शहर में जर्जर हैं 200 से अधिक गलियां, मुख्य मार्ग पर बढ़ रहा दबाव

छपरा शहर में गलियों का जाल है. जब भी मुख्य मार्ग पर दबाव बढ़ता है तो लोग मुहल्ले की गलियों से ही एक छोर से दूसरे छोर तक निकल जाते हैं.
छपरा. छपरा शहर में गलियों का जाल है. जब भी मुख्य मार्ग पर दबाव बढ़ता है तो लोग मुहल्ले की गलियों से ही एक छोर से दूसरे छोर तक निकल जाते हैं. लेकिन विगत कुछ सालों में विभिन्न निर्माण कार्यों के दौरान शहर की गलियों को तोड़ दिया गया. जिसका मेंटेनेंस आधा अधूरा है. इस कारण अब मुख्य मार्ग पर फिर से दबाव बढ़ रहा है. जाम होने की स्थिति में लोग चाह कर भी गली मुहल्ले की सड़कों से आवागमन नहीं कर पाते हैं. छपरा शहर में ब्रम्हपुत्र से लेकर भिखारी चौक के बीच के करीब आठ किलोमीटर के दायरे में 400 से अधिक छोटी बड़ी गालियां मौजूद हैं. लेकिन अभी 200 के करीब गलियां पूरी तरह जर्जर हैं. गैस पाइपलाइन योजना, नमामि गंगे प्रोजेक्ट, नल जल योजना आदि कार्यों की वजह से गलियों को तोड़ दिया गया. वहीं यहां के गड्ढों को नहीं भरा गया और नाही तोड़ी गयी सड़क का दोबारा मेंटेनेंस हुआ. अभी बरसात का समय चल रहा है. ऐसे में लगभग सभी गली मुहल्ले में जमा मिट्टी कीचड़ में तब्दील है और आवागमन पूरी तरह ठप है.
ज्यादातर गलियों में अतिक्रमण की भी समस्याशहर के ज्यादातर गली मुहल्ले में अतिक्रमण है. कई जगहों पर तो गलियों का अस्तित्व भी समाप्त होने के कगार पर है. शहर के दौलतगंज मुहल्ले से लेकर नयी बाजार होते हुए सोनारपट्टी तक आने वाली निचली सड़क से जुड़े हुए करीब 70 गलियों में से अभी मात्र 40 गलियों का अस्तित्व ही बचा हुआ है. कई गलियों को बंद कर दिया गया है और यहां अब ऊंचे-ऊंचे मकान खड़े हुए हो गये हैं. कुछ जगहों पर तो 8 से 10 फुट चौड़ी गली में लोगों ने आगे बढ़कर घर बना लिया है. वहीं कुछ जगहों पर सीढ़ी का रैंप आगे बढ़कर बनाये जाने से गली का दायरा महज दो से तीन फुट बचा हुआ है. इस कारण इन गलियों में बाइक का आना भी मुश्किल हो जाता है. मोहन नगर, दलदली बाजार, सरकारी बाजार, काशी बाजार, मालखाना रोड, अस्पताल चौक आदि इलाकों में गलियां अतिक्रमण का शिकार हैं.
लोगों ने कहा गलियों का मेंटेनेंस हो तो मुख्य मार्ग पर कम होगा दबाव
शहर के दहियावां निवासी रामबालक प्रसाद बताते हैं कि 70-80 के दशक तक शहर में गलियों से आवागमन काफी सहज था. मुख्य मार्ग पर दबाव कम था. दहियावां से होते हुए तेलपा तथा इनई तक जाने के लिए इतनी अधिक गलियां थी. जिस कारण मुख्य मार्ग से जाना ही नहीं पड़ता था. शहर के तेलपा निवासी भरत प्रसाद बताते हैं कि तेलपा से लेकर इनई तक के की करीब 10 किलोमीटर की दूरी वह शहर की गलियों से होकर ही पूरा कर लेते थे. शहर के मौना बानगंज निवासी ओमप्रकाश गुप्त बताते हैं कि मौना मोहल्ले में ही करीब 35-40 गलियां मौजूद हैं. जो सभी मुख्य मार्ग से जुड़ी हुई हैं. मौना मुहल्ले से होकर सरकारी बाजार, सोनारपट्टी, थाना चौक आदि इलाकों में जाने के लिए लोग गली मुहल्ले का ही सहारा लेते हैं. लेकिन आज गली मुहल्ले की सड़कों की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है. जिस कारण आवागमन में परेशानी होती है. मुख्य मार्ग भी नहीं हैं दुरुस्तएक तरफ गली मुहल्ले की सड़क जर्जर है. वहीं दूसरी तरफ शहर के मुख्य मार्ग पर भी आवागमन सहज नहीं है. इस समय शहर के तेलपा से लेकर सरकारी बस स्टैंड के बीच डबल डेकर पुल का निर्माण कार्य चल रहा है. जिस कारण जगह-जगह पाइलिंग कार्य के कारण सड़क तोड़ दी गयी है और अतिक्रमण के कारण भी शहर के मुख्य मार्गों से आवागमन में अक्सर परेशानी होती है. खासकर शहर के थाना चौक, साहेबगंज, सलेमपुर रोड, मौना, गुजरी मुख्य मार्ग पर काफी अतिक्रमण है. जिस कारण मुख्य मार्ग से भी आने-जाने में लोगों को कठिनाई हो रही है.
– शहर में कुल वार्ड – 45
– शहर में गलियां- 400 से अधिक – इस समय जर्जर गलियां- 200 – अप्रोच रोड- 04 – शहर की मुख्य सड़क- भिखारी मोड़-ब्रम्हपुर रोड – वैकल्पिक सड़क- तेलपा-इनई निचली सड़क क्या कहते हैं जिम्मेवार शहर में जितने भी गली मुहल्ले इस समय जर्जर हैं उनके मेंटेनेंस के लिए विभिन्न निर्माण एजेंसियों को कहा गया है. कई जगहों पर तोड़ी गयी सड़कों को फिर से बनाया गया है. वहीं जहां गली मुहल्ले में जलजमाव है. वहां जल निकासी भी करायी जा रही है. सुमीत कुमार, नगर आयुक्त, छपरा नगर निगमडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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