बिहार ने रचा इतिहास! यहां के इंजन से अफ्रीका की पटरियों पर जल्द दौड़ेंगी ट्रेनें, रवाना हुई पहली खेप
Published by : Rani Thakur Updated At : 25 Aug 2025 11:27 AM
सांकेतिक तस्वीर
Bihar Train: राज्य के मढ़ौरा में स्थित रेल इंजन कारखाना ने नया इतिहास रच दिया है. इस कारखाने में तैयार हो रहा रेल इंजन अब अफ्रीकी देश गिनी की पटरियों पर दौड़ने को तैयार हो चुका है. इस कड़ी में चार इंजन की पहली खेप वहां के लिए रवाना हो गई है
Bihar Train: राज्य के मढ़ौरा में स्थित रेल इंजन कारखाना ने नया इतिहास रच दिया है. इस कारखाने में तैयार हो रहा रेल इंजन अब अफ्रीकी देश गिनी की पटरियों पर दौड़ने को तैयार हो चुका है. इस कड़ी में चार इंजन की पहली खेप वहां के लिए रवाना हो गई है. मेक इन इंडिया की अवधारणा को सार्थक बनाते हुए निर्यात किए गए इन इंजनों का नाम ‘कोमो’ रखा गया है.
इसी वर्ष हुआ था करार
बता दें कि गिनी देश का एक प्रतिनिधि मंडल इस वर्ष मई-जून में यहां आया हुआ था. उस दौरान 140 लोकोमोटिव इंजन निर्यात के लिए तीन हजार करोड़ का एकरारनामा इस कंपनी के साथ हुआ था. जिसके तहत दो महीने बाद ही इसकी पहली खेप रवाना हो गई है. जल्द ही ‘कोमो’ की अन्य खेपें भी रवाना की जाएंगी. गिनी देश के लिए निर्यात किए जाने वाले इन रेल इंजनों की क्षमता 4500 हार्स पॉवर है.
नीला है निर्यात होने वाले इंजन का रंग
जानकारी के अनुसार आने वाले समय में 6 हजार हार्स पॉवर तक की क्षमता वाले रेल इंजन का निर्माण करने की योजना है. भारत में सप्लाई होने वाले इन रेल इंजनों का रंग लाल और पीला होता है. जबकि, गिनी निर्यात होने वाले रेल इंजन का रंग नीला रखा गया है. इसके सभी इंजनों का कैब पूरी तरह से एयरकंडीशन है. विदेश भेजे गए इन इंजनों में इवेंट रिकॉर्डर, लोको कंट्रोल, खास तरह का ब्रेक सिस्टम एएआर समेत अन्य कई खास तरह के उपकरण लगाये गये हैं. इनकी उपयोगिता अलग-अलग तरह से है.
700 इंजनों का हो चुका निर्माण
प्राप्त जानकारी के अनुसार मढ़ौरा रेल इंजन कारखाना से साल 2018 से अब तक कुल 700 इंजन का निर्माण किया जा चुका है. प्रतिवर्ष यहां लगभग 100 रेल इंजनों का निर्माण किया जाता है. वहीं, पिछले नौ सालों में यहां 250 से अधिक रेल इंजन का मेंटेनेंस किया जा चुका है, जो गांधीधाम (गुजरात) स्थित रेल इंजन कारखाना से कहीं ज्यादा है. पिछले 4 वर्षों में यहां 500 रेल इंजनों को मेंटेन किया गया है.
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गिनी को निर्यात होंगे 140 इंजन
बता दें कि इस रेल इंजन कारखाने से प्रति वर्ष बिहार को कुल 900 करोड़ रुपये की जीएसटी मिलती है. इतनी ही जीएसटी केंद्र सरकार के पास भी जाती है. इस कंपनी के खुलने से आसपास के इलाके में आर्थिक गतिविधि का विकास हुआ है. यहां 3 होटल, 7 रेस्टुरेंट, 6 स्कूल, 3 बैंक, 6 एटीएम समेत अन्य सुविधाएं यहां विकसित हुई हैं. वाराणसी रेल इंजन कारखाना से पिछले 50 सालों में 15 से 20 इंजन का निर्यात किया जा चुका है. जबकि, मढ़ौरा की इस कंपनी से अकेले गिनी को 140 इंजन निर्यात किए जाएंगे.
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By Rani Thakur
बंगाल की धरती पर एक दशक से अधिक समय तक समृद्ध पत्रकारिता अनुभव के साथ, रानी ठाकुर अब बिहार की धरती पर अपनी लेखनी से पहचान बना रही हैं. कोलकाता में कई राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित अखबारों के लिए रिपोर्टिंग और सब-एडिटिंग का अनुभव हासिल करने के बाद, वे अब प्रभात खबर के डिजिटल डेस्क से जुड़ी हैं, जहां वे लाइफ स्टाइल की खबरों के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच और पत्रकारिता कौशल को नई दिशा दे रही हैं.
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