दिघवारा का 90 साल पुराना खुरचन दुकान भी है खास, देश-विदेश तक लोग करते हैं ऑर्डर
Published by : Sakshi kumari Updated At : 28 May 2026 12:28 PM
थाली में बिक्री के लिए रखा खुरचन
Saran News: जिले का छोटा सा प्रखंड दिघवारा अपनी खास मिठाई “खुरचन” की वजह से देशभर में अलग पहचान बना चुका है. अपने अनोखे स्वाद और शुद्धता के कारण यह मिठाई नेताओं, अभिनेताओं और बड़े अधिकारियों तक की पसंद बन चुकी है.
Saran News: (दिघवारा से अमित की रिपोर्ट)
जिले का छोटा सा प्रखंड दिघवारा अपनी खास मिठाई “खुरचन” की वजह से देशभर में अलग पहचान बना चुका है. अपने अनोखे स्वाद और शुद्धता के कारण यह मिठाई नेताओं, अभिनेताओं और बड़े अधिकारियों तक की पसंद बन चुकी है. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से लेकर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तक इस मिठाई का स्वाद चख चुके हैं. आज भी राजधानी दिल्ली तक लोग संदेश के रूप में दिघवारा का मशहूर खुरचन लेकर जाना नहीं भूलते.
90 साल पुराना है दिघवारा के खुरचन का इतिहास
दिघवारा का खुरचन करीब नौ दशक पहले अस्तित्व में आया था. सबसे पहले स्वर्गीय रामनारायण साह ने इस खास मिठाई को तैयार किया था. उस समय जिसने भी पहली बार खुरचन खाया, वह इसके स्वाद का मुरीद हो गया. बाद में उनके पुत्र काशी साह ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और खुरचन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई.
दूसरे शहरों में नहीं मिल पाया वैसा स्वाद
दिघवारा के खुरचन को अन्य जगहों पर बनाने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन कहीं भी इसकी असली मिठास और स्वाद नहीं मिल सका. लोगों का कहना है कि जो स्वाद दिघवारा के खुरचन में है, वह कहीं और नहीं मिलता.
पांच से छह सौ रुपये किलो बिकता है खुरचन
शुरुआती दौर में खुरचन मात्र दस रुपये किलो बिकता था, लेकिन अब इसकी कीमत पांच से छह सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है. बावजूद इसके इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सीमित उत्पादन के कारण कई लोग एडवांस ऑर्डर देकर खुरचन मंगवाते हैं.
बनाने में लगती है घंटों की मेहनत
वर्तमान में काशी साह के पुत्र संतोष कुमार इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने बताया कि खुरचन बनाने के लिए शुद्ध दूध को कड़ाही में लगातार उबालकर सुखाया जाता है. इसके बाद कड़ाही में जमी मलाई को खुरच-खुरचकर चीनी के पाक में तैयार किया जाता है. एक किलो खुरचन बनाने में सात से आठ किलो दूध और करीब तीन घंटे का समय लगता है.
दिनभर में बन पाता है सिर्फ पांच से छह किलो खुरचन
संतोष कुमार के अनुसार सुबह पांच बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक लगातार मेहनत के बाद मात्र पांच से छह किलो खुरचन तैयार हो पाता है. इसके लिए तीन भट्ठियों पर चार लोग लगातार काम करते हैं. मेहनत ज्यादा और मुनाफा कम होने के बावजूद वे पूर्वजों की इस विरासत को जीवित रखे हुए हैं.
मुशर्रफ से लेकर लालू तक चख चुके हैं स्वाद
संतोष कुमार ने बताया कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के भारत दौरे के दौरान विशेष ऑर्डर पर खुरचन तैयार कराया गया था. इसके अलावा लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, राजीव प्रताप रूडी समेत कई बड़े नेता इस मिठाई के दीवाने रहे हैं.
भोजपुरी सितारों की भी पहली पसंद बना खुरचन
भोजपुरी अभिनेता और गायक खेसारी लाल यादव अक्सर दिघवारा का खुरचन मंगवाते रहते हैं. वहीं अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, मनोज तिवारी और पवन सिंह भी इस मिठाई का स्वाद ले चुके हैं.नेताओं से लेकर कलाकारों तक हर कोई इस मिठाई की तारीफ करता नजर आता है. दिघवारा का खुरचन सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी मिठास फैला चुका है. नेताओं और अधिकारियों से मिलने जाने वाले लोग खास तौर पर संदेश के रूप में इस मिठाई को साथ लेकर जाते हैं.
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By Sakshi kumari
साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
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