पीएचडी कोर्स वर्क और रिसर्च में आंशिक रूप से बदला सिलेबस

Updated at : 17 Aug 2024 9:47 PM (IST)
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पीएचडी कोर्स वर्क और रिसर्च में आंशिक रूप से बदला सिलेबस

जयप्रकाश विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग ने पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी किया है. निर्धारित शेड्यूल के अनुसार 22 अगस्त तक सभी पीजी विभागों में फॉर्म भरा जायेगा.

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छपरा. जयप्रकाश विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग ने पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी किया है. निर्धारित शेड्यूल के अनुसार 22 अगस्त तक सभी पीजी विभागों में फॉर्म भरा जायेगा. फॉर्म भरने का शेड्यूल जारी होते ही कोर्स वर्क में नामांकित छात्र-छात्राएं परीक्षा की तैयारी में भी जुट गये हैं. कोर्स वर्क में नामांकन के बाद छात्रों को पीएचडी के सिलेबस में कई बदलावों से गुजरना पड़ा है. विवि ने वर्ष 2022 में ही संशोधित सिलेबस लागू किया है. यूजीसी के निर्देशानुसार पीएचडी के सिलेबस में अधिकतम 20 प्रतिशत तक का बदलाव किया जा सकता था. जिसे ध्यान में रखते हुए जनरल स्टडीज के तहत रिसर्च एंड मैथोलॉजी तथा कंप्यूटर प्रशिक्षण के सिलेबस में बदलाव हुआ है. वहीं कोर्स वर्क की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रिसर्च अवधि में भी पिछले सत्रों की तुलना में कई नये बदलाव के साथ छात्र-छात्राएं अपना शोध पूर्ण करेंगे.

दो सेमिनार व सिंपोजियम में शामिल होना जरूरी

विदित हो कि शोध पाठ्यक्रम में नामांकन के बाद छह माह का कोर्स वर्क होता है. कोर्स वर्क पूरा होने के बाद परीक्षा होती है. जिसमें उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं गाइड के निर्देशन में सिनॉप्सिस तैयार करेंगे. सिनॉप्सिस तैयार होने के बाद उसे पहले डिपार्टमेंटल रिसर्च काउंसिल में अप्रूव कराना होगा. विभाग से सिनॉप्सिस अप्रूव होने के बाद उसे पीजीआरसी में भेजा जायेगा. पीजीआरसी की बैठक में सिनॉप्सिस की जांच होगी. पीजीआरसी से अप्रूव होने के बाद विभाग स्तर पर सिंपोजियम व सेमिनारों का आयोजन होगा. अधिकतम दो सेमिनार में शामिल होने वाले छात्रों का साक्षात्कार होगा. जिस प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद उन्हें उपाधि दी जायेगी.

अब शोध आलेखों की जांच सॉफ्टवेयर से होगी

यूजीसी ने जेपीयू को शोध एवं शैक्षणिक आलेखों में की गयी साहित्यिक चोरी की जांच के लिये एंटी प्लेगेरिज्म सॉफ्टवेयर उपयोग करने के लिए अधिकृत किया है. इस सॉफ्टवेयर के उपयोग से विश्वविद्यालय में हो रहे अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ेगी. वहीं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य में आसानी होगी साथ ही शोधार्थी को भी परेशानी नहीं होगी. विदित हो कि एंटी प्लेगेरिज्म लागू करने से सम्बंधित रेगुलेशन को 2018 में ही यूजीसी ने जारी किया था. एंटी प्लेगेरिज्म लागू होने के बाद विश्वविद्यालय में ही शोध ग्रंथ चेक हो सकेगा. विवि स्तर पर पूर्व में कोई भी सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं था जो किसी शोध कार्य में से साहित्यिक चोरी को पकड़ा जा सके.

पीजी के 17 विभागों में भरा जा रहा है फॉर्म

पीएचडी कोर्स वर्क के अंतर्गत विज्ञान, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान व मानविकी के अंतर्गत भौतिकी, रसायन शास्त्र, गणित, जूलॉजी, बॉटनी, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, इतिहास, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान, भूगोल, वाणिज्य व गृह विज्ञान विभाग में परीक्षा फॉर्म भरा जा रहा है.

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