गार्ड के अभाव में इलाज नहीं मिल रहा बेहतर इलाज

Published at :20 Jan 2017 8:11 AM (IST)
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गार्ड के अभाव में इलाज नहीं मिल रहा बेहतर इलाज

छपरा (सदर) : छपरा मंडल कारा में कम से कम पांच बंदी विभिन्न गंभीर बिमारियों से ग्रस्त हैं. जिनकी बेहतर चिकित्सा स्थानीय स्तर पर संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में कारा प्रशासन के पत्र के आलोक में डीएम के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने भी इन पांच बंदियों को बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच […]

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छपरा (सदर) : छपरा मंडल कारा में कम से कम पांच बंदी विभिन्न गंभीर बिमारियों से ग्रस्त हैं. जिनकी बेहतर चिकित्सा स्थानीय स्तर पर संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में कारा प्रशासन के पत्र के आलोक में डीएम के निर्देश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने भी इन पांच बंदियों को बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच या अन्य उपयुक्त अस्पतालों में भेजने की अनुशंसा कर दी है.
परंतु, अबतक कारा प्रशासन इन बंदियों को बेहतर इलाज के लिए नहीं भेज पाया है. एक माह पूर्व मेडिकल बोर्ड होने के बावजूद बंदियों को सुरक्षा गार्ड के अभाव में मंडल कारा से पटना के संबंधित अस्पतालों में नहीं भेजे जाने से अपने जीवन को लेकर भयभीत एक बंदी छपरा कोर्ट में भी संबंधित पदाधिकारियों की उदासीनता की वजह से नहीं भेजे जाने को लेकर इच्छा मृत्यु की गुहार लगायी है.
परंतु, अभी सुरक्षा गार्ड के अभाव में बंदियों को इलाज के लिए नहीं भेजे जाने के पीछे यह बात बतायी जाती है कि एसपी के आदेश के बावजूद छपरा पुलिस लाइन के सार्जेंट मेजर के द्वारा सुरक्षा गार्ड उपलब्ध नहीं कराया जा रहा जिससे बीमार बंदियों को यह परेशानी हो रही है. मंडल कारा छपरा में बंद जिन पांच बंदियों को मेडिकल बोर्ड में गत दिसंबर माह के मध्य में ही बेहतर इलाज के मद्देनजर छपरा से बाहर भेजने की अनुशंसा की थी. उनमें विजय कुमार ठाकुर उर्फ मुन्ना ठाकुर, बैजनाथ सिंह, राजा, अमरेंद्र सिंह, वीरेंद्र शामिल है. वहीं सदर अस्पताल में दो बंदी इलाज के लिए भर्ती है.
पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार राज के द्वारा उपलब्ध कराये गये एक चार के गार्ड जो बीमार बंदियों को बाहर ले जाने के लिए तैनात है वे विगत 10 से 15 दिनों से सदर अस्पताल में इलाजरत बंदियों की सुरक्षा व्यवस्था में लगे हैं. ऐसी स्थिति में काराधीक्षक सुभाष प्रसाद से पूछने पर उनका कहना है कि सुरक्षा गार्ड मिलते ही संबंधित बंदियों को इलाज के लिए भेज दिया जायेगा. उधर बंदियों के परिजनों की माने तो इलाज में अनावश्यक देर होने से उनके परिवार के बंदी के जीवन को लेकर भय लग रहा है.
वहीं टीबी के बिमारी से ग्रसित एक बंदी मनोज कुमार राय जिसे चार दिन पूर्व सदर अस्पताल में भर्ती किया गया था. उसे बुधवार को सदर अस्पताल प्रशासन ने अपने यहां से वापस छपरा कारा में भेज दिया. इसके पीछे भी संबंधित सुरक्षाकर्मियों की संबंधित बीमार बंदी की सुरक्षा का जिम्मा नहीं लेने की बात बतायी जाती है. इधर कारा प्रशासन ने इस बीमार बंदी को छपरा जेल के अस्पताल में रखकर बेहतर इलाज की व्यवस्था करने को मजबूर है.
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