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Chhapra News : कांस्टेबल और दारोगा बनने के लिए मैदान में रोज घंटों पसीना बहा रहीं बेटियां

Updated at : 10 Jan 2025 10:07 PM (IST)
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Chhapra News : कांस्टेबल और दारोगा बनने के लिए मैदान में रोज घंटों पसीना बहा रहीं बेटियां

Chhapra News : राजेंद्र कॉलेज के मैदान में सुबह चार बजे सीटियों की आवाज के साथ महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की भारी भीड़ ट्रैक पर जुट जाती है. इसके बाद 500 मीटर लंबे जॉगिंग ट्रैक पर ये अभ्यर्थी रोज चार से आठ राउंड लगाती हैं.

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छपरा. ‘परों को खोल जमाना उड़ान देखता है. जमीन पर बैठकर क्या आसमान देखता है’ शहर के राजेंद्र कॉलेज के मैदान में अहले सुबह चार बजे से लेकर सुबह सात बजे तक हर दिन पसीना बहाने वाली सारण प्रमंडल की बेटियां उन लोगों को सीख दे रही हैं, जो घर बैठे हैं बड़े-बड़े ख्वाब बुनते हैं, और उनका ख्वाब कभी सफल नहीं होता जबकि इनके कुनबे के सैकड़ों बेटियों ने मेहनत के बल पर नौकरी पाने के ख्वाब को पूरा कर लिया है और अभी भी सैकड़ों की संख्या में बेटियां अपने किस्मत की इबारत खुद लिख रही हैं. नौकरी को हर हाल में लेने की जज्बा के तहत मेहनत कर रही है.

तीन महीने से चल रही है प्रैक्टिस

राजेंद्र कॉलेज के मैदान में सुबह चार बजे सीटियों की आवाज के साथ महिला और पुरुष अभ्यर्थियों की भारी भीड़ ट्रैक पर जुट जाती है. इसके बाद 500 मीटर लंबे जॉगिंग ट्रैक पर ये अभ्यर्थी रोज चार से आठ राउंड लगाती हैं. फिजिकल ट्रेनर मिंटू कुमार, मेडिकल डॉक्टर अनिल कुमार और अन्य सहयोगी ट्रेनर सबसे पहले वार्म अप, साइड स्ट्रेचिंग, सोल्डर वीक राउंड, लेग स्ट्रेच, सोल्डर राउंड, हलका जंपिंग, थाई जंपिंग, साइड जंपिंग, कमर राउंड, बैक राउंड, हेड राउंड, साइड हेड राउंड, अप-डाउन बॉडी, कमर राउंड लेफ्ट-राइट सुमित अन्य एक्सरसाइज कराते हैं. स्थानीय लोगों में राजेश कुमार सिंह और अनूप कुमार ने बताया कि ट्रेनिंग का यह सिलसिला तीन महीने से चल रहा है. ट्रेनर मिंटू कुमार ने बताया कि इसके पहले 110 से अधिक अभ्यर्थी दरोगा और बिहार पुलिस में चयनित हो चुके हैं और सारण का मान सम्मान बढ़ाया है. हम सोच सकते हैं कि केवल यह राजेंद्र कॉलेज में यह स्थिति है तो सारण में कई जगहों पर इस तरह की ट्रेनिंग लड़कियां प्राप्त कर रही हैं और दावे के साथ नौकरी भी प्राप्त कर रही हैं.

पैर और हाथ में चोट, किसी को मोच बावजूद नौकरी पाने का जज्बा कम नहीं

प्रभात खबर के संवाददाता शुक्रवार की सुबह जब राजेंद्र कॉलेज के मैदान में पहुंचे तब एक लड़की लंगड़ाती हुई मैदान तक पहुंची थी, पूछने पर बताया कि पैर में मोच है, पर कोई बात नहीं यह हर दो-तीन दिन में हो जाता है दर्द सहने की आदत सी हो गयी है, नौकरी मिल जाएगी सब सार्थक हो जाएगा. इसी तरह टेक करने अभ्यर्थी जिसके घुटने में चोट लगी थी, पता चला उसके पैर की नसों में खिंचाव है. अभ्यर्थी ने कहा कमर से लेकर पैर तक दर्द है फिर भी प्रेक्टिस नहीं छोडूंगी. अभ्यर्थियों ने कहा कि -ले के रहेंगे वर्दी… छोड़ेंगे नहीं. सपना जरूर पूरा होगा. मेहनत हो रही है तो सपना पूरा होगा.

दौड़ लगाती अभ्यर्थियों की कहानी उन्हीं की जुबानी

आज के दौर में महिलाएं किसी से कम नहीं है. मेरा घर जिला मुख्यालय से काफी दूर है बावजूद यहां रहकर प्रैक्टिस कर रही हूं ताकि मेरे शरीर पर बिहार पुलिस की वर्दी आ सके.

रागिनी कुमारी, अभ्यर्थी

प्रथम प्रयास में ही लिखित परीक्षा पास की हूं, अब फिजिकल पास कर जाना है फिर तो शरीर पर वर्दी हो जाएगी और सारण की बेटी होने के नाते पुलिस विभाग में एक अलग माहौल बनाने का प्रयास करूंगी.

मुस्कान, अभ्यर्थीमहिलाओं के प्रति आए दिन उत्पीड़न की घटनाएं हो रही है ऐसे में महिलाओं को अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी और उसी के हिसाब से अपने को तैयार करना होगा. बिहार पुलिस में जाने की इच्छा है इसीलिए मेहनत हो रहीहै.

नसीमा खातून, अभ्यर्थीऐसा नहीं है कि महिलाएं पुरुषों से किसी मामले में पीछे हैं. इस मैदान में महिलाओं की भीड़ बता रही है कि आने वाला समय महिलाओं के हित में और बेहतर होगा और उनके जज्बे में और मजबूती आएगी.

अनीशा सिंह, अभ्यर्थीमहिला अभ्यर्थियों की मेहनत करते देख मन में यह बात आई की क्यों नहीं मेहनत के बल पर नौकरी पाई जाए और इसी क्रम में काफी संख्या में युवाओं ने भी प्रेक्टिस करना शुरू कर दिया है.

रोहित कुमार सिंह, अभ्यर्थीआज जबकि महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है ऐसे में सभी युवाओं को भी अपने आप पर भरोसा करते हुए और पूरे मेहनत के साथ नौकरी पाने की कोशिश करनी चाहिए, शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनानाचाहिए.

सार्थक, अभ्यर्थी

क्या कहते हैं ट्रेनर

यह तो मेरा प्रयास है कि सारण प्रमंडल के अधिक से अधिक बच्चे अपने मेहनत के बल पर बिहार पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सैन्य बल में अपनी जगह बनाएं और सारण का मान सम्मान बढ़ाएं.

मिंटू कुमार, ट्रेनर

क्या कहते हैं मेडिकल डॉक्टर

छात्राओं की इच्छा शक्ति को देखकर मुझे भी लगा कि इन सबकी मदद करनी चाहिए और इसी कड़ी में मैं भी इनके साथ जुड़ गया. मेडिकल जांच के दौरान जो आवश्यक बातें होती हैं मैं इन्हें बताते रहता हूं की क्या-क्या तैयारी होनी चाहिए और उसके लिए क्या करना चाहिए.

डॉ अनिल कुमार, मेडिकल फिटनेस डॉक्टर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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