सारण सदर अस्पताल में बिना ऑपरेशन ठीक हो रहे जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर, पोंसेटी विधि से क्लबफुट पीड़ित बच्चों का शुरू हुआ निःशुल्क इलाज

सर्जरी करते चिकित्सक | Prabhat Khabar Network
Saran News: सारण सदर अस्पताल में जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों (क्लबफुट) से पीड़ित बच्चों के लिए विश्वस्तरीय उपचार की शुरुआत हुई है। पोंसेटी विधि से बिना किसी बड़े ऑपरेशन के बच्चों के पैरों को सामान्य बनाया जा रहा है, जिससे हजारों परिवारों को उम्मीद मिली है।
Saran News: जन्म के समय टेढ़े-मेढ़े पैरों (क्लबफुट) के साथ जन्म लेने वाले बच्चों के लिए अब छपरा सदर अस्पताल उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है. अस्पताल में जुलाई से पोंसेटी विधि के माध्यम से क्लबफुट पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज शुरू किया गया है. इस आधुनिक तकनीक से बिना बड़े ऑपरेशन के बच्चों के टेढ़े-मेढ़े पैरों को धीरे-धीरे सामान्य बनाया जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार समय पर उपचार शुरू होने पर अधिकांश बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार क्लबफुट को किस्मत या भगवान की इच्छा मानकर इलाज नहीं कराते हैं. जानकारी के अभाव, आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ऐसे कई बच्चे जीवनभर शारीरिक विकलांगता जैसी स्थिति का सामना करते हैं. लेकिन अब सदर अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधा इस सोच को बदल रही है.
पोंसेटी विधि से बिना बड़े ऑपरेशन के हो रहा उपचार
सदर अस्पताल में जन्मजात क्लबफुट से प्रभावित बच्चों का इलाज विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पोंसेटी विधि से किया जा रहा है. इस तकनीक में बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है. उपचार के दौरान बच्चे के पैर पर विशेष प्लास्टर चढ़ाया जाता है और प्रत्येक सप्ताह उसे बदलते हुए पैर की विकृति को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाया जाता है. इस प्रक्रिया को सीरियल प्लास्टर कास्टिंग कहा जाता है. इससे बच्चे को कम तकलीफ होती है और उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है.
समय पर इलाज से पूरी तरह सामान्य हो सकता है बच्चा
सदर अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि अमृत ने बताया कि यदि जन्म के तुरंत बाद या शुरुआती महीनों में ही क्लबफुट का इलाज शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं. वे सामान्य बच्चों की तरह चलने, दौड़ने, खेलने और पढ़ाई सहित सभी दैनिक गतिविधियां आसानी से कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं, बल्कि जन्मजात विकृति है, जिसका समय पर उपचार होने पर लगभग पूरी तरह सुधार संभव है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि नवजात के पैरों में किसी प्रकार का टेढ़ापन दिखाई दे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें.
गरीब परिवारों के लिए राहत बनी अनुष्का फाउंडेशन
इस पहल में सामाजिक संस्था अनुष्का फाउंडेशन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. संस्था की ओर से क्लबफुट के इलाज में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है. कई ऐसे अभिभावक, जो इलाज का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं थे, अब बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने बच्चों का उपचार करा पा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सरकारी अस्पताल और सामाजिक संस्था के संयुक्त प्रयास से अधिक से अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिल सकेगा.
जागरूकता बढ़ाने पर भी दिया जा रहा जोर
सदर अस्पताल के प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में क्लबफुट को लेकर आज भी कई भ्रांतियां हैं. कुछ लोग इसे भाग्य या ईश्वर की इच्छा मान लेते हैं, जबकि यह पूरी तरह इलाज योग्य स्थिति है. इसलिए इलाज उपलब्ध कराने के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल की यह पहल उन परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर निराश हो जाते थे. अब आधुनिक चिकित्सा, प्रशिक्षित चिकित्सकों और समय पर उपचार की बदौलत जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैरों वाले बच्चे भी सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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