदि रोहिणी नक्षत्र में वर्षा हो जाये और मृगडाह नक्षत्र में खूब तपन हो, तो आर्द्र्रा नक्षत्र में अधिक वर्षा होती है और धान की पैदावार भी खूब होने की संभावना बन जाती है. धान इतना हो जाता है कि कुत्ता भी भात को नहीं पूछता है. वहीं, घाघ ने कहा है कि वायु चलेगी उत्तरा, मांड़ पियेंगे कुत्ता. इसी नक्षत्र में उत्तर से हवा चले, तो धान की पैदावार कम होगी और कुत्तों को भात नसीब नहीं होगा, उन्हें मांड पीकर गुजारा करना होगा. वर्तमान में जिले में मौसम की स्थिति का अनुमान घाघ की कहावतों से किसान लगाने लगे हैं. वृद्ध दारोगा बिंद, श्याम बिहारी तिवारी कहते हैं कि अभी दो दिनों से मृगडाह तप रहा है. अगर मृगडाह 10 दिनों तक तप गया, तो अच्छी बारिश होना तय है. बारिश अच्छी होगी, तो धान की उपज भी अच्छी होगी. भंडार भरेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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