सारण के 40 मौत वाले मोड़ बन रहे लगातार हादसों की वजह, इन ब्लैक स्पॉटस पर कब जागेगा सिस्टम?
Published by : karunatiwari Updated At : 14 May 2026 10:56 AM
सारण के 40 ब्लैक स्पॉटस
Saran News: सारण जिले में सड़क हादसे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम अब भी अधूरे हैं. जिले में इस समय 40 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गये हैं, जिनमें 12 ऐसे स्थान हैं जहां दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक है.
Saran News: सारण जिले में सड़क हादसे लगातार लोगों की जान ले रहे हैं, लेकिन ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा इंतजाम अब भी अधूरे हैं. जिले में इस समय 40 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गये हैं, जिनमें 12 ऐसे स्थान हैं जहां दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक है. इसके बावजूद सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है.
सबसे ज्यादा हादसे उन स्टेट हाइवे और ग्रामीण संपर्क पथों पर हो रहे हैं, जो नेशनल हाइवे से जुड़ते हैं. यहां वाहन चालक सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जबकि प्रशासनिक स्तर पर जरूरी इंतजाम नदारद हैं.
अंधे मोड़, बिना साइन बोर्ड और बेतहाशा रफ्तार बन रही जानलेवा
ब्लैक स्पॉट वाले अधिकतर इलाकों में अंधे मोड़ और डिवाइडर के पास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं. सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी रेडियम युक्त साइन बोर्ड भी गायब हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार तीखे मोड़ों पर डिवाइडर लगाकर वाहनों की स्पीड नियंत्रित करने की जरूरत है. जब तक स्पीड कंट्रोल और चेतावनी संकेतों की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक हादसों पर रोक लगाना मुश्किल होगा.
एनएच और एसएच पर पेट्रोलिंग का अभाव बढ़ा रहा खतरा
नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे पर नियमित पुलिस पेट्रोलिंग नहीं होने से भी सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं. हालांकि डीएम और एसएसपी समय-समय पर सड़क सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित नजर आता है.
शहरी इलाकों के अलावा चिन्हित दुर्घटना स्थलों पर पुलिस गश्ती बेहद जरूरी मानी जा रही है. एसपी विनीत कुमार ने सभी थानाध्यक्षों को एनएच और एसएच पर नियमित गश्ती का निर्देश दिया है. कई जगहों पर बैरिकेडिंग और साइन बोर्ड लगाए भी गए हैं, लेकिन इसके बावजूद चालकों में जागरूकता की कमी साफ दिख रही है.
ये हैं सारण के सबसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट
- फोरलेन, दिघवारा
- डुमरी फोरलेन, डोरीगंज
- मानपुर, दरियापुर
- टेकनिवास मोड़
- छपरा-गड़खा हाइवे
- फुलवरिया मोड़, मकेर
- गड़खा-मानपुर रोड
- भेल्दी मोड़
- नेवाजी टोला फ्लाइओवर
- मेथवलिया फोरलेन मोड़
- दाऊदपुर बनवार ओवरब्रिज
आखिर क्यों नहीं थम रहे सड़क हादसे?
जिले में सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने के पीछे कई बड़ी वजहें सामने आ रही हैं. प्रमुख कारणों में साइन मार्क का नहीं होना, ओवरटेकिंग, तेज रफ्तार, चमकीले रेडियम संकेतों की कमी और तीखे मोड़ों पर स्पीड कंट्रोल नहीं होना शामिल है. इसके अलावा सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता की कमी भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है.
सवाल बड़ा है, जवाब कौन देगा?
सवाल यह है कि जब ब्लैक स्पॉट पहले से चिन्हित हैं, तो फिर वहां सुरक्षा के स्थायी इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहे? आखिर कब तक लोग इन मौत वाले मोड़ों पर अपनी जान गंवाते रहेंगे? सड़क सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार विभागों की सुस्ती अब सीधे लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ती दिख रही है.
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करुणा तिवारी बिहार के आरा, वीर कुंवर सिंह की धरती से आती हैं। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की। 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है। अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं, ताकि सशक्त और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक सच्चाई पहुंचा सकें।
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