गैस की किल्लत से बढ़ी परेशानी, लकड़ी-कोयले के चूल्हे और इंडक्शन पर बढ़ी निर्भरता

Published by : karunatiwari Updated At : 17 May 2026 10:02 AM

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गैस की किल्लत से बढ़ी परेशानी

Saran News: रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं. स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर का इंतजार करने वाले लोग अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे और कोयले का सहारा ले रहे हैं.

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Saran News: (अमित कुमार की रिपोर्ट) रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं. स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर का इंतजार करने वाले लोग अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे और कोयले का सहारा ले रहे हैं. गैस की कमी के कारण रसोई घर का स्वरूप बदल गया है और खानपान की आदतों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है.

केस स्टडी 01: बच्चों की सेहत पर असर

गैस की किल्लत का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सुबह जल्दी स्कूल जाने की जल्दबाजी में कई बच्चे बिना पौष्टिक नाश्ते के घर से निकल जाते हैं। घर में गैस उपलब्ध न होने के कारण अभिभावक समय पर टिफिन तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बच्चे स्कूल में पास्ता, मैगी, बिस्कुट, चिप्स और कुरकुरे जैसे फास्ट फूड पर निर्भर हो गए हैं। इसका प्रतिकूल असर उनके स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है. कई बच्चों में पेट दर्द, उल्टी और चक्कर जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं.

केस स्टडी 02: निजी स्कूलों की परेशानी

प्रखंड के निजी स्कूल संचालकों को भी रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ए. के. अंसारी, निदेशक होली ट्रिनिटी मिशन स्कूल, दिघवारा ने बताया कि बच्चे बिना नाश्ता किए स्कूल पहुंचते हैं और टिफिन में पौष्टिक भोजन की कमी रहती है। गैस की अनुपलब्धता के कारण अभिभावक बच्चों को उचित भोजन नहीं दे पा रहे हैं, जिससे कई बार बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें स्कूल से घर भेजना पड़ता है।

केस स्टडी 03: सरकारी स्कूलों में भी असर

सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) के भरोसे बच्चे स्कूल आते हैं, लेकिन कई बार सुबह खाली पेट आने के कारण बच्चों की तबीयत खराब हो जाती है। ऐसे मामलों में शिक्षकों को बच्चों को घर भेजना पड़ता है। अभिभावक भी गैस की कमी के कारण सुबह का नाश्ता उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रहे हैं।

केस स्टडी 04: होटल और रेस्टोरेंट पर असर

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में वृद्धि के कारण कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। जो दुकानें किसी तरह चल रही हैं, वहां चाट, चाउमीन, पिज्जा, बर्गर और एग रोल जैसे फास्ट फूड के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

केस स्टडी 05: वैवाहिक आयोजनों पर असर

गैस की कमी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी पड़ रहा है। पहले जहां आसानी से गैस उपलब्ध हो जाती थी, अब आयोजकों को लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इस स्थिति में हलवाई की दरों में भी डेढ़ से दो गुना तक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे शादी समारोहों का कुल खर्च बढ़ गया है।

केस स्टडी 06: वैकल्पिक साधनों की बढ़ी मांग

गैस की कमी के कारण लोग अब लकड़ी, कोयला और इंडक्शन चूल्हे की ओर रुख कर रहे हैं। लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से इनके दाम में भी तेजी आई है। लकड़ी अब 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। वहीं, बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

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करुणा तिवारी बिहार के आरा, वीर कुंवर सिंह की धरती से आती हैं। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की। 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है। अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं, ताकि सशक्त और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक सच्चाई पहुंचा सकें।

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