सड़ रहे करोड़ों के दोपहिया वाहन लापरवाही . 16 वर्ष बाद होती है नीलामी

Published at :03 Jun 2016 11:59 PM (IST)
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सड़ रहे करोड़ों के दोपहिया वाहन लापरवाही . 16 वर्ष बाद होती है नीलामी

छपरा (सारण) : दोपहिया वाहनों की आयु 15 वर्ष है और लावारिस हालत में मिलने पर 16 वर्ष बाद होगी नीलामी. सरकार के वर्षों पुराने इस नियम के कारण पुलिस द्वारा जब्त करोड़ों रुपये के दोपहिया वाहन अपना अस्तित्व खो रहे हैं और कबाड़ बनते जा रहे हैं. इस वजह से थानों की हालत काबड़ […]

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छपरा (सारण) : दोपहिया वाहनों की आयु 15 वर्ष है और लावारिस हालत में मिलने पर 16 वर्ष बाद होगी नीलामी. सरकार के वर्षों पुराने इस नियम के कारण पुलिस द्वारा जब्त करोड़ों रुपये के दोपहिया वाहन अपना अस्तित्व खो रहे हैं और कबाड़ बनते जा रहे हैं. इस वजह से थानों की हालत काबड़ का रूप लेती जा रही है.

जिले के 34 थानों में पांच हजार से अधिक दोपहिया वाहन वर्षों से जब्त हैं. चोरी व लूट के बिना कागजात वाले वाहनों के साथ प्रति माह 30-40 वाहन बरामद हो रहे हैं, जिनके कोई दावेदार भी नहीं आ रहे हैं. बिना दावा वाले वाहनों की नीलामी करने की प्रक्रिया जटिल रहने के कारण पुलिस पदाधिकारी भी इस लफड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं.

खास बातें
कंपनी द्वारा बनाने के साथ वाहनों की आयु 15 वर्ष मानी गयी है
मोटर वाहन अधिनियम के तहत 15 वर्ष पुराने वाहनों को सड़क पर नहीं चलाना है
शो रूम से वाहनों के निकलने पर एक मुश्त 15 वर्ष के लिए ही निबंधन व परमिट निर्गत होता है
ध्वनि प्रदूषण तथा वायू प्रदूषण नियंत्रण के दृष्टिकोण से 15 वर्ष पुराने वाहनों को चलाने पर रोक है.
सरकार द्वारा यह प्रावधान किया गया है कि लावारिस हालत में जब्त वाहनों को 16 वर्ष बाद नीलाम करना है.
पुलिस द्वारा जब्त लावारिस वाहनों को नीलाम करने का नियम उस समय बना था, जब संचार व प्रचार प्रसार के माध्यमों की कमी थी
21 वीं सदी में प्रचार-प्रसार व संचार माध्यमों के जरिये एक सप्ताह में आमजनों तक व्यापक सूचनाएं पहुंच जाती हैं
शाम को जब्त वाहन के दावेदार 24 घंटे में पहुंच जाते हैं.
सूचना क्रांति के इस दौर में भी बाबा आदम जमाने की परंपरा कायम है
नहीं आ रहे हैं दावेदार : पुलिस के द्वारा अपराधियों को पकड़ने के साथ चोरी व लूट के वाहनों को जब्त किया जा रहा है, जिनका कोई भी वास्तविक दावेदार थाने में नहीं पहुंच रहा है. पकड़ा गया व्यक्ति भी वाहनों का कागजात प्रस्तुत नहीं करता है. दावेदार के नहीं आने के कारण थानों में वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है.
क्या है वजह : वाहन चोरी होने के बाद मालिकों द्वारा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी जाती है और इंश्योरेंस कंपनी से चोरी गये वाहनाें का क्लेम दावा कर भुगतान ले लिया जाता है. इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम ले लेनेवाले वाहन मालिक वाहन बरामद होने के बावजूद दावा करने नहीं आते हैं. वाहन चुराने के बाद चोरों के द्वारा वाहनों के इंजन तथा चेसिस के नंबरों को मिटा दिया जाता है और पंचिंग कर नया नंबर गोद दिया जाता है, जिसके कागजात ही नहीं मिलते हैं. अपराधियों द्वारा फर्जी कागजात बनवा कर चोरी के वाहनों को बेचने के लिए इंजन तथा चेसिस नंबर बदला जाता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जब्त लावारिस वाहनों के दावेदार 16 वर्ष तक नहीं आने पर नीलाम करने का प्रावधान है. 16 वर्षों तक रखे जाने के बाद वाहनों को कोई नीलामी में नहीं लेना चाहता है. लंबी अवधि तक रखे रहने वाहनों के उपकरण उपयोग लायक नहीं रह जाते हैं.
पंकज कुमार राज, पुलिस अधीक्षक, सारण
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