रोहतास की गलियों से UPSC तक का सफर, CBI में बड़ा पद और 25 साल बाद अपने गांव लौटे; IPS राजीव रंजन की कहानी युवाओं को देगी प्रेरणा
सांकेतिक तस्वीर
सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर आईपीएस राजीव रंजन ने अपने पैतृक गांव में घर बनाकर ग्रामीण युवाओं के लिए सफलता की नई मिसाल पेश की है। जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी।
Success Story : जब किसी गांव का बेटा सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कर देश की सर्वोच्च सेवाओं में पहुंचता है और वर्षों बाद भी अपनी मिट्टी से जुड़ा रहता है, तो उसकी सफलता पूरे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाती है. करगहर प्रखंड के बड़हरी थाना क्षेत्र के एमनडिहरी गांव निवासी आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन इसकी मिसाल हैं. गांव में बचपन बिताने वाले राजीव रंजन ने करीब 25 वर्ष बाद अपने पैतृक गांव में नया घर बनवाया है. सोमवार को उन्होंने वैदिक रीति-रिवाज के साथ गृह प्रवेश और पूजा-अर्चना करायी. इस अवसर पर गांव और आसपास के कई गांवों के लोग शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया.
गांव से शुरू हुई पढ़ाई, UPSC में हासिल की सफलता
राजीव रंजन स्वर्गीय मुरलीधर प्रसाद के पुत्र हैं. उनका बचपन एमनडिहरी गांव में ही बीता और प्रारंभिक शिक्षा भी उन्होंने गांव से ही प्राप्त की. उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने वर्ष 2005 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी बने. बचपन से ही स्वतंत्र विचारों वाले राजीव रंजन ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर गांव से निकलकर देश की प्रतिष्ठित सेवा में स्थान बनाया.
CBI में बिहार-झारखंड के ज्वाइंट डायरेक्टर हैं राजीव रंजन
आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में बिहार-झारखंड के ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई चर्चित मामलों और घोटालों की जांच में जिम्मेदारी निभायी है. उनके कार्यक्षेत्र में चारा घोटाला, चिटफंड और अवैध खनन से जुड़े मामलों सहित कई महत्वपूर्ण जांच शामिल रही हैं. इन मामलों में उन्होंने जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.
25 साल बाद गांव में बनाया अपना घर
सरकारी सेवा में रहते हुए करीब 25 वर्षों के बाद राजीव रंजन ने अपने पैतृक गांव एमनडिहरी में घर बनवाया है. गृह प्रवेश के दौरान गांव के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला. ग्रामीणों का कहना है कि देश की प्रतिष्ठित सेवा में पद हासिल करने के बाद भी राजीव रंजन का गांव से जुड़ाव युवाओं के लिए बड़ी सीख है.
राजीव रंजन ने कहा कि उनके माता-पिता को गांव से काफी लगाव था. उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि उनकी मां अभी जीवित हैं. उन्होंने कहा कि गांव में बनाया गया उनका घर अपनी मां को समर्पित है.
'सीमित संसाधनों में भी हासिल की जा सकती है सफलता'
एमनडिहरी निवासी ललन चौबे राजीव रंजन को अपना अभिभावक मानते हैं. उन्होंने कहा कि राजीव रंजन का गांव में घर बनाना पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है. गांव की तंग गलियों से निकलकर UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर देश की सर्वोच्च सेवाओं में पहुंचना यह साबित करता है कि सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते.
उन्होंने कहा कि राजीव रंजन जैसे अधिकारी ग्रामीण युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं. ऐसे युवाओं को पढ़ाई, अनुशासन और सही दिशा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि गांव में उनकी मौजूदगी से नई पीढ़ी में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति रुचि और बढ़ेगी.
युवाओं के लिए बन सकते हैं मार्गदर्शक
ग्रामीणों का कहना है कि गांव से निकलकर बड़े पदों तक पहुंचे अधिकारी जब अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है. राजीव रंजन की सफलता भी गांव के बच्चों और युवाओं को यह संदेश देती है कि मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. उनके पैतृक गांव में घर बनाने से ग्रामीणों में भी खुशी है और युवाओं को उनसे मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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