तैयारी के लिए विभाग को नहीं मिली राशि

Published at :19 Jan 2017 3:53 AM (IST)
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तैयारी के लिए विभाग को नहीं मिली राशि

उदासीनता Â कार्यक्रमों के आयोजन के नोडल पदाधिकारी को अपने दायित्व के संबंध में जानकारी तक नहीं छपरा (सदर) : सरकार के निर्देश के आलोक में 15 से 21 जनवरी तक भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था. वहीं आपदा प्रबंधन के प्रभारी पदाधिकारी की देख-रेख में डीएम की […]

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उदासीनता Â कार्यक्रमों के आयोजन के नोडल पदाधिकारी को अपने दायित्व के संबंध में जानकारी तक नहीं

छपरा (सदर) : सरकार के निर्देश के आलोक में 15 से 21 जनवरी तक भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था. वहीं आपदा प्रबंधन के प्रभारी पदाधिकारी की देख-रेख में डीएम की अध्यक्षता में भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत कॉलेजों में नुक्कड़ नाटक, वाद विवाद प्रतियोगिता, मॉक ड्रिल कार्यक्रम का आयोजन तथा जिला एवं अनुमंडल स्तर पर भूकंप रोधी मकान बनाने के लिए सेमिनार के आयोजन का निर्णय लिया गया था. इस कार्यक्रम के लिए नोडल पदाधिकारी भवन निर्माण प्रखंड के कार्यपालक अभियंता को अधिकृत किया गया है. भूकंप सुरक्षा सप्ताह के चार दिन बीत गये. राजेंद्र महाविद्यालय, जेपी इंजीनियरिंग कॉलेज आदि में
एनडीआरएफ के द्वारा मॉक ड्रिल का आयोजन करना था तथा नगर पर्षद सभागार एवं अनुमंडल मुख्यालयों में भूकंप रोधी मकान बनाने के लिए जागरूकता हेतु का आयोजन होना था. परंतु,अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्यक्रम का आयोजन न मॉक ड्रिल के रूप में और सेमिनार के रूप में हुआ. अब जब 21 जनवरी को मानव शृंखला मनाने का कार्यक्रम है ऐसी स्थिति में भूकंप सुरक्षा सप्ताह के लिए महज दो दिन शेष बचे हैं.
परंतु, आपदा प्रबंधन के पदाधिकारी को तो अभी अपने विभाग के कार्यक्रमों के प्रगति के संबंध में अद्यतन जानकारी तक नहीं है तो नोडल पदाधिकारी बनाये गये भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता रामाधार राम ने बुधवार को बताया कि उन्हें तो इस संबंध में कोई पत्र नहीं मिला है. वे इस संबंध में जानकारी हुई तो निश्चित तौर पर पता करेंगे. आपदा प्रबंधन विभाग पटना प्रतिवर्ष इस मद में राशि भेजती है जिसे भूकंप सुरक्षा सप्ताह के दौरान विभिन्न स्थलों पर कार्यक्रमों का आयोजन तथा व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ ही एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ के माध्यम से मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाये.
परंतु, जिला पदाधिकारी सारण द्वारा सात जनवरी को ही पिछले वर्ष के बकाया 38 हजार रुपये तथा चालू सुरक्षा सप्ताह के तहत सामग्रियों के मुद्रण के लिए एक लाख रुपये तथा नुक्कड़ नाटकों के आयोजनों के लिए 1 लाख 12 हजार रुपये तो एनडीआरएफ के लिए आवाशन, भोजन, इंधन की व्यवस्था हेतु एक लाख रुपये के अलावा गत साल का 38 हजार रुपये बकाया मांगा है. परंतु इस मद में अबतक राशि उपलब्ध नहीं होने की बात आपदा प्रबंधन के प्रभारी पदाधिकारी बताते हैं.
वहीं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु एक लाख रुपये की सामग्री क्रेडिट ही प्रकाशित कर विभिन्न अनुमंडल एवं प्रखंड मुख्यालयों में पहुंचवाने तथा जिला मुख्यालयों के कार्यालयों में बैनर लगवाने की बात कहते है.
15 से 21 जनवरी तक जागरूकता कार्यक्रम के तहत प्रशासनिक स्तर तक मॉक ड्रिल, सेमिनार, निबंध प्रतियोगिता का होना था आयोजन
विभाग से राशि नहीं मिलना व स्थानीय स्तर पर उदासीनता मुख्य वजह
सारण जिला अतिसंवेदनशिल जोन में
सारण जिला सिस्मिक जोन चार अर्थात अतिसंवेदनशिल जोन में है. ऐसी स्थिति में यहां रिक्टर स्केल पर 6 से 6.9 की तीव्रता तक का भूकंप आने की पूरी संभावना बनी रहती है. गत वर्षों में लगातार भूकंप के झटके महसूस किये जाने के बाद आम जनों में भूकंप को लेकर अन्य आपदाओं से ज्यादा ही खौफ है. ऐसी स्थिति में भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत आम लोगों को अधिक से अधिक जानकारी देकर जागरूक करने के कार्यक्रम के नहीं संचालित होने से आम जनों में चर्चाएं है. आखिर प्राकृतिक आपदाओं में सबसे भयावह मानी जाने वाली भूकंप जैसी आपदा के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आयोजित होने वाले सुरक्षा सप्ताह में प्रशासनिक उदासीनता की चर्चाएं लोग कर रहे है. कई प्रखंडों में तो आपदा प्रबंधन विभाग से मिली प्रचार सामग्री कार्यालय की शोभा बनकर रह गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत निर्धारित कार्यक्रमों के आयोजन की उन्हें अद्यतन जानकारी नहीं है. निश्चित तौर पर मानव शृंखला के निर्माण की तैयारी की वजह से भूकंप सुरक्षा सप्ताह के तहत आयोजित होने वाले कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं. 21 जनवरी को भूकंप सुरक्षा सप्ताह का अंतिम दिन है.
परंतु, मानव शृंखला की वजह से यह कार्यक्रम उस दिन भी संचालित नहीं हो पायेगा. बाद में भूकंप सुरक्षा सप्ताह आयोजित कर लोगों को भूकंप सुरक्षा के प्रति विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूक किया जायेगा.
एसके पड़ित, प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन शाखा, सारण
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