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सूर्यपुरा के तत्कालीन बीइओ देवनाथ सिंह पर बड़ी कार्रवाई

Updated at : 23 Jan 2025 10:03 PM (IST)
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सूर्यपुरा के तत्कालीन बीइओ देवनाथ सिंह पर बड़ी कार्रवाई

सासाराम न्यूज : पेंशन से 10 फीसदी राशि कटौती का आदेश

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सासाराम न्यूज : पेंशन से 10 फीसदी राशि कटौती का आदेश

बिक्रमगंज.

वर्ष 2013 से लेकर 2019 तक सबसे लंबी अवधि तक सूर्यपुरा और दावथ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के तौर पर कार्यरत रहे देवनाथ सिंह पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. सूर्यपूरा प्रखंड के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीइओ) देवनाथ सिंह के खिलाफ शिक्षा विभाग के सचिव बैजनाथ यादव ने आदेश जारी किया है. आदेश में देवनाथ सिंह की पेंशन से 10 फीसदी कटौती अगले पांच वर्षों तक करने का निर्देश दिया है. यह कदम माननीय लोकायुक्त के निर्देश के तहत उठाया गया है. उन्हें कर्तव्य में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं का दोषी पाया गया.

वायरल हो रहे शिक्षा विभाग के पत्र के अनुसार, देवनाथ सिंह पर आरोप था कि उन्होंने बिना आवश्यक पात्रता प्रमाणपत्र के बिनोद कुमार सिंह नामक शिक्षक को प्रशिक्षित शिक्षक मानते हुए वेतन व प्रशिक्षित मानदेय का भुगतान किया. उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अन्य शिक्षकों को भी नियुक्ति दी और उनका वेतन भुगतान किया. जांच में यह भी सामने आया कि डीएलएड प्रमाण पत्र नहीं होने के बावजूद बिनोद कुमार को प्रशिक्षित मानते हुए उन्हें वेतन और मानदेय का भुगतान किया गया. विभागीय जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि देवनाथ सिंह ने लोकायुक्त के आदेश के बावजूद बिनोद कुमार से अवैध भुगतान की राशि वसूलने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की.

जांच के बाद की गयी कार्रवाई

इस मामले में बिहार प्रदेश भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह ने लोकायुक्त के समक्ष परिवाद दायर किया था. लोकायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया. जांच और सुनवाई के बाद दोष सिद्ध होने पर देवनाथ सिंह के खिलाफ पेंशन कटौती का आदेश जारी किया गया.

आदेश की प्रमुख बातें

शिक्षा विभाग के सचिव बैजनाथ यादव ने आदेश में स्पष्ट किया कि देवनाथ सिंह की सेवा अवधि के दौरान की गयी अनियमितताओं के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है. यह कार्रवाई विभागीय संहिता और बिहार पेंशन नियमावली 2005 के तहत की गयी है. हालांकि, देवनाथ सिंह ने अपने बचाव में अपील दायर कर पक्ष रखा था, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया. जांच में पाया गया कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों का वेतन भुगतान उनकी मंजूरी से हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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