‘दिला दो भीख दर्शन की प्रभु तेरा भिखारी हूं’

Published at :03 Jan 2017 11:54 PM (IST)
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‘दिला दो भीख दर्शन की प्रभु तेरा भिखारी हूं’

दिघवारा : दिला दो भीख दर्शन की, प्रभु तेरा भिखारी हूं, आम अमरईया में तलवा तइर्लया में लहरे बसुरिया की तान, झूम-झूम बगिया में नाचे बिहान, आज देश की मिट्टी तुझको फिर से रही पुकार, सावधान गरदन पर तेरी झूल रही तलवार, जवानों बढ़े चलो प्रलय पर चढ़े चलो. रागेश कला संस्कृति संस्थान आमी द्वारा […]

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दिघवारा : दिला दो भीख दर्शन की, प्रभु तेरा भिखारी हूं, आम अमरईया में तलवा तइर्लया में लहरे बसुरिया की तान, झूम-झूम बगिया में नाचे बिहान, आज देश की मिट्टी तुझको फिर से रही पुकार, सावधान गरदन पर तेरी झूल रही तलवार, जवानों बढ़े चलो प्रलय पर चढ़े चलो. रागेश कला संस्कृति संस्थान आमी द्वारा गंगा तट स्थित महावीर मंदिर के प्रांगण में आयोजित भोजपुरी भाषा के प्रसिद्ध महान कवि अर्जुन सिंह अशांत को श्रद्धापूर्वक सांगीतिक श्रद्धांजलि स्वर सम्राट संतराज सिंह रागेश के छोटे पुत्र दिलीप कुमार सिंह ने दी.

कार्यक्रम का शुभारंभ बुद्धायन के प्रणेता व गीतकार अर्जुन सिंह अशांत की 13वीं पुण्यतिथि सुंदर कांड एवं बुद्धायन के आदि पाठ से हुआ. श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में अधिवक्ता प्रियरंजन सिंह, शिक्षक सियाराम सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, रामनरेश यादव, कोषाध्यक्ष अखिलेश कुमार सिंह, रमेश शर्मा शामिल थे.भोजपुरी रत्न महाकवि अशांत को श्रद्धापूर्वक दी गयी श्रद्धांजलि

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