गैस की किल्लत से बढ़ी परेशानी, लकड़ी-कोयले के चूल्हे और इंडक्शन पर बढ़ी निर्भरता

Updated:
विज्ञापन
saran news

गैस की किल्लत से बढ़ी परेशानी

Saran News: रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं. स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर का इंतजार करने वाले लोग अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे और कोयले का सहारा ले रहे हैं.

विज्ञापन

Saran News: (अमित कुमार की रिपोर्ट) रसोई गैस की किल्लत ने आम लोगों की परेशानियां काफी बढ़ा दी हैं. स्थिति यह है कि गैस सिलेंडर का इंतजार करने वाले लोग अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे और कोयले का सहारा ले रहे हैं. गैस की कमी के कारण रसोई घर का स्वरूप बदल गया है और खानपान की आदतों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है.

केस स्टडी 01: बच्चों की सेहत पर असर

गैस की किल्लत का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। सुबह जल्दी स्कूल जाने की जल्दबाजी में कई बच्चे बिना पौष्टिक नाश्ते के घर से निकल जाते हैं। घर में गैस उपलब्ध न होने के कारण अभिभावक समय पर टिफिन तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बच्चे स्कूल में पास्ता, मैगी, बिस्कुट, चिप्स और कुरकुरे जैसे फास्ट फूड पर निर्भर हो गए हैं। इसका प्रतिकूल असर उनके स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है. कई बच्चों में पेट दर्द, उल्टी और चक्कर जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं.

केस स्टडी 02: निजी स्कूलों की परेशानी

प्रखंड के निजी स्कूल संचालकों को भी रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ए. के. अंसारी, निदेशक होली ट्रिनिटी मिशन स्कूल, दिघवारा ने बताया कि बच्चे बिना नाश्ता किए स्कूल पहुंचते हैं और टिफिन में पौष्टिक भोजन की कमी रहती है। गैस की अनुपलब्धता के कारण अभिभावक बच्चों को उचित भोजन नहीं दे पा रहे हैं, जिससे कई बार बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें स्कूल से घर भेजना पड़ता है।

केस स्टडी 03: सरकारी स्कूलों में भी असर

सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (MDM) के भरोसे बच्चे स्कूल आते हैं, लेकिन कई बार सुबह खाली पेट आने के कारण बच्चों की तबीयत खराब हो जाती है। ऐसे मामलों में शिक्षकों को बच्चों को घर भेजना पड़ता है। अभिभावक भी गैस की कमी के कारण सुबह का नाश्ता उपलब्ध कराने में असमर्थता जता रहे हैं।

केस स्टडी 04: होटल और रेस्टोरेंट पर असर

कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी और कीमतों में वृद्धि के कारण कई छोटे-बड़े रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। जो दुकानें किसी तरह चल रही हैं, वहां चाट, चाउमीन, पिज्जा, बर्गर और एग रोल जैसे फास्ट फूड के दाम बढ़ा दिए गए हैं, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

केस स्टडी 05: वैवाहिक आयोजनों पर असर

गैस की कमी का असर शादी-विवाह जैसे आयोजनों पर भी पड़ रहा है। पहले जहां आसानी से गैस उपलब्ध हो जाती थी, अब आयोजकों को लकड़ी या कोयले के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। इस स्थिति में हलवाई की दरों में भी डेढ़ से दो गुना तक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे शादी समारोहों का कुल खर्च बढ़ गया है।

केस स्टडी 06: वैकल्पिक साधनों की बढ़ी मांग

गैस की कमी के कारण लोग अब लकड़ी, कोयला और इंडक्शन चूल्हे की ओर रुख कर रहे हैं। लकड़ी और कोयले की मांग बढ़ने से इनके दाम में भी तेजी आई है। लकड़ी अब 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। वहीं, बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों की बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

ALSO READ: अकिलपुर और नयागांव विद्युत सबस्टेशनों में सोमवार को तीन घंटे बाधित रहेगी बिजली आपूर्ति

विज्ञापन
करुणा तिवारी

लेखक के बारे में

By करुणा तिवारी

करुणा तिवारी पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और टीवी तथा डिजिटल मीडिया दोनों में व्यापक अनुभव रखती हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन बिहार (Doordarshan Bihar) से की, जहां समाचारों की प्रस्तुति, रिपोर्टिंग और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर काम करते हुए उन्होंने पत्रकारिता की मजबूत नींव तैयार की. इसके बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर कदम बढ़ाया और बदलते न्यूज़ इकोसिस्टम के अनुरूप खुद को लगातार विकसित किया.

वर्तमान में करुणा तिवारी प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह बिहार की राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, मौसम,पर्यटन और समसामयिक मुद्दों पर तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं फीचर लेख तैयार करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर केवल सूचना तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को उसका व्यापक संदर्भ और प्रभाव भी समझा सके.

डिजिटल पत्रकारिता में SEO-फ्रेंडली कंटेंट के अनुरूप समाचार लेखन और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए आकर्षक एवं उपयोगी कंटेंट लिखती है. वे समाचारों के लिए प्रभावशाली हेडलाइन, सटीक सबहेडिंग और पाठकों की जरूरत के अनुरूप सरल एवं स्पष्ट भाषा का उपयोग करती हैं. समयबद्धता, तथ्यों की पुष्टि और निष्पक्षता उनके कार्य की प्रमुख विशेषताएं हैं.

इन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों पर काम करना पसंद है. चुनावी गतिविधियों, सरकारी योजनाओं, स्थानीय समस्याओं और आम लोगों से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी नजर रहती है. उनका मानना है कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को सही, संतुलित और भरोसेमंद जानकारी उपलब्ध कराना भी है.

लगातार सीखने और खुद को बेहतर बनाने की सोच के साथ करुणा तिवारी आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता की नई तकनीकों और ट्रेंड्स को अपनाते हुए पाठकों तक गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय कंटेंट पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन